पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर रिहा होने की खबर ने बुधवार शाम जिले की सियासी और प्रशासनिक हलचल को एक बार फिर तेज कर दिया। देवरिया जिला कारागार में दस दिसंबर से निरुद्ध चल रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के आदेश के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया। जेल प्रशासन ने पुष्टि की कि जमानतदारों के सत्यापन और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अदालत के निर्देशानुसार रिहाई की प्रक्रिया संपन्न की गई।
सीजेएम के आदेश के बाद पूरी हुई रिहाई प्रक्रिया
देवरिया के जेल अधीक्षक आशीष रंजन के अनुसार, अदालत द्वारा जमानत स्वीकृत किए जाने के बाद जमानतदारों का विधिवत सत्यापन कराया गया। इसके उपरांत सीजेएम अदालत ने रिहाई का आदेश जारी किया। आदेश प्राप्त होते ही जेल प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए बुधवार शाम उन्हें जिला कारागार से मुक्त कर दिया। सूत्रों का कहना है कि जेल से बाहर निकलने के बाद पूर्व आईपीएस अपने परिजनों और रिश्तेदारों के साथ चले गए।
क्या है जमीन आवंटन से जुड़ा मामला?
जिस प्रकरण में पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर रिहा हुए हैं, वह वर्ष 1999 में जिला उद्योग केंद्र, देवरिया द्वारा औद्योगिक भूखंड आवंटन से संबंधित है। आरोप है कि औद्योगिक भूखंड के आवंटन में गंभीर अनियमितता और फर्जीवाड़ा हुआ था। जांच में यह सामने आया कि कथित रूप से फर्जी नाम, पता और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर “नूतन इंडस्ट्रीज” के नाम से भूखंड का आवंटन कराया गया।
आरोपों के मुताबिक, यह आवंटन अलग-अलग तिथियों पर तैयार किए गए दस्तावेजों के माध्यम से कराया गया, जिनमें पहचान और स्वामित्व से जुड़ी सूचनाओं में विसंगतियां बताई गईं। मामले में यह भी आरोप है कि उस समय पद पर रहते हुए प्रभाव और पद का दुरुपयोग किया गया। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम सत्यता का निर्णय न्यायालय में लंबित है और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
पत्नी पर भी लगे थे दस्तावेजी अनियमितता के आरोप
मामले में पूर्व आईपीएस की पत्नी नूतन ठाकुर का नाम भी सामने आया था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि औद्योगिक भूखंड प्राप्त करने के लिए फर्जी दस्तावेजों और अलग-अलग पते का उपयोग किया गया। “नूतन इंडस्ट्रीज” के नाम से आवंटित भूखंड को लेकर कई प्रश्न उठाए गए। इसी आधार पर धोखाधड़ी और कूटरचना से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
हालांकि, बचाव पक्ष का कहना है कि सभी दस्तावेज नियमानुसार प्रस्तुत किए गए थे और राजनीतिक अथवा प्रशासनिक कारणों से मामला बढ़ाया गया। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें दर्ज हैं और न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की सुनवाई जारी है।
कानूनी प्रक्रिया जारी, अंतिम निर्णय शेष
यह स्पष्ट किया गया है कि पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर रिहा होने का अर्थ यह नहीं है कि मामला समाप्त हो गया है। जमानत एक कानूनी अधिकार है, जो आरोप सिद्ध होने या न होने से स्वतंत्र प्रक्रिया के तहत दिया जाता है। न्यायालय में अभी भी मामले की सुनवाई चल रही है और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही अंतिम निर्णय आएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में दस्तावेजी साक्ष्य, गवाहों के बयान और प्रशासनिक रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जाती है। इसलिए यह प्रकरण केवल एक व्यक्ति विशेष का मामला न होकर, औद्योगिक भूखंड आवंटन प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही से भी जुड़ा है।
प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज
जिले में इस रिहाई को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। औद्योगिक भूखंड आवंटन से जुड़े पुराने मामलों के फिर से चर्चा में आने से संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच एजेंसियां और न्यायालय स्वतंत्र रूप से अपना कार्य कर रहे हैं।
वहीं, कानूनी जानकारों का मानना है कि लंबे समय से लंबित मामलों में पारदर्शिता और समयबद्ध सुनवाई आवश्यक है, ताकि आरोप और प्रत्यारोप की स्थिति स्पष्ट हो सके।
जमानत के बाद की रणनीति पर नजर
सूत्रों के अनुसार, रिहाई के बाद पूर्व आईपीएस अपने अधिवक्ताओं से विस्तृत चर्चा करेंगे और आगामी कानूनी रणनीति तय करेंगे। जमानत मिलने के बाद अक्सर अभियुक्त पक्ष साक्ष्यों की समीक्षा और आगे की तैयारी में जुट जाता है। ऐसे में आने वाली सुनवाई इस मामले की दिशा तय कर सकती है।
फिलहाल, पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर रिहा होने के बाद मामला एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। न्यायालय की अगली तारीख और प्रस्तुत साक्ष्य इस पूरे प्रकरण को निर्णायक मोड़ दे सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को किस मामले में गिरफ्तार किया गया था?
उत्तर: उन्हें 1999 में जिला उद्योग केंद्र, देवरिया में औद्योगिक भूखंड आवंटन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के आरोप में जेल भेजा गया था।
प्रश्न 2: रिहाई कैसे हुई?
उत्तर: मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) द्वारा जमानत मंजूर किए जाने और जमानतदारों के सत्यापन के बाद उन्हें जिला कारागार से रिहा किया गया।
प्रश्न 3: क्या मामला खत्म हो गया है?
उत्तर: नहीं, जमानत केवल अस्थायी राहत है। मामले की सुनवाई अभी न्यायालय में जारी है।
प्रश्न 4: इस मामले में किन पर आरोप हैं?
उत्तर: आरोप पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी नूतन ठाकुर पर दस्तावेजी अनियमितता और पद के दुरुपयोग से जुड़े हैं।








