पठारी क्षेत्र में प्यासा गांव : पेयजल योजना के नाम पर लाखों का खेल, कागज़ों में बोरिंग–ज़मीन पर सूखी टंकी

चित्रकूट के मानिकपुर क्षेत्र में पेयजल योजना की टंकी और सूचना पट्ट, जहां ग्रामीणों ने बोरिंग और समर्सिबल न लगने का आरोप लगाया

संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
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चित्रकूट। बुंदेलखंड का पठारी इलाका अपनी प्राकृतिक कठोरता और संसाधनों की कमी के लिए पहले से ही जाना जाता रहा है। गर्मियों के मौसम में यहां पानी की एक-एक बूंद लोगों के लिए अमूल्य हो जाती है। लेकिन जब उसी पानी के नाम पर सरकारी योजनाओं में खेल होने लगे और कागज़ों पर विकास दिखाकर जमीन पर लोगों को प्यासा छोड़ दिया जाए, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि व्यवस्था की गंभीर विफलता भी बन जाती है।

चित्रकूट जिले के मानिकपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मड़ैयन के मजरे बिजहना कोलान से ऐसी ही एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां पेयजल व्यवस्था के नाम पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि गांव के लोगों को आज भी पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।

कागज़ों में बोरिंग और समर्सिबल, जमीन पर सिर्फ़ टंकी

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार बिजहना कोलान में क्षेत्र पंचायत की ओर से 15वें वित्त आयोग की योजना के तहत पेयजल व्यवस्था सुधारने के नाम पर लगभग 4.13 लाख रुपये का भुगतान किया गया। इस राशि के माध्यम से बोरिंग कराने, समर्सिबल पंप लगाने और पानी की टंकी स्थापित करने का दावा किया गया है।

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गांव में लगाए गए बोर्ड पर भी यही जानकारी दर्ज है कि क्षेत्र पंचायत द्वारा पेयजल व्यवस्था के लिए बोरिंग, समर्सिबल और टंकी का कार्य कराया गया है। लेकिन जब मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति देखी गई तो तस्वीर कुछ और ही सामने आई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां केवल टंकी का निर्माण हुआ है, जबकि बोरिंग और समर्सिबल पंप लगाने का कोई कार्य नहीं हुआ। जिस बोर को टंकी के पास दिखाया जा रहा है, वह करीब दस वर्ष पहले पूर्व प्रधान के कार्यकाल में कराया गया था।

ग्रामीणों ने बताया पानी के लिए भटकने की मजबूरी

बिजहना कोलान के ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पेयजल की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। गर्मी के दिनों में हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। महिलाएं और बच्चे दूर-दूर से पानी लाने को मजबूर होते हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि जब टंकी का निर्माण हुआ था, तब उन्हें उम्मीद थी कि अब गांव में पानी की समस्या खत्म हो जाएगी। लेकिन कुछ समय बीतने के बाद ही लोगों को यह एहसास हो गया कि यह योजना भी केवल कागज़ों तक सीमित रह गई है।

स्थानीय लोगों के अनुसार टंकी के पास जो बोर दिखाई देता है, वह पुराने समय का है और वर्तमान योजना के तहत कोई नया बोरिंग नहीं कराया गया। इसी तरह समर्सिबल पंप भी कभी नहीं लगाया गया।

जल जीवन मिशन की पाइपलाइन भी बनी बेकार

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि गांव में जल जीवन मिशन के तहत “हर घर नल योजना” की पाइपलाइन भी डाली गई थी। इस योजना के तहत दावा किया गया था कि हर घर तक पाइपलाइन के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंचेगा।

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लेकिन वास्तविकता यह है कि पाइपलाइन होने के बावजूद उसमें पानी नहीं आता। कई घरों में नल लगे हुए हैं, लेकिन वे केवल दिखावे के लिए रह गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

इस कारण गांव के लोग आज भी पारंपरिक जल स्रोतों या दूर के हैंडपंपों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।

जागरूकता अभियान के दौरान खुली हकीकत

“जीत आपकी चलो गांव की ओर जागरूकता अभियान” के संस्थापक एवं अध्यक्ष संजय सिंह राणा ने जब ग्राम पंचायत मड़ैयन के मजरे बिजहना कोलान का दौरा किया तो उन्होंने पेयजल व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को समझने का प्रयास किया।

ग्रामीणों से बातचीत के दौरान उन्हें पता चला कि योजना के नाम पर भारी रकम खर्च दिखाए जाने के बावजूद गांव में पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है।

उन्होंने मौके पर जाकर टंकी और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की। इस दौरान कई लोगों ने बताया कि योजना के तहत दिखाए गए कार्य वास्तव में हुए ही नहीं।

पठारी क्षेत्र की पीड़ा और व्यवस्था पर सवाल

चित्रकूट का पठारी क्षेत्र पहले से ही विकास की दृष्टि से पिछड़ा माना जाता है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां कठिन हैं और बुनियादी सुविधाओं की कमी लोगों की जिंदगी को और मुश्किल बना देती है।

ऐसे क्षेत्र में अगर पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा के नाम पर भी अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है, तो यह स्थानीय लोगों के साथ एक बड़ा अन्याय है।

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ग्रामीणों का कहना है कि अगर वास्तव में बोरिंग और समर्सिबल लगाए गए होते, तो गांव की पानी की समस्या काफी हद तक हल हो सकती थी। लेकिन कागज़ों पर योजनाएं पूरी दिखाकर वास्तविक काम अधूरा छोड़ दिया गया।

प्रशासनिक जांच की उठी मांग

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि पेयजल योजना के नाम पर हुए इस कथित फर्जीवाड़े की जांच कब होगी। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

ग्रामीणों का कहना है कि विकास योजनाओं का उद्देश्य लोगों को राहत देना होता है, लेकिन अगर उन्हीं योजनाओं में भ्रष्टाचार हो जाए तो जनता का विश्वास टूट जाता है।

FAQ

यह मामला किस गांव से जुड़ा है?

यह मामला चित्रकूट जिले के मानिकपुर विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत मड़ैयन के मजरे बिजहना कोलान से जुड़ा है।

कितनी राशि खर्च दिखाने का आरोप है?

ग्रामीणों के अनुसार पेयजल योजना के नाम पर लगभग 4.13 लाख रुपये खर्च दिखाए गए हैं।

ग्रामीणों की मुख्य शिकायत क्या है?

ग्रामीणों का आरोप है कि बोरिंग और समर्सिबल पंप का काम नहीं हुआ, केवल टंकी लगाकर लाखों रुपये खर्च दिखा दिए गए।

ग्रामीण क्या मांग कर रहे हैं?

ग्रामीणों ने पूरे मामले की प्रशासनिक जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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