दो आत्मिक मिलन
भावविभोर हुआ कामां, भव्य मंगल प्रवेश
दो दिगम्बर संतों का मिलन कामां की पावन धरती पर ऐसा आध्यात्मिक क्षण बनकर उभरा, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय को भाव-विभोर कर दिया। सकल दिगंबर जैन समाज कामवन, कामां के तत्वावधान में डीग गेट पर आयोजित यह मंगल मिलन केवल दो तपस्वी संतों का साक्षात्कार नहीं, बल्कि संयम, साधना और सनातन मूल्यों का जीवंत संगम था। जैसे ही संतों का आलिंगन हुआ, वातावरण जयघोष, मंगलध्वनि और श्रद्धा से भर उठा।
पंचकल्याणक की पावन बेला में संतों का मंगल पदार्पण
जैन समाज के अध्यक्ष अनिल जैन ने बताया कि कामा तहसील के ग्राम बोलखेड़ा में 15 फरवरी से ध्वजारोहण के साथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ होने जा रहा है। इसी महोत्सव के निमित्त आचार्य विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि प्रणम्य सागर महाराज का मंगल विहार चल रहा है। सेऊ गांव से पदविहार करते हुए गुरुवार को जब उनका कामवन नगरी में प्रवेश हुआ, तो श्रद्धालुओं ने इसे पुण्य अवसर माना।
पूर्व में विराजमान आचार्य विनीत सागर महाराज एवं मुनि अर्पण सागर महाराज स्वयं डीग गेट पर पहुंचे और वात्सल्य भाव से संत मिलन किया। दो दिगम्बर संतों का मिलन जैसे ही साक्षात हुआ, उपस्थित जनसमूह ने इसे आध्यात्मिक सौभाग्य का क्षण बताया।
आलिंगन में समाया अध्यात्म, श्रद्धालु हुए भावुक
दोनों संतों ने परस्पर आलिंगन कर साधना और त्याग की परंपरा को जीवंत कर दिया। यह दृश्य देखकर अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। बैंड-बाजों की मंगल ध्वनि और जयघोष के बीच संतों का नगर में प्रवेश किसी आध्यात्मिक यात्रा से कम नहीं था। नगर पालिका, मुख्य बाजार और लाल दरवाजे से होते हुए निकले जुलूस में श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत समन्वय दिखाई दिया।
युवाओं के नारों से गूंजा नगर, श्रद्धालुओं ने की पाद प्रक्षालन
जुलूस के दौरान युवाओं ने जैन धर्म के नारों से वातावरण को गुंजायमान कर दिया। ‘वीतराग वाणी अमर रहे’ और ‘जैन धर्म की जय’ जैसे उद्घोषों से कामां का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। जगह-जगह जैन श्रावकों ने दोनों संत संघों की पाद प्रक्षालन एवं आरती कर मंगल स्वागत किया। महिलाओं ने मंगल गीत गाए और पुष्पवर्षा से वातावरण को सुगंधित कर दिया।
संतों का संदेश: धर्म और संत सानिध्य ही आत्मकल्याण का मार्ग
इस अवसर पर मुनि प्रणम्य सागर महाराज ने कहा कि ऐसे दुर्लभ दृश्य देखने का अवसर पुण्यशाली जनों को ही प्राप्त होता है। उन्होंने धर्म, संयम और संत सानिध्य में समय व्यतीत करने की प्रेरणा दी। वहीं आचार्य विनीत सागर महाराज ने कामां के जैन समाज की धार्मिक निष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि यहां के युवाओं में भी धर्म के प्रति अद्भुत जागरूकता और जोश दिखाई देता है।
संजय जैन बडजात्या ने जानकारी दी कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे इस अवसर पर उपस्थित रहे और इस ऐतिहासिक संत मिलन के साक्षी बने।









