‘अंखियां निकाल लेब’ विवाद में पार्सल अधीक्षक राजेश सिंह सस्पेंड होने के बाद मऊ रेलवे स्टेशन का मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए वीडियो में पार्सल अधीक्षक राजेश सिंह एक आरपीएफ जवान को धमकी देते और अपशब्द कहते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन ने विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला मऊ रेलवे स्टेशन का बताया जा रहा है, जहां पार्सल अधीक्षक राजेश सिंह और आरपीएफ जवान अमित कुमार यादव के बीच तीखी बहस हो गई। वायरल वीडियो में राजेश सिंह को कहते सुना जा सकता है— “हम सिंह हैं, तोहार औकात का बा हमारे सामने, अखियां निकल लेब तोहार।” इस कथित धमकी ने पूरे घटनाक्रम को तूल दे दिया।
बताया जा रहा है कि आरपीएफ जवान अमित कुमार यादव विलासपुर में तैनात हैं और निजी कार्य से अपने गृह जनपद आए हुए थे। इसी दौरान पार्सल भेजने को लेकर स्टेशन पर पहुंचे, जहां किसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया। देखते ही देखते बहस गरम हो गई और पार्सल अधीक्षक की भाषा ने मामले को गंभीर बना दिया।
वीडियो वायरल होते ही मचा बवाल
जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हुआ, लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने इसे पद और वर्दी के अहंकार से जोड़कर देखा। वहीं कुछ लोगों ने इसे जातीय टकराव की पृष्ठभूमि में भी परखा। प्रदेश में इन दिनों जातीय तनाव को लेकर संवेदनशील माहौल है, ऐसे में इस प्रकार की भाषा ने विवाद को और बढ़ा दिया।
रेलवे प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
वीडियो वायरल होने के बाद रेलवे विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया। जांच के प्राथमिक स्तर पर पार्सल अधीक्षक राजेश सिंह को निलंबित कर दिया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच जारी है और दोष सिद्ध होने पर आगे की कार्रवाई भी संभव है।
रेलवे प्रशासन का कहना है कि किसी भी कर्मचारी द्वारा अनुशासनहीनता या अमर्यादित व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विशेषकर सुरक्षा बलों के साथ इस प्रकार की भाषा संस्थागत गरिमा को ठेस पहुंचाती है।
वर्दी बनाम पद की टकराहट?
इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है— क्या सरकारी तंत्र में पद और वर्दी के बीच टकराव की मानसिकता पनप रही है? आरपीएफ जवान रेलवे सुरक्षा का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में किसी प्रशासनिक अधिकारी द्वारा सार्वजनिक रूप से धमकी देना न केवल व्यक्तिगत आचरण का मामला है, बल्कि यह संस्थागत अनुशासन पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सोशल मीडिया के दौर में हर शब्द और हर व्यवहार सार्वजनिक जांच के दायरे में है। ऐसे में जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों से संयमित भाषा और संतुलित आचरण की अपेक्षा और भी बढ़ जाती है।
जातीय एंगल की चर्चा क्यों?
प्रदेश की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए कुछ लोग इस प्रकरण को जातीय रंग देने की भी कोशिश कर रहे हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे व्यक्तिगत विवाद बताया गया है, लेकिन वायरल वीडियो की भाषा ने बहस को व्यापक बना दिया है। प्रशासन फिलहाल केवल अनुशासनात्मक पहलू पर ध्यान केंद्रित किए हुए है।
आगे क्या?
पार्सल अधीक्षक राजेश सिंह के निलंबन के बाद अब निगाहें विभागीय जांच पर टिकी हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो कठोर कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं आरपीएफ जवान की ओर से औपचारिक शिकायत की स्थिति भी जांच का हिस्सा बन सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में आरपीएफ जवान को कथित धमकी देने और अमर्यादित भाषा के प्रयोग के कारण विभागीय कार्रवाई की गई।
यह पूरा मामला मऊ रेलवे स्टेशन से संबंधित बताया जा रहा है।
जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई संभव है। फिलहाल निलंबन के आदेश जारी किए गए हैं।






