
उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद के श्रीरामपुर थाना क्षेत्र का एक छोटा-सा गाँव बुधवार की दोपहर से अब तक स्तब्ध है। यहाँ एक सात वर्षीय बच्ची की हत्या ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे इलाके को गहरे आघात में डाल दिया है।
मासूम बच्ची गाँव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक की छात्रा थी। बुधवार की सुबह वह रोज़ की तरह स्कूल पढ़ने गई थी। घरवालों के लिए यह सामान्य दिन था—न कोई आशंका, न कोई भय। लेकिन दोपहर के बाद जो हुआ, उसने भरोसे की नींव हिला दी।
दोपहर में स्कूल पहुँचा रिश्ते का चाचा
दोपहर के समय बच्ची का चचेरा चाचा स्कूल पहुँचा। उसने कहा कि वह बच्ची को साइकिल से घर ले जाएगा। ग्रामीण परिवेश में यह असामान्य नहीं माना गया। बच्ची भी उसे पहचानती थी। वह उसे “बड़ा पापा” कहकर बुलाती थी।
स्कूल से निकलते समय किसी ने नहीं सोचा था कि यह दृश्य आख़िरी बार देखा जा रहा है।
शाम तक घर नहीं पहुँची तो मची खोजबीन
जब देर शाम तक बच्ची घर नहीं पहुँची, तो परिजन चिंतित हो उठे। पहले पड़ोस और रिश्तेदारों के यहाँ खोजबीन हुई। फिर स्कूल से जानकारी मिली कि दोपहर में चाचा उसे साथ ले गया था।
इस जानकारी के बाद परिजनों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। श्रीरामपुर थाना क्षेत्र में पुलिस सक्रिय हुई और खोजबीन शुरू की गई।
इसी दौरान गाँव से सटी झरही नदी में कुछ ग्रामीणों ने एक बच्ची का शव देखा। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। शव की पहचान उसी सात वर्षीय बच्ची के रूप में हुई।
हत्या की पुष्टि, दुष्कर्म की आशंका
प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बच्ची की हत्या की गई है। उसके साथ दुष्कर्म हुआ या नहीं—यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारी भी मौके पर पहुँचे।
क्या बोली पुलिस
भाटपार रानी के क्षेत्राधिकारी (सीओ) अंशुमन श्रीवास्तव ने बताया कि “एक सात वर्षीय बच्ची का शव झरही नदी से बरामद हुआ है। मामले में एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
उन्होंने यह भी बताया कि स्कूल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई है। उसमें आरोपी बच्ची को साइकिल से ले जाते हुए दिखाई दे रहा है।
आरोपी कौन है
पुलिस के अनुसार आरोपी लगभग 35 वर्ष का है, शादीशुदा है और दो बच्चों का पिता है। वह बच्ची के पिता के सगे चाचा का बेटा है। यानी रिश्ते में बेहद नज़दीकी।
बताया जा रहा है कि आरोपी को नशे की आदत भी है। हालांकि पुलिस अभी इस पहलू की आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रही है और पूछताछ जारी है।
परिवार की स्थिति
बच्ची के पिता रोज़गार के सिलसिले में बाहर रहकर मजदूरी करते हैं। घटना की सूचना मिलते ही वे गाँव पहुँचे। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
घर का आँगन, जहाँ कभी बच्ची की खिलखिलाहट गूँजती थी, अब सन्नाटे में डूबा है। माँ की आँखें सूनी हैं। रिश्तों पर भरोसा रखने वाला यह परिवार अब खुद से भी सवाल कर रहा है।
गाँव में शोक और आक्रोश
घटना के बाद पूरे गाँव में शोक और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने मामले का शीघ्र खुलासा कर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
लोगों का कहना है कि यदि रिश्ते के नाम पर ऐसा अपराध होगा, तो समाज में विश्वास कैसे बचेगा?
सवाल सिर्फ एक परिवार का नहीं
यह घटना केवल एक आपराधिक प्रकरण नहीं है। यह सामाजिक संरचना पर भी सवाल खड़े करती है। ग्रामीण परिवेश में अक्सर रिश्तेदारों के साथ बच्चों को भेज देना सामान्य बात है। लेकिन अब सतर्कता की आवश्यकता और बढ़ गई है।
स्कूल प्रशासन के लिए भी यह आत्ममंथन का विषय है—क्या बिना लिखित अनुमति के किसी भी व्यक्ति को बच्चा सौंप देना उचित है?
आगे क्या
पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मुकदमे में संबंधित धाराएँ जोड़ी जाएँगी।
यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो कानून के तहत कठोरतम सजा सुनिश्चित की जाएगी।
यह रपट केवल एक समाचार नहीं, बल्कि एक चेतावनी भी है।
रिश्तों की आड़ में अपराध की यह घटना समाज को झकझोरती है।
हर बच्चा सुरक्षित बचपन का अधिकार रखता है।
और हर समाज की जिम्मेदारी है कि वह उस अधिकार की रक्षा करे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
घटना कहाँ की है?
यह घटना उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद के श्रीरामपुर थाना क्षेत्र की है।
बच्ची की उम्र कितनी थी?
बच्ची सात वर्ष की थी और प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक की छात्रा थी।
आरोपी कौन है?
आरोपी बच्ची का चचेरा चाचा है, जिसकी उम्र लगभग 35 वर्ष बताई जा रही है।
मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर संबंधित धाराएँ जोड़कर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।
यह समाचार हमारे सहयोगी इरफान अली लारीद्वारा दी गई सूचनाओं के आधार पर हमारी संपादकीय टीम द्वारा तैयार किया गया है।







मान्य संपादक जी, 🙏
मासूमियत की दोपहर… , अंखिया निकाल लेब, 1000 रुपये में सौदा, जैसे हेडिंग के शब्द सीधे दिल में घुसकर शोर मचा देता है… बा-कमाल।
आपके ये शब्द सच में बहुत मूल्यवान हैं 🙏🌹
पत्रकारिता सिर्फ खबर लिखना नहीं है —
यह जिम्मेदारी है, संवेदना है, आत्मानुशासन है। आपमें जो बात सबसे अलग है, वह यह कि आप हर घटना को सिर्फ “कंटेंट” नहीं मानते। आप रुकते हैं… सोचते हैं… शब्दों को तौलते हैं… और यही एक संपादक की असली पहचान है, मेरा ऐसा मानना है🙏
सच कहूँ तो —
हम पाठक सिर्फ सिर्फ पढ़ कर खबर के स्वभाव में ढल जाते हैं, लेकिन भाव, दृष्टि और मर्यादा आपकी है। आपके भीतर जो बेचैनी है — वही आपको सामान्य पत्रकारों से अलग करती है।
और आपकी यही बेचैनी “समाचार” को “सार्थक दस्तावेज़” बनाती है।
बहुत बहुत साधुवाद, आप लिखते रहिए।
देवरिया से एक पाठक
(जिन्होंने अपना नाम जाहिर न करने का अनुरोध कर रखा है🙏)