आईजीआरएस निस्तारण में चित्रकूट की मऊ तहसील प्रदेश में नंबर-1: शिकायत समाधान का नया मॉडल तैयार

संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
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चित्रकूट। नवंबर माह में एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) के अंतर्गत जनपद चित्रकूट की मऊ तहसील ने ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जिसने प्रदेश की सभी तहसीलों को पीछे छोड़ दिया। मऊ ने नवंबर माह में प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में प्रदेश स्तर पर पहला स्थान हासिल किया है। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रदर्शन को आगे भी लगातार कायम रखना होगा। डीएम ने सख्त निर्देश दिए कि निस्तारण केवल संख्या के आधार पर नहीं बल्कि गुणवत्ता के आधार पर होना चाहिए।

आईजीआरएस प्रणाली क्यों है महत्वपूर्ण?

आईजीआरएस उत्तर प्रदेश सरकार की वह डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली है, जिसके माध्यम से नागरिक अपनी समस्याएँ ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। यह समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेही से जुड़ी प्रक्रिया है। शासन स्तर से लेकर जिला और तहसील स्तर तक इसकी मॉनिटरिंग होती है। इसलिए किसी भी जिले या तहसील की रैंकिंग सीधे उसके सुशासन और कार्यप्रणाली को दर्शाती है।

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मऊ तहसील कैसे बनी नंबर–1?

मऊ तहसील की सफलता संयोग नहीं, बल्कि एक मजबूत कार्ययोजना का परिणाम है। नवंबर माह के दौरान प्राप्त शिकायतों में से लगभग सभी प्रमुख शिकायतों का समयबद्ध और प्रभावी निस्तारण किया गया। तहसील प्रशासन ने स्पष्ट जिम्मेदारी, टीम समन्वय, डिजिटल मॉनिटरिंग और शिकायतकर्ताओं से सीधे संवाद की नीति अपनाई। इससे न केवल निस्तारण की गुणवत्ता बढ़ी बल्कि शिकायतों का औसत समाधान समय भी घटा।

1. टीमवर्क और जिम्मेदारी तय

नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षकों और लेखपालों को श्रेणीवार शिकायतें सौंप दी गईं। इससे जवाबदेही तय हुई और लंबित समस्याओं में तेजी आई।

2. रोजाना समीक्षा बैठकें

तहसीलदार कार्यालय में शिकायतों की दैनिक समीक्षा की गई। आईजीआरएस पोर्टल पर लंबित मामलों पर विशेष नजर रखी गई और किसी भी अधिकारी को शिकायत लंबित रखने पर चेतावनी जारी की गई।

3. जनता से सीधा संवाद

कई मामलों में अधिकारी स्वयं शिकायतकर्ताओं से संपर्क करते रहे। इससे शिकायत की प्रकृति स्पष्ट हुई और समाधान में तेजी आई।

4. लंबित मामलों पर सख्ती

3–7 दिन से अधिक लंबित मामलों पर संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए। इससे कार्य में शिथिलता कम हुई।

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5. प्रमाण पत्र व राजस्व मामलों में सुधार

जाति, आय, निवास आदि प्रमाणपत्रों तथा खतौनी-संबंधित मामलों में त्वरित समाधान के लिए अलग सेल बनाया गया। इसका सकारात्मक प्रभाव रैंकिंग में दिखाई दिया।

डीएम पुलकित गर्ग ने क्यों कहा—“गुणवत्ता बनाए रखनी होगी”

डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि निस्तारण केवल औपचारिकता न हो। शिकायतकर्ता की संतुष्टि, फील्ड सत्यापन, पारदर्शिता और वास्तविक समाधान सुनिश्चित करने होंगे। उन्होंने कहा कि आईजीआरएस के माध्यम से जनता का भरोसा बढ़ा है और इसे निरंतर बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

जनता को क्या मिला लाभ?

मऊ तहसील के प्रदर्शन ने सीधे जनता को राहत पहुंचाई है। पहले जहाँ शिकायतों के समाधान में सप्ताह लग जाते थे, वहीं अब कुछ दिनों में ही समाधान मिल रहा है। खासकर—

  • प्रमाणपत्र सेवाओं में तेजी
  • खतौनी त्रुटि सुधार और सीमांकन विवादों में त्वरित समाधान
  • पेंशन एवं लाभार्थी योजनाओं में पारदर्शिता
  • ग्राम पंचायत स्तर की शिकायतों में शीघ्र कार्रवाई

कौन सी श्रेणियाँ रहीं सबसे चुनौतीपूर्ण?

नवंबर में सबसे अधिक शिकायतें राजस्व मामलों, प्रमाणपत्र सेवाओं, पंचायत संबंधी अनियमितताओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ी थीं। इन सभी में मऊ तहसील ने बेहतर समन्वय के साथ उत्कृष्ट कार्य किया।

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क्या मऊ मॉडल पूरे प्रदेश में लागू किया जा सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, मऊ तहसील द्वारा अपनाई गई रणनीति पूरे प्रदेश के लिए मॉडल बन सकती है। डिजिटल मॉनिटरिंग, टीमवर्क, जवाबदेही और शिकायतकर्ता से सीधे संवाद जैसे उपाय सभी तहसीलों में लागू किए जा सकते हैं। इससे आईजीआरएस निस्तारण प्रणाली और अधिक प्रभावी होगी।

चित्रकूट प्रशासन का मजबूत संदेश

मऊ तहसील की उपलब्धि केवल एक माह की सफलता नहीं बल्कि सुशासन की एक मिसाल है। डीएम पुलकित गर्ग के नेतृत्व में प्रशासनिक कार्यकुशलता ने यह साबित कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति और जिम्मेदारी साथ हो तो सरकारी तंत्र जनता की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतर सकता है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मऊ तहसील इस प्रदर्शन को कैसे निरंतर बनाए रखती है और क्या यह प्रदेश की अन्य तहसीलों के लिए प्रेरणादायक मॉडल बन पाती है।

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