रहस्यमयी ‘हिजड़ों की मस्जिद’: अकबर के दौर की वो दास्तां, जब एक शाही हिजड़े की दुआ से बरसी थी मूसलाधार बारिश

🟥 ब्रजकिशोर सिंह की रिपोर्ट

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आगरा हिजड़ों की मस्जिद भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के ऐतिहासिक शहर आगरा की सबसे रहस्यमयी और धार्मिक स्थलों में से एक है। मुगलकालीन बादशाह अकबर के शासनकाल में बनी यह मस्जिद इतिहास, आस्था और इंसानियत का अद्भुत संगम मानी जाती है। इसे हिजड़ों की मस्जिद या शाही हिजड़ा यातिमा की मस्जिद के नाम से जाना जाता है। इस मस्जिद से जुड़ी दास्तां आज भी लोगों के दिलों में बसती है, क्योंकि कहा जाता है कि एक शाही हिजड़े की दुआ से ही उस समय सूखे से जूझ रहे आगरा में मूसलाधार बारिश हुई थी।

मुगलकाल का इतिहास और आगरा की पहचान

भारत में मुगल साम्राज्य के शासनकाल के दौरान आगरा साम्राज्य की राजधानी और सांस्कृतिक केंद्र हुआ करता था। यह वही शहर है जहां ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी जैसी भव्य इमारतें बनीं। अकबर, जहांगीर और शाहजहां जैसे शासकों ने यहां की मिट्टी में कला, स्थापत्य और धर्म का समागम रचा। इन्हीं में से एक है — हिजड़ों की मस्जिद, जो इतिहास का वो अनसुना अध्याय है, जिसमें समर्पण, आस्था और मानवता की मिसाल दर्ज है।

जब आगरा में नहीं हुई बारिश और अकबर ने मांगी मदद

इतिहासकारों के अनुसार, अकबर के शासनकाल में एक समय ऐसा आया जब आगरा और उसके आसपास के इलाकों में लगातार कई वर्षों तक बारिश नहीं हुई। खेत सूख गए, नदियां और तालाब सूखने लगे, और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। हालात इतने बिगड़ गए कि अकबर ने अपने दरबार में इस संकट से निपटने के लिए विशेष बैठक बुलाई। उसने मौलवियों, सूफियों और ज्ञानी संतों को बुलाया ताकि कोई उपाय मिल सके जिससे आगरा में बारिश हो सके।

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लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद जब बरसात नहीं हुई, तब अकबर के दरबार में कार्यरत एक शाही हिजड़ा यातिमा ने अपनी दुआओं से बारिश की गुहार लगाई। इतिहास में यह दर्ज है कि जैसे ही यातिमा ने सच्चे मन से प्रार्थना की, वैसे ही आसमान में काले बादल छा गए और आगरा में झमाझम बारिश होने लगी। इस घटना को पूरे साम्राज्य में दैवीय चमत्कार माना गया था।

अकबर ने कृतज्ञता में बनवाई ‘हिजड़ों की मस्जिद’

जब सूखे की मार झेल रहे आगरा में अचानक मूसलाधार बारिश हुई, तो बादशाह अकबर ने इसे ईश्वर की कृपा और शाही हिजड़ा यातिमा की भक्ति का परिणाम माना। उसने यातिमा को सम्मानित किया और उसके नाम से एक विशेष मस्जिद बनवाने का आदेश दिया। इस मस्जिद को खास तौर पर हिजड़ों के लिए बनाया गया था, ताकि वे यहां शांति से नमाज अदा कर सकें और ईश्वर से अपनी दुआएं मांग सकें।

इस मस्जिद का निर्माण मुगलकालीन स्थापत्य शैली में हुआ, जिसमें लाल पत्थर और संगमरमर का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है। आगरा की हिजड़ों की मस्जिद उस दौर की सामाजिक समरसता और धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक मानी जाती है।

इतिहासकार राज किशोर शर्मा का बयान

प्रसिद्ध इतिहासकार राज किशोर शर्मा बताते हैं कि “मुगलकाल में हिजड़ों की संख्या काफी अधिक थी। दरबारों में वे महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाते थे — प्रशासन, सुरक्षा और सांस्कृतिक आयोजनों में उनकी सक्रिय भागीदारी होती थी।” शर्मा के अनुसार, अकबर ने समाज के इस वर्ग को सम्मान दिलाने के लिए इस मस्जिद को समर्पित किया था।

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वर्तमान में शाही हिजड़ा यातिमा की कब्र इसी मस्जिद के प्रांगण में बनी हुई है। हर शुक्रवार को यहां श्रद्धालु आते हैं और दुआ मांगते हैं। कहा जाता है कि आज भी अगर कोई सच्चे मन से मुराद मांगे तो वह पूरी होती है।

आगरा की हिजड़ों की मस्जिद आज भी आस्था का केंद्र

समय के साथ कई शताब्दियां बीत गईं, लेकिन हिजड़ों की मस्जिद आज भी आस्था और सम्मान का प्रतीक बनी हुई है। यहां स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले सैलानी भी दर्शन के लिए आते हैं। आगरा टूरिज्म में अब इस मस्जिद को भी ऐतिहासिक धरोहर के रूप में शामिल किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस अद्भुत विरासत से परिचित हो सकें।

यह मस्जिद केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक समावेश और सहिष्णुता का प्रतीक भी है। यहां हर व्यक्ति बिना भेदभाव के आ सकता है और अपनी मनोकामना मांग सकता है।

मुगल स्थापत्य की झलक

हिजड़ों की मस्जिद का स्थापत्य भी मुगलकालीन वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें ऊंचे मेहराबदार दरवाजे, खूबसूरत झरोखे और गुम्बद हैं जो उस समय की कला और इंजीनियरिंग का प्रमाण हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि मस्जिद की दीवारों पर आज भी अकबरकालीन नक्काशी देखी जा सकती है।

आज भी पूरी होती हैं मुरादें

स्थानीय निवासियों के अनुसार, हिजड़ों की मस्जिद में अगर कोई व्यक्ति सच्चे मन से दुआ करे तो उसकी मुराद जरूर पूरी होती है। यहां हर शुक्रवार को बड़ी संख्या में लोग आते हैं — कोई रोज़गार की दुआ मांगता है, कोई संतान की और कोई स्वास्थ्य की। यह जगह आज भी आस्था का केंद्र मानी जाती है।

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कैसे पहुंचे हिजड़ों की मस्जिद आगरा

यह मस्जिद आगरा शहर के पुराने हिस्से में स्थित है। आप यहां आगरा कैंट स्टेशन या राजा की मंडी स्टेशन से ऑटो या टैक्सी द्वारा आसानी से पहुंच सकते हैं। यह स्थान ताजमहल और आगरा किला से भी अधिक दूर नहीं है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. हिजड़ों की मस्जिद कहां स्थित है?

हिजड़ों की मस्जिद उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में स्थित है। यह मुगलकालीन स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण है।

2. इस मस्जिद का निर्माण किसने कराया था?

इस मस्जिद का निर्माण मुगल बादशाह अकबर ने अपने शासनकाल में कराया था।

3. इस मस्जिद का नाम हिजड़ों की मस्जिद क्यों पड़ा?

अकबर ने यह मस्जिद अपने शाही हिजड़े यातिमा की दुआ से हुई बारिश की स्मृति में बनवाई थी, इसलिए इसे हिजड़ों की मस्जिद कहा जाता है।

4. क्या आज भी इस मस्जिद में लोग दुआ मांगने आते हैं?

जी हां, आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दुआ मांगने आते हैं और मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।

5. क्या यह मस्जिद पर्यटकों के लिए खुली है?

हां, हिजड़ों की मस्जिद पर्यटकों और आम लोगों दोनों के लिए खुली है। यहां कोई भी व्यक्ति दर्शन और नमाज के लिए जा सकता है।


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