
अलीगढ़ में एक बयान को लेकर विवाद उस समय सड़कों पर उतर आया जब करणी सेना के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बिहार के मौलाना अब्दुल्ला सलीम के कथित बयान के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की माता को लेकर दिए गए बयान को लेकर संगठन के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखा गया। इसी आक्रोश के चलते करणी सैनिकों ने शहर में विरोध प्रदर्शन करते हुए मौलाना सलीम का पुतला दहन किया और प्रशासन से उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
घटना के बाद पूरे इलाके में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सामाजिक और राजनीतिक हलकों में भी इस बयान पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। करणी सेना के कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति या उनके परिवार के बारे में इस प्रकार की टिप्पणी न केवल अनुचित है बल्कि समाज में अनावश्यक तनाव भी पैदा करती है।
राजा महेंद्र प्रताप पार्क में जुटे करणी सैनिक
करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गौरव चौहान के निर्देश पर जिला हरिगढ़ करणी सेना की टीम ने विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। यह प्रदर्शन संगठन के जिलाध्यक्ष सुमित तोमर के नेतृत्व में किया गया। तय कार्यक्रम के अनुसार करणी सेना के पदाधिकारी और कार्यकर्ता अलीगढ़ के राजा महेंद्र प्रताप पार्क में एकत्र हुए और वहां से विरोध प्रदर्शन की शुरुआत की।
पार्क परिसर में एकत्र हुए करणी सैनिकों ने पहले मौलाना अब्दुल्ला सलीम के खिलाफ नारेबाजी की और फिर प्रतीकात्मक विरोध के रूप में उनका पुतला दहन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं का गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था। कई कार्यकर्ताओं ने पुतले को जूते-चप्पलों से पीटकर अपना आक्रोश व्यक्त किया और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
“बयानबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी”
विरोध प्रदर्शन के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि मौलाना अब्दुल्ला सलीम के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो करणी सेना व्यापक आंदोलन छेड़ने को बाध्य होगी। करणी सैनिकों का कहना था कि इस प्रकार की बयानबाजी समाज में वैमनस्य पैदा करती है और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है।
संगठन के नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी की व्यक्तिगत गरिमा या धार्मिक भावनाओं को आहत किया जाए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी
करणी सेना के पदाधिकारियों ने प्रदर्शन के दौरान चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन प्रदेश स्तर पर आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगा। उनका कहना था कि यह मुद्दा केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि समाज की गरिमा से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि विवादित बयानबाजी पर सख्ती से रोक लगाई जाए। यदि प्रशासन इस मामले को हल्के में लेता है तो संगठन के कार्यकर्ता बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रहे मौजूद
इस विरोध प्रदर्शन में करणी सेना के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष युवा शक्ति ब्रज प्रांत आशीष चौहान, प्रदेश उपाध्यक्ष जगमोहन मालवीय, प्रदेश उपाध्यक्ष युवा शक्ति वीरू भदौरिया, जिला अध्यक्ष सुमित तोमर, युवा कार्यकारिणी जिला अध्यक्ष अंकित सैनी और जिला संगठन मंत्री पुष्पेंद्र पुंढीर शामिल हुए।
इसके अलावा जिला उपाध्यक्ष नितिन उपाध्याय और महानगर अध्यक्ष युवा शक्ति सचिन चौहान भी प्रदर्शन में मौजूद रहे। कार्यक्रम में सुनील शर्मा, योगेश तोमर, प्रत्यूष मित्तल (जिला युवा कोषाध्यक्ष), विपिन शर्मा (युवा जिला संगठन महामंत्री), अनमोल शर्मा, तुषार महेश्वरी, हर्ष सिकरवार, देव उपाध्याय, विकास भारद्वाज, अरुण दीक्षित, शौर्य प्रताप सिंह तोमर, गगन तोमर और रिंकू तोमर समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
प्रदर्शन के अंत में करणी सेना के पदाधिकारियों ने प्रशासन से मांग की कि मामले का संज्ञान लेकर मौलाना अब्दुल्ला सलीम के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि यदि इस प्रकार के विवादित बयानों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा।
करणी सैनिकों का कहना था कि कानून का उद्देश्य केवल विवादों को सुलझाना ही नहीं बल्कि समाज में अनुशासन और संतुलन बनाए रखना भी है। इसलिए प्रशासन को इस मामले में त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।
बयान और सामाजिक संवेदनशीलता
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक मंचों से दिए जाने वाले बयान कितने जिम्मेदार होने चाहिए। किसी भी राजनीतिक या धार्मिक व्यक्ति का बयान कई बार व्यापक सामाजिक प्रभाव पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए, ताकि समाज में अनावश्यक विवाद और तनाव की स्थिति पैदा न हो।










