निपुण संकल्प अभिभावक-शिक्षक मीटिंग-2 के माध्यम से नई दिल्ली स्थित राजकीय बाल उच्च माध्यमिक विद्यालय, हरकेश नगर में शिक्षा को लेकर एक सार्थक संवाद का सशक्त मंच तैयार किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य केवल बच्चों की शैक्षणिक प्रगति की जानकारी देना नहीं था, बल्कि अभिभावकों को सीखने की उस पूरी प्रक्रिया से जोड़ना था, जिसमें कक्षा, शिक्षक और घर—तीनों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण होती है।
समाचार सार: निपुण संकल्प कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित पीटीएम-2 में अभिभावकों को बच्चों के पठन, लेखन और गणितीय कौशल (एफएलएन) की प्रगति, कक्षा में हो रही गतिविधियों, वर्कशीट और टीएलएम के माध्यम से सीखने की पद्धति से अवगत कराया गया।
विद्यालय में शिक्षा को साझेदारी का रूप
राजकीय बाल उच्च माध्यमिक विद्यालय हरकेश नगर (कोड 1925342) में आयोजित निपुण संकल्प अभिभावक-शिक्षक मीटिंग-2 इस बात का उदाहरण बनी कि जब शिक्षा को केवल विद्यालय की जिम्मेदारी न मानकर सामूहिक दायित्व के रूप में देखा जाता है, तब परिणाम अधिक प्रभावी और स्थायी होते हैं। बैठक में अभिभावकों की उपस्थिति और उनकी जिज्ञासाएँ यह दर्शा रही थीं कि वे अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर सजग और चिंतित दोनों हैं।
एफएलएन लक्ष्यों पर केंद्रित संवाद
बैठक के दौरान विद्यार्थियों के पठन, लेखन एवं गणितीय दक्षता से जुड़े फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी (एफएलएन) लक्ष्यों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। शिक्षकों ने यह स्पष्ट किया कि अब तक बच्चों ने किन-किन स्तरों पर प्रगति की है, कौन-से कौशल मजबूत हुए हैं और किन बिंदुओं पर अभी निरंतर अभ्यास की आवश्यकता है।
अभिभावकों को सरल भाषा में यह समझाया गया कि निपुण संकल्प के अंतर्गत सीखने को रटने की बजाय समझने और प्रयोग करने पर बल दिया जा रहा है, जिससे बच्चों में आत्मविश्वास और तार्किक सोच का विकास हो सके।
कक्षा गतिविधियों और टीएलएम की प्रस्तुति
मीटिंग का एक महत्वपूर्ण पक्ष कक्षा में संचालित निपुण संकल्प आधारित गतिविधियों की प्रस्तुति रहा। शिक्षकों ने वर्कशीट, टीचिंग-लर्निंग मटीरियल (टीएलएम) और गतिविधि-आधारित शिक्षण के उदाहरणों के माध्यम से यह बताया कि बच्चे किस प्रकार खेल-खेल में सीख रहे हैं।
अभिभावकों ने जब अपने बच्चों की लिखावट, गणितीय समझ और पढ़ने की क्षमता में आए बदलाव को प्रत्यक्ष रूप से देखा, तो उनमें संतोष के साथ-साथ आगे सहयोग करने की भावना भी मजबूत हुई।
घर में सीखने का अनुकूल वातावरण बनाने पर ज़ोर
शिक्षकों ने अभिभावकों को यह भी बताया कि विद्यालय में दी जा रही शिक्षा तभी पूर्ण होती है, जब घर पर उसका सकारात्मक विस्तार हो। अभिभावकों को सलाह दी गई कि वे बच्चों के साथ नियमित रूप से पढ़ने-लिखने का अभ्यास कराएँ, गणित को रोजमर्रा के जीवन से जोड़ें और सीखने की प्रक्रिया को बोझ नहीं, बल्कि रोचक अनुभव बनाएं।
इसके साथ ही मोबाइल फोन और टीवी के सीमित एवं नियंत्रित उपयोग पर विशेष बल दिया गया, ताकि बच्चों का ध्यान पढ़ाई से भटके नहीं और वे मानसिक रूप से अधिक सक्रिय रह सकें।
शिक्षक-अभिभावक संवाद से मजबूत होता भरोसा
पीटीएम-2 के दौरान शिक्षक और अभिभावकों के बीच खुला संवाद देखने को मिला। अभिभावकों ने बच्चों से जुड़ी अपनी शंकाएँ साझा कीं, जिनका समाधान शिक्षकों ने धैर्य और स्पष्टता के साथ किया। इस संवाद ने यह सिद्ध किया कि जब शिक्षक और अभिभावक एक-दूसरे के सहयोगी बनते हैं, तब बच्चे की शिक्षा एक मजबूत आधार पर आगे बढ़ती है।
विद्यालय प्रशासन की सक्रिय भूमिका
इस अवसर पर विद्यालय के एचओएस विनीत कुमार, निपुण संकल्प प्रभारी मनोहर राम भगत, नोडल अध्यापक मायाशंकर साहू (अंग्रेजी), बालकृष्ण शर्मा (गणित) सहित अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में यह संदेश दिया कि निपुण संकल्प केवल एक योजना नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को सशक्त बनाने का साझा प्रयास है।
शिक्षा की दिशा में एक सार्थक कदम
कुल मिलाकर निपुण संकल्प अभिभावक-शिक्षक मीटिंग-2 न केवल बच्चों की शैक्षणिक प्रगति की समीक्षा का मंच बनी, बल्कि इसने यह भी स्पष्ट किया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तभी संभव है, जब विद्यालय और परिवार मिलकर एक ही लक्ष्य की ओर अग्रसर हों। यह आयोजन शिक्षा को लेकर जागरूकता, सहभागिता और जिम्मेदारी—तीनों का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया।






