
सिगरेट का कश पड़ा महंगा—स्मोकिंग करने वालों के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है। एक तरफ सिगरेट के पैकेट पर बड़े-बड़े अक्षरों में चेतावनी लिखी होती है कि धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, और दूसरी तरफ अब यह आदत पहले से कहीं ज्यादा जेब पर भारी पड़ने वाली है। बजट 2026-27 में सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाकर सरकार ने स्मोकर्स का मासिक बजट गड़बड़ा दिया है, जिसका असर अब सीधे बाजार में दिखने लगा है।
हूक प्वाइंट: 95 रुपये की सिगरेट पैकेट अब 140 रुपये तक पहुंच चुकी है, जबकि कुछ प्रीमियम ब्रांड्स में 90 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है—यानी हर कश अब सीधा जेब पर वार कर रहा है।
बजट 2026-27 ने क्यों बढ़ाया स्मोकर्स का तनाव?
केंद्रीय बजट 2026-27 में सिगरेट और तंबाकू उत्पादों को लेकर सरकार का रुख पहले से कहीं ज्यादा सख्त नजर आया। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण के दौरान तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाने का ऐलान किया, जिसे 1 फरवरी से पूरे देश में लागू भी कर दिया गया। सरकार का तर्क साफ है—धूम्रपान को हतोत्साहित करना और स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना। लेकिन इस फैसले का सबसे तात्कालिक असर आम स्मोकर की जेब पर पड़ा है।
कीमतों में उछाल ने उड़ाए होश
टैक्स बढ़ने के बाद से ही बाजार में सिगरेट की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। हालिया बढ़ोतरी का सबसे चौंकाने वाला उदाहरण स्टेलर डिफाइन पान है, जिसकी 20 सिगरेट वाली पैक की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) 200 रुपये से बढ़कर सीधे 380 रुपये हो गई है। यानी महज एक झटके में कीमत करीब 90 प्रतिशत तक बढ़ गई। यह बढ़ोतरी केवल प्रीमियम सेगमेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि मिड और लो-रेंज सिगरेट पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है।
95 की पैकेट अब 140 की, कैसे बिगड़ेगा मासिक बजट?
इसी तरह आम उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय गोल्ड फ्लेक स्मॉल की 10 सिगरेट वाली पैक अब 95 रुपये से बढ़कर 140 रुपये की हो गई है। यह करीब 47 प्रतिशत की बढ़ोतरी है, जिसने रोजमर्रा की स्मोकिंग को अचानक महंगा बना दिया है। जो लोग रोज एक या दो पैकेट सिगरेट पीते हैं, उनके लिए यह बदलाव सीधे मासिक खर्च में हजारों रुपये का अतिरिक्त बोझ जोड़ सकता है।
सिगरेट क्यों हुई इतनी महंगी?
दरअसल, सिगरेट की कीमतों में यह बढ़ोतरी केवल एक टैक्स बढ़ोतरी का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे टैक्स स्ट्रक्चर में किए गए व्यापक बदलाव हैं। बजट 2026 में सरकार ने सिगरेट की लंबाई, फिल्टर और अन्य तकनीकी मानकों के आधार पर टैक्स स्लैब को रिवाइज किया है। इसके अलावा सेस और अनुपालन यानी कम्प्लायंस लागत में भी इजाफा हुआ है, जिससे कंपनियों पर टैक्स का कुल बोझ काफी बढ़ गया।
कंपनियों ने बोझ उपभोक्ताओं पर डाला
सिगरेट कंपनियों के सामने विकल्प सीमित थे—या तो मुनाफा कम करें या बढ़े हुए टैक्स का बोझ उपभोक्ताओं पर डालें। कंपनियों ने दूसरा रास्ता चुना और अतिरिक्त लागत को सीधे कीमतों में जोड़ दिया। नतीजा यह हुआ कि लगभग सभी श्रेणियों की सिगरेट महंगी हो गईं। खुदरा दुकानों पर अब सिगरेट की कीमतें पहले की तुलना में कहीं ज्यादा नजर आ रही हैं।
अब प्रति सिगरेट कितनी पड़ेगी भारी?
खुदरा स्तर पर असर और भी साफ है। जहां पहले एक सिगरेट की औसत कीमत करीब 10 रुपये होती थी, अब वही सिगरेट 12 से 13 रुपये में मिल रही है। यानी प्रति सिगरेट 2 से 3 रुपये तक की बढ़ोतरी। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषकों के अनुसार, 75 से 85 एमएम लंबाई वाली सिगरेट की संशोधित कीमतों में 22 से 28 प्रतिशत तक का उछाल दर्ज किया गया है।
सरकार का मकसद क्या है?
सरकार का कहना है कि सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर भारी टैक्स लगाने का मुख्य उद्देश्य पहली बार स्मोकिंग शुरू करने वालों, खासकर युवाओं को हतोत्साहित करना है। नीति निर्धारकों का मानना है कि सिगरेट को महंगा बनाकर इसकी मांग को कम किया जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी लंबे समय से यह तर्क देते रहे हैं कि ऊंचा टैक्स तंबाकू सेवन कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
पुराने और नए टैक्स सिस्टम में क्या बदला?
अब तक सिगरेट पर टैक्स 2017 में तय किए गए फ्रेमवर्क के तहत लगाया जाता था, जिसमें 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ कंपन्सेशन सेस शामिल था। लेकिन बजट 2026 में सरकार ने इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए तीन-स्तरीय टैक्स संरचना लागू कर दी है। इसके तहत अब सिगरेट पर नई एक्साइज ड्यूटी लगाई जा रही है, साथ ही हेल्थ एंड नेशनल सिक्योरिटी सेस भी जोड़ा गया है। इसके अलावा जीएसटी की प्रभावी दर बढ़ाकर 40 प्रतिशत तक कर दी गई है।
आम स्मोकर के सामने अब क्या विकल्प?
इस बदले हुए टैक्स स्ट्रक्चर का सीधा असर आम स्मोकर पर पड़ रहा है। रोजाना सिगरेट पीने वालों के लिए यह बढ़ोतरी सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि महीने के अंत में बजट बिगड़ने की हकीकत है। ऐसे में या तो स्मोकिंग कम करनी होगी या फिर बढ़े हुए खर्च के लिए तैयार रहना होगा।
समाचार सार: बजट 2026-27 में तंबाकू और सिगरेट पर टैक्स बढ़ने के बाद बाजार में कीमतों में भारी उछाल आया है। 95 रुपये वाली पैकेट 140 रुपये तक पहुंच चुकी है, जबकि कुछ ब्रांड्स में 90 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार इसे स्वास्थ्य के लिहाज से जरूरी कदम बता रही है, लेकिन आम स्मोकर की जेब पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है।






