मेरठ के सरधना थाना क्षेत्र के गांव कपसाड़ में दलित महिला सुनीता की हत्या और उसकी नाबालिग बेटी रुबी के अपहरण के बाद हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। घटना के तीसरे दिन भी न तो नाबालिग का कोई सुराग मिला है और न ही नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकी है। आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों के विरोध के बीच पुलिस ने गांव और आसपास के इलाकों को छावनी में तब्दील कर दिया है।
विधायक को रोका गया, बढ़ा टकराव
पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे सरधना विधायक अतुल प्रधान को पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए गांव के बाहर ही रोक दिया। विधायक को आगे बढ़ने से रोके जाने पर समर्थकों में नाराजगी फैल गई और मौके पर हंगामा शुरू हो गया। इस दौरान पुलिस और समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली, जिससे हालात कुछ देर के लिए और अधिक तनावपूर्ण हो गए।
शव रखकर धरना, दिनभर चला हंगामा
दिनभर सुनीता का शव घर में रखकर परिजन और ग्रामीण धरने पर बैठे रहे। समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के नेता-कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौके पर जुटे रहे। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासन और राजनीतिक दलों के नेताओं की मौजूदगी में आर्थिक मदद और कार्रवाई के आश्वासन दिए जाने के बाद ही अंतिम संस्कार पर सहमति बन सकी।
राजनीतिक हस्तक्षेप और आश्वासन
विधायक अतुल प्रधान ने पीड़ित परिवार की पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से फोन पर बातचीत कराई। अखिलेश यादव ने तीन लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की बात कही। वहीं नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने वीडियो कॉल के माध्यम से परिजनों से बात की। पूरे दिन गांव कपसाड़ में तनाव का माहौल बना रहा।
48 घंटे की समयसीमा पर बनी सहमति
बृहस्पतिवार रात करीब 12 बजे सुनीता का शव गांव पहुंचा, तभी से कोहराम मच गया। परिजनों ने साफ कहा कि जब तक बेटी बरामद नहीं होगी, अंतिम संस्कार नहीं होगा। शुक्रवार को दिनभर अधिकारियों और परिजनों के बीच कई दौर की वार्ता हुई। देर शाम एसपी देहात अभिजीत कुमार, एडीएम सिटी बृजेश सिंह, एसडीएम उदय नारायण सेंगर और भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम की मौजूदगी में पांच बिंदुओं पर सहमति बनी। प्रशासन ने 48 घंटे के भीतर रुबी की बरामदगी, आरोपियों पर सख्त कार्रवाई, परिवार के एक सदस्य को नौकरी, 10 लाख रुपये का मुआवजा और सुरक्षा के प्रबंध का लिखित आश्वासन दिया।
‘आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए’
शुक्रवार सुबह एडीएम वित्त सूर्यकांत त्रिपाठी 10 लाख रुपये का चेक लेकर पहुंचे, लेकिन सुनीता के पिता सतेंद्र और बेटों मनदीप व नरसी ने इसे ठुकरा दिया। परिजनों की एक ही मांग थी—नाबालिग रुबी की सुरक्षित बरामदगी। अधिकारियों और परिजनों के बीच कई बार तीखी बहस हुई और माहौल हिंसक होने की कगार तक पहुंच गया।
इन मांगों पर बनी सहमति
- 48 घंटे के भीतर रुबी की बरामदगी का लिखित वादा
- परिवार के एक सदस्य को स्थानीय चीनी मिल में स्थायी रोजगार
- 10 लाख रुपये का तत्काल मुआवजा
- सुरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस का भरोसा
- गांव में लगातार पुलिस बल की तैनाती
गम और गुस्से के बीच अंतिम विदाई
प्रशासनिक समझौते के बाद शाम करीब सात बजे परिजन अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए। रात करीब पौने आठ बजे सुनीता का अंतिम संस्कार किया गया। बड़े बेटे नरसी ने मुखाग्नि दी। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और राजनीतिक प्रतिनिधि मौजूद रहे।
गांव में तनाव बरकरार
अंतिम संस्कार के बाद भी गांव में तनाव बना हुआ है। भारी पुलिस बल की तैनाती जारी है और पुलिस टीमें फरार आरोपियों तथा नाबालिग की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे में उनकी बेटी सुरक्षित नहीं मिली, तो आंदोलन फिर से तेज किया जाएगा।
ये है पूरा मामला
बृहस्पतिवार सुबह सुनीता अपनी बेटी रुबी के साथ खेत की ओर जा रही थीं। आरोप है कि गांव के ही पारस सोम, सुनील और उनके साथियों ने घात लगाकर हमला किया। हमलावरों ने सुनीता पर फरसे से वार किया और उनकी आंखों के सामने ही रुबी का अपहरण कर फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल सुनीता को मोदीपुरम स्थित एसडीएस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया और एंबुलेंस में तोड़फोड़ भी हुई।
प्रश्न: नाबालिग की बरामदगी को लेकर प्रशासन ने क्या समयसीमा दी है?
प्रशासन ने लिखित रूप में 48 घंटे के भीतर बरामदगी का आश्वासन दिया है।
प्रश्न: परिवार को कितनी आर्थिक सहायता दी गई है?
प्रशासन की ओर से 10 लाख रुपये का मुआवजा और राजनीतिक स्तर पर अतिरिक्त सहायता की घोषणा की गई है।
प्रश्न: गांव में सुरक्षा व्यवस्था कैसी है?
गांव और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात है और लगातार निगरानी की जा रही है।










