चीन से मिला 1500 करोड़ का साइबर टारगेट—यह कोई अनुमान नहीं, बल्कि पुलिस जांच में सामने आया वह चौंकाने वाला तथ्य है जिसने देशभर की साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक ऐसे संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो अब तक 500 करोड़ रुपये से अधिक की ऑनलाइन ठगी को अंजाम दे चुका था और जिसकी योजना कुल 1500 करोड़ रुपये की ठगी करने की थी। इस मामले में यूपी सहित छह राज्यों में सक्रिय 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
इस पूरे गिरोह तक पुलिस उस समय पहुंची, जब पंजाब नेशनल बैंक के सेवानिवृत्त डीजीएम दिनेश शर्मा से 1 करोड़ 10 लाख रुपये की ठगी का मामला दर्ज हुआ। शेयर बाजार में निवेश और “200 गुना मुनाफे” के लालच में फंसाकर की गई इस ठगी ने जांच एजेंसियों को एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तक पहुंचा दिया, जिसकी जड़ें भारत से बाहर, हांगकांग तक फैली हुई थीं।
सेवानिवृत्त डीजीएम से 1.10 करोड़ की ठगी से खुला राज
एसपी देहात अमृत जैन के अनुसार, दिसंबर से जनवरी के बीच सेवानिवृत्त डीजीएम दिनेश शर्मा को शेयर में निवेश के नाम पर एक व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ा गया। इस ग्रुप का नाम “वीआईपी प्रॉफिट क्लब” जैसा आकर्षक था, जहां रोज़ मुनाफे के स्क्रीनशॉट, फर्जी रिटर्न और तथाकथित निवेश विशेषज्ञों की सलाह साझा की जाती थी।
धीरे-धीरे भरोसा जीतने के बाद आरोपियों ने उन्हें अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराने के लिए प्रेरित किया। शुरुआती छोटे लाभ दिखाकर विश्वास जमाया गया और फिर कुछ ही दिनों में 1.10 करोड़ रुपये की रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा ली गई। जब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
हांगकांग से संचालित हो रहा था साइबर ठगी नेटवर्क
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि यह पूरा साइबर ठगी नेटवर्क भारत से नहीं, बल्कि हांगकांग से संचालित हो रहा था। तकनीकी संचालन, एप कंट्रोल, डेटा मैनेजमेंट और निर्देश विदेश से दिए जा रहे थे, जबकि भारत में मौजूद सदस्य केवल “मनी म्यूल” की तरह खातों का इस्तेमाल कर रहे थे।
यूपी सहित छह राज्यों में फैले बैंक खातों के माध्यम से ठगी की रकम को तेजी से इधर-उधर घुमाया जाता था, ताकि ट्रेल टूट जाए। यही वजह है कि शुरुआती तौर पर यह ठगी सामान्य साइबर फ्रॉड जैसी दिखी, लेकिन गहराई में जाने पर यह एक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अपराध के रूप में सामने आई।
500 करोड़ की ठगी, 1500 करोड़ का अगला लक्ष्य
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे एप आधारित ठगी के जरिए अब तक 500 करोड़ रुपये से अधिक की रकम हड़प चुके हैं। उनका अगला लक्ष्य 1500 करोड़ रुपये तक पहुंचना था। इसके लिए वे नए-नए निवेश एप, फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और आकर्षक स्कीम लॉन्च करने की तैयारी में थे।
इन एप्स को इस तरह डिजाइन किया गया था कि वे पूरी तरह प्रोफेशनल और वैध दिखें। आम निवेशक के लिए यह समझ पाना लगभग असंभव था कि वह असली प्लेटफॉर्म पर निवेश कर रहा है या किसी जाल में फंस चुका है।
छह राज्यों में दबिश, सात टीमें, 12 गिरफ्तार
जांच के दौरान सामने आए बैंक खातों और तकनीकी लोकेशन के आधार पर पुलिस ने सात विशेष टीमें गठित कीं। उत्तर प्रदेश के तीन जिलों के अलावा उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में एक साथ दबिश दी गई।
इस coordinated action के तहत 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में बुलंदशहर, मथुरा, गाजियाबाद और नोएडा सहित कई जिलों के निवासी शामिल हैं, जो अलग-अलग स्तर पर इस गिरोह के लिए काम कर रहे थे।
बरामदगी ने खोली साइबर ठगी की पूरी फैक्ट्री
आरोपियों के पास से 30 पासबुक और चेकबुक, 2 क्रेडिट कार्ड, 28 डेबिट/एटीएम कार्ड, 23 मोबाइल फोन, 13 सिम कार्ड, 9 फर्जी फर्मों की मुहर, 2 जियो राउटर, 1 लैपटॉप, 1 कैमरा और ठगी की रकम से 5 लाख 64 हजार रुपये नकद बरामद किए गए।
यह बरामदगी साफ बताती है कि यह गिरोह किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक संगठित साइबर अपराध फैक्ट्री की तरह काम कर रहा था, जहां हर सदस्य की भूमिका तय थी।
अब सरगनाओं तक पहुंचने की तैयारी
पुलिस अब इस गिरोह के विदेशी सरगनाओं तक पहुंचने की तैयारी कर रही है। इसके लिए इंटरपोल के माध्यम से कार्रवाई की जाएगी और सीबीआई से पत्राचार शुरू किया गया है। साथ ही, ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे कई फर्जी एप्स को बंद कराया जा चुका है।
साइबर ठगी से बचाव पर पुलिस की सख्त चेतावनी
पुलिस ने इस मामले के बाद आम नागरिकों के लिए साइबर सुरक्षा को लेकर सख्त एडवाइजरी जारी की है। किसी भी अनजान निवेश लिंक, व्हाट्सएप ग्रुप या “गारंटीड मुनाफे” के दावे से दूर रहने की अपील की गई है। निवेश हमेशा सेबी रजिस्टर्ड डीमैट अकाउंट के जरिए ही करने और किसी के कहने पर व्यक्तिगत खातों में पैसा ट्रांसफर न करने की सलाह दी गई है।
यदि किसी को साइबर ठगी का शक हो या वह ठगी का शिकार हो जाए, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराने को कहा गया है।
“हम खबर को चीखने नहीं देंगे,
असर छोड़ने देंगे।”





