जन सूचना अधिकार के तहत अखिलेश गुप्ता ने मांगी पात्र लाभार्थियों की सूची—यह मांग अब केवल एक व्यक्तिगत आवेदन नहीं रह गई है, बल्कि यह नगर पंचायत भाटपार रानी की कार्यप्रणाली पर उठता एक बड़ा सवाल बन चुकी है। देवरिया जनपद की आदर्श नगर पंचायत भाटपार रानी में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर लंबे समय से संदेह और शिकायतें सामने आती रही हैं। अब आरटीआई के माध्यम से मांगी गई सूचनाओं ने कथित अनियमितताओं और संभावित भ्रष्टाचार को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।
समाचार सार: अगर सब कुछ नियमों के अनुसार है, तो फिर पात्र लाभार्थियों की सूची, कंबल खरीद और वितरण से जुड़ी सूचनाएं सार्वजनिक करने में संकोच क्यों?
आरटीआई के जरिए उठे गंभीर सवाल
आदर्श नगर पंचायत भाटपार रानी के वार्ड संख्या 7 के निवासी अखिलेश कुमार गुप्ता उर्फ राजू गुप्ता ने जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत नगर पंचायत से कई अहम जानकारियां मांगी हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2026 में प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं के संचालन में पारदर्शिता का अभाव दिख रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने जन सूचना अधिकारी एवं अधिशासी अधिकारी से प्रमाणित सूचनाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों पर संदेह
अखिलेश गुप्ता द्वारा मांगी गई सूचनाओं में सबसे अहम बिंदु प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ा है। उन्होंने वर्ष 2026 में योजना के अंतर्गत चयनित सभी पात्र लाभार्थियों की नामावली, पूरा पता और संबंधित विवरण प्रमाणित रूप में देने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई ऐसे नाम सूची में शामिल बताए जाते हैं, जो वास्तव में पात्र नहीं हैं, जबकि वास्तविक जरूरतमंद योजना से वंचित रह जाते हैं। यही कारण है कि इस सूची की पारदर्शिता अब अनिवार्य हो गई है।
कंबल वितरण और खरीद प्रक्रिया पर सवाल
आरटीआई आवेदन में केवल आवास योजना ही नहीं, बल्कि नगर पंचायत द्वारा कराए गए कंबल वितरण पर भी सवाल उठाए गए हैं। अखिलेश गुप्ता ने स्पष्ट रूप से जानकारी मांगी है कि कंबल किस कंपनी से खरीदे गए, प्रति कंबल कितनी दर पर भुगतान किया गया, उसका बिल किस तिथि का है, कंबल का वजन कितना है और कुल कितने कंबलों का वितरण किया गया। यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं क्योंकि हर साल ठंड के मौसम में कंबल वितरण को लेकर गुणवत्ता और कीमत दोनों पर शिकायतें सामने आती रही हैं।
भ्रष्टाचार के आरोप और जनाक्रोश
नगर पंचायत भाटपार रानी में कथित भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि योजनाओं के नाम पर धन का दुरुपयोग किया जाता है और कागजों में सब कुछ सही दिखा दिया जाता है। जन सूचना अधिकार के तहत अखिलेश गुप्ता द्वारा मांगी गई जानकारी ने इन आरोपों को और मजबूती दी है। लोगों का मानना है कि यदि सूचनाएं समय पर और पूरी दी जाती हैं, तो कई परतें स्वतः खुल सकती हैं।
आरटीआई: पारदर्शिता का मजबूत औजार
जन सूचना अधिकार अधिनियम आम नागरिकों को शासन और प्रशासन से सवाल पूछने का संवैधानिक अधिकार देता है। भाटपार रानी का यह मामला बताता है कि जब आम नागरिक सजग होता है, तो व्यवस्था को जवाबदेह होना ही पड़ता है। अखिलेश गुप्ता का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि नगर पंचायत की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना है।
नगर पंचायत प्रशासन की चुप्पी
आरटीआई आवेदन दिए जाने के बाद नगर पंचायत प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सूचना अधिकारी द्वारा निर्धारित समयसीमा में जानकारी उपलब्ध कराई जाती है या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि सूचना देने में टालमटोल होती है, तो यह संदेह और गहरा सकता है।
जनता को उम्मीद, जवाबदेही तय होगी
स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि जन सूचना अधिकार के तहत मांगी गई सूचनाएं सामने आने के बाद सच्चाई उजागर होगी। यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है, तो नगर पंचायत की छवि मजबूत होगी, और यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज होगी। फिलहाल यह मामला भाटपार रानी में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसके परिणाम का इंतजार कर रहे हैं।
“हम खबर को चीखने नहीं देंगे,
असर छोड़ने देंगे।”





