हर घर नल जल योजना के तहत जनपद देवरिया के विकासखंड पथरदेवा स्थित सकतुंआ बुजुर्ग गांव में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिस पानी टंकी का निर्माण शुरू किया गया था, वह आज प्रशासनिक उदासीनता, विभागीय शिथिलता और जवाबदेही के अभाव का प्रतीक बन चुकी है। योजना की मूल भावना थी कि गांव के हर घर तक नल के माध्यम से साफ और सुरक्षित पानी पहुंचे, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के करीब चार साल बाद भी यह परियोजना अधूरी पड़ी है और ग्रामीण आज भी शुद्ध पेयजल के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
सरकारी फाइलों में पूरी मानी जा रही योजनाएं जब ज़मीन पर अधूरी मिलें, तो सवाल केवल निर्माण का नहीं बल्कि व्यवस्था की नीयत का भी उठता है। सकतुंआ बुजुर्ग की पानी टंकी उसी सवाल का जीवंत उदाहरण बन गई है।
योजना की शुरुआत और तय समय-सीमा
जानकारी के अनुसार, सकतुंआ बुजुर्ग गांव में हर घर नल जल योजना के अंतर्गत पानी टंकी निर्माण कार्य की शुरुआत 3 मार्च 2022 को की गई थी। ठेकेदार को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि लगभग 18 महीने के भीतर कार्य पूर्ण कर इसे विभाग को हैंडओवर कर दिया जाए, ताकि पाइपलाइन के माध्यम से गांव के प्रत्येक परिवार को शुद्ध पेयजल की सुविधा मिल सके।
लेकिन आज स्थिति यह है कि 18 महीने की जगह 45 महीने बीत जाने के बावजूद न तो टंकी पूरी हुई और न ही एक भी घर को इससे पानी नसीब हो सका।
ग्रामीणों को नहीं मिला एक बूंद भी शुद्ध पानी
गांव के लोगों का कहना है कि पानी टंकी का ढांचा खड़ा तो दिखाई देता है, लेकिन वह केवल एक अधूरा निर्माण है, जिससे न तो जलापूर्ति शुरू हुई और न ही पाइपलाइन व्यवस्था पूरी हो सकी। गर्मी के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब हैंडपंप और निजी साधनों पर निर्भरता बढ़ जाती है।
ग्रामीणों के अनुसार, सरकार जिस योजना को “हर घर तक नल” के नाम से प्रचारित कर रही है, वही योजना उनके गांव में केवल बोर्ड और अधूरे ढांचे तक सीमित रह गई है।
आक्रोश की वजह बनी प्रशासनिक चुप्पी
स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश केवल अधूरे निर्माण को लेकर नहीं है, बल्कि उससे भी अधिक नाराज़गी इस बात को लेकर है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद न तो ब्लॉक प्रशासन ने गंभीरता दिखाई और न ही संबंधित विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई की।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार अधिकारियों को मौके पर बुलाने का प्रयास किया गया, लेकिन निरीक्षण के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई।
जेई का बयान और सवालों का सिलसिला
जब इस संबंध में जल जीवन मिशन के जूनियर इंजीनियर (जेई) से बात की गई, तो उनका जवाब और भी चौंकाने वाला रहा। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। जेई ने यह भी जोड़ा कि संभवतः पानी टंकी का अब तक हैंडओवर नहीं हुआ है।
इस बयान ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं—अगर 45 महीने बाद भी हैंडओवर नहीं हुआ, तो विभागीय निगरानी कहां थी? क्या कार्यदायी संस्था को खुली छूट दी गई?
पूर्व प्रधान प्रतिनिधि का आरोप
मौके पर मौजूद ग्रामीणों के बीच प्रधान प्रतिनिधि स्वर्गीय आशुतोष सिंह के पुत्र सौरभ सिंह ने विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो आज गांव को शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा के लिए इस तरह भटकना नहीं पड़ता।
सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत
सकतुंआ बुजुर्ग की यह तस्वीर केवल एक गांव की कहानी नहीं है, बल्कि उन सैकड़ों योजनाओं की झलक है, जो कागजों में सफल और ज़मीन पर असफल दिखाई देती हैं। हर घर नल जल योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजना तब सवालों के घेरे में आती है, जब उसका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाता।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन और उच्च स्तर पर शिकायत करने को मजबूर होंगे।
समाचार सार : सकतुंआ बुजुर्ग गांव में हर घर नल जल योजना के तहत शुरू हुआ पानी टंकी निर्माण कार्य 45 महीने बाद भी अधूरा है। ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा और विभागीय लापरवाही को लेकर गहरा असंतोष व्याप्त है।
“हम खबर को चीखने नहीं देंगे,
असर छोड़ने देंगे।”





