SIR के बाद यूपी चुनावी गणित : क्या 2027 में कम मार्जिन वाली सीटों पर बदल जाएगा सत्ता का संतुलन?

SIR के बाद यूपी चुनावी गणित दिखाती फीचर इमेज, जिसमें 2027 विधानसभा चुनाव पर 2.88 करोड़ वोट कटने का असर, BJP और सपा के बीच सियासी टकराव दर्शाया गया है।

अंजनी कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट

SIR के बाद यूपी चुनावी गणित
: क्या 2027 में कम मार्जिन वाली सीटों पर बदल जाएगा सत्ता का संतुलन?

SIR के बाद यूपी चुनावी गणित को समझना इसलिए बेहद ज़रूरी हो गया है क्योंकि उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद करीब 2.88 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो चुके हैं। यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव में उन सीटों पर निर्णायक असर डाल सकता है जहां 2022 में जीत और हार का अंतर बेहद मामूली रहा था।

14 दिसंबर 2025 को BJP के नए प्रदेश अध्यक्ष के पदभार ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं इस विषय पर चिंता जाहिर की थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि समय रहते छूटे हुए मतदाताओं के नाम दोबारा नहीं जोड़े गए, तो 10 हजार से कम वोटों के अंतर वाली सीटों पर सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह बयान इस बात का संकेत है कि SIR का प्रभाव सत्ता पक्ष के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

SIR के आंकड़े क्या कहते हैं?

SIR से पहले उत्तर प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 15 करोड़ 44 लाख थी। पुनरीक्षण के दौरान 2.89 करोड़ नाम सूची से हटाए गए, जिसके बाद कुल मतदाता घटकर 12 करोड़ 55 लाख रह गए। चुनाव आयोग के अनुसार इनमें 46.23 लाख मतदाता मृत पाए गए, 2.17 करोड़ मतदाता स्थायी रूप से बाहर गए या अनुपस्थित मिले, जबकि 25.47 लाख नाम डुप्लीकेट पाए गए।

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कम मार्जिन वाली सीटें क्यों बनीं ‘डेंजर ज़ोन’?

2022 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 114 सीटें ऐसी थीं जहां जीत और हार का अंतर 10 हजार वोटों से कम रहा। इनमें से 63 सीटों पर BJP और 41 सीटों पर समाजवादी पार्टी को जीत मिली थी। यही वे सीटें हैं जहां SIR के बाद मतदाता सूची में हुआ बदलाव सीधे चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।

विशेष रूप से 15 सीटें ऐसी थीं जहां जीत-हार का अंतर एक हजार वोटों से भी कम था। अब इन्हीं सीटों पर 32 हजार से लेकर 1.12 लाख तक मतदाताओं के नाम कटने की जानकारी सामने आ रही है, जिससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदलने की आशंका जताई जा रही है।

2022 में क्यों सिमट गया था जीत–हार का अंतर?

2017 और 2022 के चुनावों की तुलना करें तो साफ दिखाई देता है कि 2022 में जीत-हार का अंतर काफी सिमट गया था। BJP को 60 से अधिक सीटों पर 10 हजार से कम वोटों के अंतर से जीत मिली थी। ऐसे में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम कटना पार्टी के लिए नई चुनौती बनकर उभरा है।

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BJP के लिए चिंता क्यों बढ़ी?

SIR के बाद सबसे बड़ी चिंता शहरी इलाकों को लेकर जताई जा रही है, जहां बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटे हैं। शहरी क्षेत्रों में BJP की पारंपरिक पकड़ मानी जाती रही है। ऐसे में इन इलाकों में वोट कटने से पार्टी के चुनावी आधार पर सीधा असर पड़ सकता है।

क्या समाजवादी पार्टी को भी झटका लगेगा?

इस प्रक्रिया का असर सिर्फ BJP तक सीमित नहीं है। समाजवादी पार्टी को भी नुकसान होने की आशंका है, खासकर उन जिलों में जहां मुस्लिम आबादी रोजगार या अन्य कारणों से लंबे समय तक बाहर रहती है। ऐसे मतदाताओं के नाम कटने से सपा के वोट आधार में सेंध लग सकती है।

99 सीटें जहां नतीजे पलट सकते हैं

2022 के चुनाव में 99 सीटें ऐसी थीं जहां जीत और हार का अंतर 1 हजार से 10 हजार वोटों के बीच रहा। इन सीटों में BJP ने 55, सपा ने 35, रालोद ने 3, निषाद पार्टी और सुभासपा ने 2–2 सीटें जीती थीं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार SIR के बाद ये सभी सीटें अब हाई रिस्क कैटेगरी में आ चुकी हैं।

क्षेत्रीय समीकरण और SIR का असर

पश्चिमी यूपी, मध्य यूपी (अवध) और पूर्वांचल—तीनों क्षेत्रों में कम मार्जिन वाली सीटों पर SIR का असर अलग-अलग सामाजिक संरचनाओं के कारण भिन्न हो सकता है। पश्चिमी यूपी में मुस्लिम और जाट मतदाता, मध्य यूपी में OBC जातियां और पूर्वांचल में अति पिछड़ी जातियां चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाती रही हैं।

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BLA की तैनाती से बढ़ी सियासी सतर्कता

SIR के बाद प्रदेश के लगभग 1.77 लाख बूथों पर विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब पौने छह लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) सक्रिय हैं। यह दर्शाता है कि सभी दल मतदाता सूची को लेकर किसी भी तरह की चूक नहीं करना चाहते।

निष्कर्ष: 2027 में बदल सकता है खेल

SIR के बाद यूपी चुनावी गणित अब पहले जैसा नहीं रहा। कम मार्जिन वाली सीटों पर मतदाता सूची में हुआ बदलाव 2027 के विधानसभा चुनाव को पूरी तरह नई दिशा दे सकता है। फिलहाल इतना तय है कि आने वाला चुनाव पहले से कहीं अधिक कड़ा और अप्रत्याशित होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

SIR क्या है?

SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करने की प्रक्रिया है।

SIR के बाद कितने नाम कटे?

उत्तर प्रदेश में लगभग 2.88 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए।

क्या इससे 2027 के नतीजे बदल सकते हैं?

कम मार्जिन वाली सीटों पर इसका असर निर्णायक हो सकता है।



UP Voter List SIR 2026 के तहत उत्तर प्रदेश में ड्राफ्ट मतदाता सूची की जांच करते मतदाता और बीएलओ।
UP Voter List SIR 2026 के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम जांच और दावा प्रक्रिया के लिए बीएलओ के पास पहुंचे मतदाता।

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