फर्जी भुगतान का आरोप : कागजों में सामग्री खरीदी, असल में पहाड़ से निकली

चित्रकूट की ग्राम पंचायतों में फर्जी भुगतान और पहाड़ से अवैध खनन की गई सामग्री का मामला।

संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
IMG-20260116-WA0015
previous arrow
next arrow

फर्जी भुगतान का आरोप—चित्रकूट जिले की ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग और अवैध खनन से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं। सदर ब्लॉक कर्वी अंतर्गत ग्राम पंचायत रानीपुर खाकी और संग्रामपुर को लेकर उठे इन सवालों ने पंचायत स्तर की कार्यप्रणाली, निगरानी तंत्र और प्रशासनिक जवाबदेही पर सीधा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

चित्रकूट की पंचायतों में विकास या दस्तावेजी खेल?

जनपद चित्रकूट के सदर ब्लॉक कर्वी की ग्राम पंचायत रानीपुर खाकी एवं संग्रामपुर में विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और ‘जीत आपकी – चलो गांव की ओर’ जागरूकता अभियान के संस्थापक/अध्यक्ष संजय सिंह राणा ने जिलाधिकारी को लिखित शिकायत सौंपते हुए निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पंचायत सचिवों के स्थानांतरण की मांग की है।

कागजों में खरीदी गई सामग्री, हकीकत में पहाड़ से निकली

शिकायत के अनुसार ग्राम पंचायत रानीपुर खाकी में पूर्व में तैनात रहे पंचायत सचिव मुदित प्रताप सिंह ने तत्कालीन ग्राम प्रधान से कथित साठगांठ कर विकास कार्यों एवं गौशाला निर्माण के नाम पर फर्जी भुगतान कराया। आरोप है कि सरकारी अभिलेखों में निर्माण सामग्री की खरीद बाहरी आपूर्तिकर्ताओं से दिखाई गई, जबकि वास्तविकता में उपयोग की गई मोरम और अन्य सामग्री ग्राम सभा के स्थानीय पहाड़ से ही खनन कर निकाली गई थी।

इसे भी पढें  भगवान भजनाश्रम ट्रस्ट ने कोल आदिवासी बस्तियों में वितरित की खाद्य सामग्री — जरूरतमंदों के चेहरे खिले

फर्जी भुगतान का आरोप इस बात को लेकर है कि बिना वैध खनन अनुमति, बिना रॉयल्टी और बिना निविदा प्रक्रिया अपनाए, स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर सरकारी धन की निकासी की गई। यह न केवल वित्तीय अनियमितता का मामला है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण कानूनों के उल्लंघन की ओर भी संकेत करता है।

वर्तमान सचिव और प्रधान पर अवैध खनन व बिक्री के आरोप

शिकायत में आगे आरोप लगाया गया है कि वर्तमान सचिव मान सिंह और ग्राम प्रधान जनार्दन सिंह की कथित मिलीभगत से ग्राम सभा के पहाड़ पर अवैध खनन कर मोरम की बिक्री की जा रही है। बताया गया कि पहाड़ में अंत्येष्टि स्थल के निर्माण के दौरान निकली मोरम को बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के संग्रामपुर ग्राम पंचायत में लगभग 700 मीटर लंबे संपर्क मार्ग के निर्माण में उपयोग कर लिया गया।

यह भी कहा गया है कि इस पूरी प्रक्रिया में न तो खनिज विभाग की अनुमति ली गई और न ही पंचायत के प्रस्तावों में वास्तविक स्रोत का उल्लेख किया गया। ऐसे में यह मामला केवल पंचायत स्तर की अनियमितता नहीं, बल्कि विभागीय चूक और संभावित संरक्षण की ओर भी इशारा करता है।

रिश्तेदारी, प्रभाव और पंचायतों के बीच सामग्री का खेल

शिकायत में यह तथ्य भी उजागर किया गया है कि रानीपुर खाकी और संग्रामपुर के ग्राम प्रधान आपस में सगे रिश्तेदार बताए जा रहे हैं। आरोप है कि इसी रिश्तेदारी का लाभ उठाकर अवैध खनन से निकली सामग्री को एक पंचायत से दूसरी पंचायत में उपयोग किया गया, जिससे सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर पैदा हुआ।

इसे भी पढें  अरछा बरेठी गांव का अस्तित्व खतरे में: पैसुनी नदी का कटान और बचाव की मांग

फर्जी भुगतान का आरोप इस संदर्भ में और भी गंभीर हो जाता है, क्योंकि पंचायतों के बीच इस तरह की आपसी सांठगांठ से न केवल वित्तीय अनुशासन टूटता है, बल्कि ग्राम सभाओं में पारदर्शिता की अवधारणा भी कमजोर होती है।

एक ही ब्लॉक में वर्षों से जमे सचिव

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि सचिव मुदित प्रताप सिंह और वर्तमान सचिव मान सिंह लंबे समय से एक ही ब्लॉक में तैनात हैं। आरोप है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर बने रहने से स्थानीय स्तर पर प्रभाव, मिलीभगत और जवाबदेही से बचने की स्थिति बनती है, जिससे अनियमितताओं को बढ़ावा मिलता है।

प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें

आवेदक संजय सिंह राणा ने जिलाधिकारी से निम्नलिखित मांगें की हैं—

  • ग्राम पंचायत रानीपुर खाकी और संग्रामपुर में विकास कार्यों के नाम पर हुए सभी भुगतानों की विस्तृत, निष्पक्ष और तकनीकी जांच।
  • अवैध खनन और मोरम की कथित बिक्री की जांच तथा दोषियों पर वैधानिक कार्रवाई।
  • लंबे समय से एक ही ब्लॉक में जमे सचिवों का अन्य ब्लॉक में तत्काल स्थानांतरण।
  • जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच।
इसे भी पढें  📢 चित्रकूट जिले में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठी आवाज — 13 नवंबर को जिलाधिकारी को सौंपा जाएगा ज्ञापन

कई अधिकारियों को भेजी गई शिकायत की प्रतिलिपि

इस शिकायत की प्रतिलिपि मुख्य विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, खनिज अधिकारी, खंड विकास अधिकारी (सदर ब्लॉक कर्वी) एवं सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को भी भेजी गई है, ताकि मामले की बहु-स्तरीय जांच सुनिश्चित की जा सके।

प्रशासन की अगली परीक्षा

ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में पारदर्शिता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का मुद्दा पहले से ही संवेदनशील रहा है। ऐसे में फर्जी भुगतान का आरोप प्रशासन के लिए एक अहम परीक्षा बन गया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित रहती है या वास्तव में जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई होती है।

पाठकों के सवाल (क्लिक कर पढ़ें)

फर्जी भुगतान का आरोप क्या है?

विकास कार्यों में सामग्री खरीद कागजों में दिखाई गई, जबकि असल सामग्री स्थानीय पहाड़ से अवैध रूप से निकाली गई।

किन पंचायतों पर आरोप लगे हैं?

ग्राम पंचायत रानीपुर खाकी और संग्रामपुर पर।

प्रशासन से क्या मांग की गई है?

निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और लंबे समय से जमे सचिवों के स्थानांतरण की मांग की गई है।



चित्रकूट के मानिकपुर क्षेत्र में लघु सिंचाई विभाग द्वारा कराए गए तालाब, चेकडैम और कुओं के निर्माण कार्यों की स्थिति दर्शाता कोलाज
मानिकपुर में तालाब जीर्णोद्धार, चेकडैम व कुओं के निर्माण की वास्तविक स्थिति — जहां गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पूरी खबर पढने के लिए फोटो को क्लिक करें☝

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top