चित्रकूट की धरती पर शनिवार की सुबह एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। विकास खंड परिसर में कामकाज की चहल-पहल के बीच कई कर्मचारी अपनी भुजाओं पर काली पट्टी बांधे खड़े दिखाई दिए। उनके चेहरों पर आक्रोश भी था और उम्मीद भी—आक्रोश इस बात का कि आठ महीने से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ और उम्मीद इस बात की कि शायद उनकी यह आवाज शासन-प्रशासन के गलियारों तक पहुंचे।
सदर ब्लॉक कर्वी सहित जिले के अन्य ब्लॉकों में मनरेगा कर्मचारियों ने लंबित मानदेय के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। काली पट्टी बांधकर कर्मचारियों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि उनका संघर्ष किसी टकराव का नहीं बल्कि न्याय की मांग का है।
आठ महीने से अटका है मानदेय
मनरेगा कर्मचारियों का कहना है कि पिछले आठ महीनों से उनका मानदेय नहीं मिला है। इस लंबी प्रतीक्षा ने अब उनके धैर्य की सीमा को तोड़ दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि पहले ही उनका मानदेय बहुत अधिक नहीं है, लेकिन जो थोड़ा बहुत मिलता है, वही उनके परिवार के जीवन का सहारा बनता है। जब वही समय पर न मिले तो घर का चूल्हा जलाना भी मुश्किल हो जाता है।
तकनीकी सहायक महेंद्र सिंह ने बताया कि मनरेगा कर्मचारियों का मानदेय पहले से ही सीमित है और इसके बावजूद समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब स्थिति ऐसी हो गई है कि कर्मचारियों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी कठिन हो गया है।
काली पट्टी बांधकर किया शांतिपूर्ण प्रदर्शन
कर्मचारियों ने विकास खंड परिसर में एकत्र होकर काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में ग्राम रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक, लेखा सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर और अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी सहित विभिन्न पदों पर कार्यरत कर्मचारी शामिल हुए।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने किसी प्रकार का हंगामा या अव्यवस्था नहीं की, बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सामने रखा। उनका कहना था कि वे अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।
कर्वी और रामनगर ब्लॉक में भी गूंजा विरोध
सदर ब्लॉक कर्वी में अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी सिद्धार्थ गुप्ता की अध्यक्षता में कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। वहीं रामनगर ब्लॉक में अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी अमित मिश्रा की अगुवाई में कर्मचारियों ने इसी प्रकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।
कर्मचारियों का कहना है कि मनरेगा योजना के अंतर्गत उन्हें न केवल योजना से जुड़े कार्यों को पूरा करना होता है, बल्कि कई बार अन्य विभागों से संबंधित कार्य भी सौंपे जाते हैं। इन सभी कार्यों को वे पूरी निष्ठा और मेहनत के साथ करते हैं, लेकिन मानदेय भुगतान में लगातार हो रही देरी ने उनके मनोबल को प्रभावित किया है।
त्योहार भी फीके पड़ गए
रोजगार सेवक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष ने बताया कि मनरेगा कर्मचारी विभागीय कार्यों के साथ अन्य विभागों के कार्य भी पूरी जिम्मेदारी से करते हैं। इसके बावजूद पिछले आठ महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि होली और दीवाली जैसे प्रमुख त्योहारों के अवसर पर भी भुगतान न होने से कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई कर्मचारियों को अपने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उधार तक लेना पड़ रहा है।
कार्य बहिष्कार की चेतावनी
मनरेगा कर्मचारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जल्द ही लंबित मानदेय का भुगतान नहीं किया गया तो वे कार्य बहिष्कार करने को बाध्य होंगे। उनका कहना है कि वे किसी टकराव की स्थिति नहीं चाहते, लेकिन लगातार अनदेखी किए जाने पर उन्हें कठोर निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
कर्मचारियों का कहना है कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना को जमीनी स्तर पर लागू करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। यदि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान समय पर नहीं किया गया तो इसका प्रभाव योजना के संचालन पर भी पड़ सकता है।
न्याय की आस में कर्मचारी
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने प्रशासन से मांग की कि जल्द से जल्द लंबित मानदेय का भुगतान किया जाए ताकि वे बिना किसी आर्थिक तनाव के अपने कार्यों को पूरी लगन से कर सकें।
कर्मचारियों की यह शांतिपूर्ण आवाज अब प्रशासन के दरवाजे पर दस्तक दे रही है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस पुकार को कितनी गंभीरता से सुनता है और कर्मचारियों को उनके अधिकार दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
मनरेगा कर्मचारियों ने प्रदर्शन क्यों किया?
मनरेगा कर्मचारियों ने पिछले आठ महीने से लंबित मानदेय के भुगतान की मांग को लेकर काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन में किन-किन कर्मचारियों ने भाग लिया?
ग्राम रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक, लेखा सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर और अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी सहित कई कर्मचारी प्रदर्शन में शामिल हुए।
कर्मचारियों की मुख्य मांग क्या है?
कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि आठ महीने से लंबित मानदेय का जल्द से जल्द भुगतान किया जाए।
यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो क्या होगा?
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया तो वे कार्य बहिष्कार करने को बाध्य होंगे।









