अपनों की तलाश में मासूम की खामोश सिसकियां — यह कोई साहित्यिक पंक्ति नहीं, बल्कि पिहानी की सड़कों पर टहलती उस नन्ही बच्ची की सच्ची तस्वीर है, जो अपने परिवार से बिछड़कर अनजानी दुनिया में अकेली खड़ी है। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के पिहानी कस्बे में मिली यह लगभग पाँच वर्ष की मासूम बच्ची आज पूरे इलाके की संवेदनाओं को झकझोर रही है। उसके चेहरे पर डर, आँखों में इंतज़ार और होंठों पर खामोशी है, जो बहुत कुछ कहती है, लेकिन शब्दों में ढल नहीं पाती।
समाचार सार: पिहानी में पुलिस चौकी क्षेत्र के पीछे एक 4–5 साल की बच्ची लावारिस हालत में मिली है। बच्ची अपना नाम-पता नहीं बता पा रही। स्थानीय नागरिकों ने उसे सुरक्षित स्थान पर बैठाकर पुलिस को सूचना दी। प्रशासन गुमशुदगी की रिपोर्ट खंगाल रहा है और आमजन से पहचान में सहयोग की अपील की गई है।
भीड़ के बीच अकेली, लेकिन नज़रें ठहर गईं
घटना पिहानी पुलिस चौकी क्षेत्र के पीछे की है, जहाँ रोज़ की तरह लोगों की आवाजाही बनी रहती है। इसी भीड़ के बीच एक छोटी-सी बच्ची, सहमी हुई, बार-बार इधर-उधर देखती नज़र आई। न उसके साथ कोई बड़ा था, न ही कोई ऐसा चेहरा जिसे वह पहचान सके। राह चलते लोगों के लिए वह पहले एक सामान्य दृश्य रही होगी, लेकिन जब उसकी आँखों में डर और असहायता साफ दिखाई दी, तो कुछ संवेदनशील दिल ठहर गए।
देवदूत बनकर आगे आए स्थानीय नागरिक
स्थानीय निवासी मुकेश और अयूब की नज़र जब इस बच्ची पर पड़ी, तो उन्होंने स्थिति की गंभीरता को तुरंत समझा। बिना किसी औपचारिकता या देरी के उन्होंने बच्ची को सुरक्षित स्थान पर बैठाया। गोपामऊ चौकी पिहानी के पीछे अपने खोखे पर उन्होंने बच्ची को पानी पिलाया, उससे बात करने की कोशिश की और उसे यह एहसास दिलाया कि वह अब अकेली नहीं है। यह वही क्षण था, जब इंसानियत ने चुपचाप अपना फर्ज़ निभाया।
नाम-पता पूछने पर खामोश रही मासूम
बच्ची की उम्र इतनी कम है कि वह न तो अपने माता-पिता का नाम बता पा रही है और न ही अपने घर या मोहल्ले की कोई स्पष्ट जानकारी दे पा रही है। पूछने पर वह कभी सिर झुका लेती है, कभी आसपास देखती है, मानो किसी परिचित चेहरे की तलाश कर रही हो। उसकी यह खामोशी सबसे ज़्यादा बेचैन करने वाली है, क्योंकि यह शब्दों से कहीं ज़्यादा दर्द बयां करती है।
पुलिस को दी गई सूचना, प्रशासन सक्रिय
स्थानीय नागरिकों की तत्परता से पिहानी पुलिस को तुरंत सूचना दी गई। पुलिस प्रशासन ने बच्ची की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आसपास के थानों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्टों को खंगालना शुरू कर दिया है। साथ ही, यह भी प्रयास किया जा रहा है कि बच्ची को किसी तरह का मानसिक या शारीरिक कष्ट न हो। प्रशासन का कहना है कि पहचान होते ही बच्ची को उसके परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
एक बच्ची नहीं, समाज की जिम्मेदारी
अपनों की तलाश में मासूम की खामोश सिसकियां केवल एक खबर नहीं हैं, बल्कि यह समाज के लिए एक आईना भी हैं। हर बार जब कोई बच्चा इस तरह भटकता हुआ मिलता है, तो सवाल उठता है कि आखिर वह कैसे अपने परिवार से बिछड़ा। क्या यह लापरवाही थी, मजबूरी थी या हालात की मार? इन सवालों के जवाब बाद में मिलेंगे, लेकिन इस वक्त सबसे अहम है बच्ची को सुरक्षित घर तक पहुँचाना।
सोशल मीडिया से उम्मीद की एक किरण
आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि कई बार जीवन जोड़ने का जरिया भी बन जाता है। प्रशासन और स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि यदि यह खबर अधिक से अधिक साझा की जाए, तो शायद बच्ची के माता-पिता या कोई परिचित इसे पहचान ले। कई मामलों में ऐसी ही साझा कोशिशों से बिछड़े परिवार फिर से मिल पाए हैं।
एक मार्मिक अपील: पहचान में सहयोग करें
यदि आप पिहानी, हरदोई या आसपास के क्षेत्रों में रहते हैं और इस बच्ची को पहचानते हैं, या इसके परिजनों के बारे में कोई भी जानकारी रखते हैं, तो कृपया तुरंत पिहानी पुलिस चौकी या स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें। आपकी एक छोटी-सी सूचना किसी माँ की सूनी गोद भर सकती है, किसी पिता की बेचैनी खत्म कर सकती है और इस मासूम के चेहरे पर फिर से मुस्कान ला सकती है।
कभी-कभी इंसानियत का सबसे बड़ा इम्तिहान बहुत छोटे कामों में छिपा होता है। इस खबर को साझा करना भी उन्हीं कामों में से एक है। हो सकता है, आपकी स्क्रीन से निकली यह खबर किसी दिल तक पहुँच जाए — और वहीं से इस मासूम की घर वापसी का रास्ता निकल आए।
“हम खबर को चीखने नहीं देंगे,
असर छोड़ने देंगे।”
अदालत में मौत की सजा सुनते ही हुआ फरार





