डबल मर्डर केस उत्तर प्रदेश के सबसे सनसनीखेज आपराधिक मामलों में गिना जाता है, जहां फेसबुक से शुरू हुआ एक एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर धीरे-धीरे एक पूरे परिवार के विनाश का कारण बन गया। इस खौफनाक वारदात में एक आई स्पेशलिस्ट डॉक्टर और उसके चार साल के मासूम बेटे की निर्मम हत्या कर दी गई। यह मामला सिर्फ हत्या का नहीं, बल्कि टूटते वैवाहिक रिश्तों, अकेलेपन, अवैध संबंधों और पूर्व नियोजित साजिश की भयावह कहानी है, जिसने समाज को भीतर तक झकझोर दिया।
पहली शादी, टूटता रिश्ता और अकेलापन
आई स्पेशलिस्ट डॉक्टर ओमप्रकाश यादव की पहली शादी महज कुछ महीनों में टूट गई थी। पत्नी आधुनिक माहौल में पली-बढ़ी थी और संयुक्त परिवार में खुद को ढाल नहीं पा रही थी। हालात यहां तक पहुंचे कि तलाक हो गया। परिवार के लिए समर्पित ओमप्रकाश अपने घर और जिम्मेदारियों को छोड़ने के पक्ष में नहीं थे। तलाक के बाद उनकी जिंदगी में एक खालीपन आ गया।
दूसरी शादी और नई शुरुआत
साल 2009 में ओमप्रकाश की दूसरी शादी अर्चना से हुई। अर्चना धार्मिक, शांत और घरेलू स्वभाव की थी। शुरुआती दिनों में ऐसा लगा मानो घर फिर से बस गया हो। परिवार खुश था और ओमप्रकाश को भी लगा कि अब जिंदगी सही दिशा में लौट रही है।
अलग रहने की चाह और बढ़ती दूरी
कुछ समय बाद अर्चना ने अलग रहने की इच्छा जताई। उसे शिकायत थी कि ओमप्रकाश पूरा दिन क्लिनिक में रहते हैं और घर लौटकर परिवार के बीच समय बिताते हैं। बातचीत से मामला सुलझने के बजाय और उलझता चला गया। आखिरकार घर के भीतर ही अलग रहने का फैसला हुआ।
बेटे का जन्म और फिर वही अकेलापन
2012 में बेटे नितिन का जन्म हुआ। कुछ समय तक घर में खुशियां लौटीं, लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बड़ा हुआ और स्कूल जाने लगा, अर्चना फिर से अकेलेपन से जूझने लगी। दिन के लंबे सन्नाटे उसे भीतर से तोड़ने लगे।
सोशल मीडिया से शुरू हुई नजदीकियां
अर्चना ने समय काटने के लिए फेसबुक का सहारा लिया। यहीं उसकी दोस्ती अजय यादव से हुई। बातचीत बढ़ी, भरोसा गहराया और यह दोस्ती एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर में बदल गई। अजय खुद को प्रभावशाली और रसूखदार दिखाता था, जिससे अर्चना प्रभावित होती चली गई।
शक, झगड़े और बगावत
ओमप्रकाश को पत्नी के बदले व्यवहार पर शक होने लगा। देर रात फोन, मोबाइल से दूरी न बनाना और चिड़चिड़ापन रिश्ते में तनाव बढ़ाने लगा। झगड़े इस कदर बढ़े कि दोनों अलग-अलग कमरों में सोने लगे।
खूनी साजिश का जन्म
अर्चना और अजय के बीच तय हुआ कि ओमप्रकाश के रहते वे कभी साथ नहीं रह पाएंगे। बातचीत धीरे-धीरे हत्या की योजना में बदल गई। फैसला हुआ कि रास्ते से पति को हटाया जाएगा।
एक रात, दो हत्याएं
तय योजना के तहत अजय रात में घर पहुंचा। नींद में सो रहे ओमप्रकाश पर हथौड़े से कई वार किए गए। शोर सुनकर चार साल का नितिन जाग गया। मासूम की भी गला दबाकर हत्या कर दी गई। इसके बाद लूट का नाटक रचा गया।
जांच में खुली परतें
पुलिस को शुरू से ही लूट की कहानी पर शक था। कॉल डिटेल और लोकेशन जांच से अजय की मौजूदगी सामने आई। पूछताछ में उसने जुर्म कबूल कर लिया। इसके बाद अर्चना को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
अदालत का फैसला
चार साल चली सुनवाई के बाद सत्र न्यायालय ने अर्चना और अजय यादव को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने माना कि यह हत्या पूरी तरह पूर्व नियोजित थी और इसमें कोई पश्चाताप नहीं दिखा।
पाठकों के सवाल
यह डबल मर्डर केस क्यों चर्चा में रहा?
क्योंकि इसमें एक पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति और मासूम बेटे की हत्या कराई।
क्या यह लूट का मामला था?
नहीं, लूट को सिर्फ हत्या छुपाने के लिए दिखाया गया था।
आरोपियों को क्या सजा मिली?
दोनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।










