
लखनऊ में पांच शव मिलने की घटनाओं ने राजधानी को झकझोर कर रख दिया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक ही दिन में अलग-अलग स्थानों से सामने आए इन मामलों ने कानून-व्यवस्था, पारिवारिक विवाद, मानसिक स्वास्थ्य और आपराधिक आशंकाओं—सभी पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
गोमती नदी से युवक-युवती के शव, एक सरसों के खेत से बरामद नर कंकाल और एक बावर्ची की संदिग्ध मौत—इन तीनों घटनाओं की पुलिस अलग-अलग स्तर पर जांच कर रही है। प्रशासन का दावा है कि पोस्टमार्टम, फॉरेंसिक और डीएनए रिपोर्ट आने के बाद तस्वीर साफ होगी, लेकिन फिलहाल शहर में बेचैनी और भय का माहौल है।
गोमती नदी में युवक-युवती के शव: हादसा या साजिश?
राजधानी के गोमती नगर थाना क्षेत्र में गोमती नदी से एक युवक और एक युवती का शव उतराता हुआ मिलने की सूचना से हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने गोताखोरों की मदद से दोनों शवों को बाहर निकाला और
मोर्चरी भेजा। शुरुआती तौर पर पहचान न हो पाने के कारण पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्टों से मिलान शुरू कर दिया है।
जांच का अहम पहलू यह है कि दोनों की मौत एक साथ कैसे हुई—क्या यह हादसा था, आत्महत्या का मामला या फिर किसी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप? नदी के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) की जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट होगा कि मौत का समय, कारण और परिस्थितियां क्या थीं।
सरसों के खेत में मिला नर कंकाल: पूनम गुमशुदगी से जुड़ी कड़ी?
लखनऊ के नगराम थाना क्षेत्र के ग्राम कुबेहरा में सरसों के खेत से एक नर कंकाल मिलने के बाद मामला और भी गंभीर हो गया। कंकाल जिस स्थान पर मिला, वह 13 दिसंबर 2025 से लापता महिला पूनम के घर से करीब 300 मीटर की दूरी पर बताया जा रहा है। कंकाल के पास मिले कपड़ों को परिजनों ने पूनम की साड़ी के रूप में पहचाना है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि डीएनए जांच के बाद ही होगी।
पूनम के पति पीतांबर ने गुमशुदगी की रिपोर्ट पहले ही दर्ज करा रखी थी। फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं—मिट्टी के नमूने, कपड़ों के रेशे और आसपास के क्षेत्र की मैपिंग की गई है। पुलिस का कहना है कि यदि डीएनए रिपोर्ट मेल खाती है, तो यह मामला हत्या, आत्महत्या या दुर्घटना—तीनों कोणों से देखा जाएगा।
मोबाइल विवाद और पारिवारिक तनाव: जांच का संवेदनशील कोण
परिजनों के अनुसार, पड़ोस के एक युवक से बातचीत को लेकर पूनम और उसके पति के बीच विवाद हुआ था। इसी दौरान मोबाइल फोन छीने जाने की बात सामने आई। इसके बाद पूनम का अचानक लापता हो जाना और अब कंकाल का मिलना—इन घटनाओं की कड़ी पुलिस को पारिवारिक पृष्ठभूमि, सामाजिक दबाव और संभावित अपराध की ओर ले जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में जल्दबाजी से निष्कर्ष निकालना खतरनाक हो सकता है। पुलिस को डिजिटल साक्ष्य, गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट—तीनों का समन्वय करना होगा, ताकि किसी निर्दोष को नुकसान न पहुंचे और दोषी बच न जाए।
बावर्ची की संदिग्ध मौत: आत्महत्या या दुर्घटना?
विभूतिखंड थाना क्षेत्र में एक निजी कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करने वाले बावर्ची एम लाल शर्मा (35) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने एक और प्रश्न जोड़ दिया है। वह किचन में खून से लथपथ हालत में मिला था और पास में चाकू पड़ा हुआ था। साथियों ने तत्काल उसे लोहिया अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
प्रारंभिक जांच में पुलिस आत्महत्या की आशंका जता रही है, लेकिन फॉरेंसिक रिपोर्ट और पोस्टमार्टम से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जा रहा। मृतक मूल रूप से नेपाल का रहने वाला था। उसके पिता ने किसी पर आरोप नहीं लगाया है, जिससे मामला और भी संवेदनशील हो जाता है।
एक दिन, पांच शव: राजधानी की सुरक्षा पर उठते सवाल
एक ही दिन में सामने आई इन घटनाओं ने लखनऊ की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। हालांकि पुलिस का कहना है कि सभी मामले आपस में जुड़े नहीं हैं और हर केस की अलग-अलग जांच हो रही है, लेकिन आम नागरिकों में भय और असमंजस का माहौल है।
प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जांच निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से होगी। पोस्टमार्टम, फॉरेंसिक और डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। तब तक पुलिस संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा रही है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
पाठकों के सवाल | जवाब (FAQ)
क्या गोमती नदी में मिले शवों की पहचान हो गई है?
फिलहाल पहचान की प्रक्रिया जारी है। पोस्टमार्टम और पुलिस रिकॉर्ड के मिलान के बाद ही पुष्टि होगी।
क्या सरसों के खेत में मिला कंकाल पूनम का ही है?
कपड़ों की पहचान हुई है, लेकिन अंतिम पुष्टि डीएनए जांच रिपोर्ट आने के बाद ही संभव है।
बावर्ची की मौत को आत्महत्या क्यों माना जा रहा है?
प्रारंभिक साक्ष्यों में आत्महत्या की आशंका है, लेकिन फॉरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट निर्णायक होंगी।










