मानिकपुर थाना क्षेत्र के झरी फाटक के पास शनिवार को भदोही जिले से आए दो भाई संदेहास्पद परिस्थितियों में ढाई लाख रुपये की टप्पेबाजी का शिकार हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे और फोर्स के साथ आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। जांच के शुरुआती निष्कर्षों ने संकेत दिए कि यह घटना सीधे-सीधे लूट नहीं बल्कि सस्ते सोने के सौदे में धोखाधड़ी का मामला प्रतीत हो रहा है।
घटना ने पूरे इलाके में सनसनी मचा दी क्योंकि पुलिस को मौके से दोनों भाइयों के बैग में पीली धातु के कई छोटे-छोटे बिस्कुट मिले, जिनके असली होने की पुष्टि नहीं हो सकी। इतना ही नहीं, दोनों के पास से 20 हजार रुपये और मोबाइल फोन बरामद हुए, जबकि दोनों का दावा था कि बदमाशों ने 2.55 लाख रुपये छीनकर भाग गए। पुलिस को मामले में कई विरोधाभास मिलने शुरू हुए और पूरी कहानी संदिग्ध दिखाई देने लगी।
🔍 कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
भदोही के थाना कोहरना छेछुआ निवासी सत्यम ने पुलिस को बताया कि छह माह पूर्व यात्रा के दौरान उसकी मुलाकात मानिकपुर के एक युवक से हुई थी। बातचीत के दौरान उस युवक ने बताया था कि मजदूरी के दौरान खोदाई में सोने के बिस्कुट मिले हैं और वह उन्हें बेचना चाहता है। यह बात सत्यम के दिमाग में घर कर गई और उसने मौके की तलाश शुरू कर दी।
शनिवार को सत्यम अपने भाई विश्वजीत के साथ ट्रेन से मानिकपुर पहुंचा। झरी फाटक के पास वही युवक और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति उनसे मिला। बात-चीत के बाद छोटे-छोटे सोने के बिस्कुट उन्हें सौंपे गए और लगभग ढाई लाख रुपये में सौदा तय हुआ। दोनों भाई बिना जांच-परख के नकदी देने लगे और बिस्कुट बैग में रखकर जाने लगे। लेकिन जैसे ही वे आगे बढ़े, दो अज्ञात युवक अचानक 2.55 लाख रुपये लेकर फरार हो गए।
🚨 पुलिस कार्रवाई और शक की असली वजह
टप्पेबाजी की सूचना मिलते ही एसपी अरुण कुमार सिंह और थाना प्रभारी श्रीप्रकाश यादव मौके पर पहुंचे। घटनास्थल की बारीकी से जांच के दौरान पुलिस को दोनों भाइयों के बैग में पीली धातु के बिस्कुट, 20 हजार रुपये और दोनों के मोबाइल बरामद हुए। पूरी स्थिति लूट की नहीं, बल्कि एक असफल और धोखाधड़ी से भरे सस्ते सोने के सौदे की ओर इशारा कर रही थी।
एसपी अरुण कुमार सिंह के अनुसार, प्राथमिक पूछताछ में दोनों भाइयों ने माना कि वे सस्ता सोना खरीदने के लालच में यहां आए थे। आशंका है कि उन्होंने सोना बेचने वाले युवक को स्वेच्छा से पैसे दिए होंगे, और बाद में जब उन्हें शक हुआ कि बिस्कुट असली नहीं हैं, तब लूट की कहानी बनाई गई। हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है, साथ ही घटना में शामिल अन्य संदिग्धों की तलाश भी जारी है।
🧾 केस दर्ज — आगे क्या?
काफी देर तक पूछताछ के बाद दोनों भाइयों ने अंततः टप्पेबाजी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस अब सोना बेचने वाले और घटनास्थल पर दिखे अन्य युवकों की पहचान के प्रयास में जुटी है। सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल कॉल डिटेल चेक की जा रही है।
मामले ने एक बार फिर यह साबित किया है कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सस्ते सोने और खजाना मिलने का झांसा देकर ठगी का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। पुलिस ने भी लोगों से अपील की है कि ऐसे किसी भी लालच भरे प्रस्ताव पर विश्वास न करें, क्योंकि अधिकांश मामलों में इसके पीछे सोना गैंग या टप्पेबाज गिरोह सक्रिय रहते हैं।

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घटना वास्तव में लूट है या टप्पेबाजी?
पुलिस ने प्राथमिक जांच में इसे लूट नहीं बल्कि सस्ते सोने के सौदे में टप्पेबाजी का मामला बताया है।
क्या आरोपियों की पहचान हो गई है?
सीसीटीवी और मोबाइल डिटेल के आधार पर पुलिस संदिग्धों की तलाश कर रही है।
क्या सोने के बिस्कुट असली थे?
पुलिस को शक है कि बिस्कुट नकली हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
क्या दोनों भाइयों के पैसे वापस मिल पाएंगे?
पुलिस दावा कर रही है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही राशि की वापसी संभव हो पाएगी।
पुलिस ने जनता को क्या सलाह दी है?
लोग किसी भी सस्ते सोने या खजाना मिलने जैसी बातों में न फंसें, ऐसे मामलों में टप्पेबाज गिरोह सक्रिय रहते हैं।









