अब्दुल मोबीन सिद्दीकी की रिपोर्ट
बागपत (उत्तर प्रदेश): पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां शादीशुदा महिलाओं ने खुद को कुंआरी कन्या बताकर योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन कर डाले। जांच में सामने आया कि ऐसी 69 महिलाएं पहले से विवाहित हैं। इन सभी ने सरकार से मिलने वाले एक लाख रुपये के लालच में आवेदन किया था।
सरकारी रिकॉर्ड में जब इन आवेदनों की जांच हुई तो समाज कल्याण विभाग और राजस्व विभाग की टीमों के होश उड़ गए। अब जिला प्रशासन ने इन सभी फर्जी आवेदनों को रद्द करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।
👉 मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में 69 शादीशुदा महिलाओं का फर्जी आवेदन
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत बागपत जिले में कुल 593 युवतियों ने आवेदन किया था। लेकिन, जांच में खुलासा हुआ कि इनमें से 69 महिलाएं पहले से शादीशुदा हैं। योजना के तहत सरकार की ओर से हर नवविवाहित जोड़े को एक लाख रुपये की सहायता राशि मिलती है, जिसमें नकद और शादी का सामान शामिल होता है।
इन महिलाओं ने उसी राशि के लालच में फर्जी प्रमाणपत्र देकर खुद को कुंआरी दिखाया। जांच में यह भी पता चला कि कई महिलाओं की शादी हाल ही में यानी पिछले दो महीनों के अंदर ही हुई थी।
👉 बागपत शहर और बिनौली ब्लॉक से सबसे ज्यादा फर्जी आवेदन
अधिकारियों के अनुसार, फर्जीवाड़े के सबसे ज्यादा मामले बागपत शहर और बिनौली ब्लॉक से आए हैं। बागपत शहर से 16 आवेदन, बिनौली ब्लॉक से 12 आवेदन और छपरौली ब्लॉक से 10 आवेदन ऐसे पाए गए, जिनमें महिलाएं पहले से शादीशुदा थीं। इसके अलावा रमाला, खेकड़ा और पिलाना ब्लॉक में भी कुछ ऐसे ही मामले मिले हैं।
प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी फर्जी आवेदन निरस्त कर दिए हैं और संबंधित अभ्यर्थियों के खिलाफ जांच का आदेश दिया गया है।
👉 कैसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने सभी आवेदनों के सत्यापन का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद समाज कल्याण विभाग, राजस्व विभाग और विकास भवन की संयुक्त टीमों ने गांव-गांव जाकर जांच की। जब टीमों ने ग्राउंड पर जाकर सत्यापन किया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
कई महिलाओं ने स्वीकार किया कि उन्होंने हाल ही में शादी की है, जबकि कुछ ने खुद को अविवाहित बताते हुए झूठे दस्तावेज जमा किए थे।
👉 मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना क्या है?
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक कल्याणकारी योजना है, जिसके तहत गरीब परिवारों की बेटियों की शादी सरकार की मदद से कराई जाती है। योजना में सरकार पहले ₹51,000 की सहायता देती थी, जिसे अब बढ़ाकर ₹1,00,000 कर दिया गया है।
इस राशि में कुछ हिस्सा कैश और बाकी हिस्सा सामग्री के रूप में दिया जाता है, जैसे—कपड़े, बर्तन, गहने और अन्य गृह उपयोगी सामान।
👉 लालच में सरकारी सिस्टम को निशाना बना दिया
सरकारी जांच में सामने आया कि इन महिलाओं ने सरकारी सिस्टम को ठगने के लिए झूठे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। कई मामलों में परिवार के सदस्यों की मिलीभगत भी सामने आई है। अब अधिकारियों ने इन महिलाओं के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल सरकारी योजनाओं की साख को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि उन गरीब परिवारों का हक भी छीनती हैं जिन्हें वास्तव में मदद की जरूरत है।
👉 प्रशासन सख्त, सभी आवेदन रद्द
डीएम अस्मिता लाल ने कहा कि “जिन आवेदनों में गड़बड़ी पाई गई है, उन्हें तुरंत रद्द कर दिया गया है। ऐसी किसी भी महिला को योजना का लाभ नहीं मिलेगा जो पहले से शादीशुदा है।” उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए आवेदन प्रक्रिया को और सख्त बनाया जाए।
❓ क्लिक करें और जानें — सवाल-जवाब (FAQ)
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना क्या है?
यह योजना उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गरीब परिवारों की बेटियों की शादी के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से चलाई जाती है।
बागपत में कितनी महिलाओं ने फर्जी आवेदन किए?
जांच में 69 ऐसी महिलाएं मिलीं जो पहले से शादीशुदा थीं, लेकिन उन्होंने खुद को कुंआरी बताकर आवेदन किया।
इस योजना के तहत कितनी राशि दी जाती है?
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से ₹1,00,000 की सहायता राशि दी जाती है।
प्रशासन ने क्या कार्रवाई की?
सभी फर्जी आवेदनों को रद्द कर दिया गया है और संबंधित महिलाओं के खिलाफ जांच जारी है।
सबसे ज्यादा फर्जी आवेदन किन ब्लॉकों से आए?
सबसे ज्यादा फर्जी आवेदन बागपत शहर और बिनौली ब्लॉक से आए, जहां क्रमशः 16 और 12 महिलाएं शादीशुदा मिलीं।
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