समाचार सार : जिलाधिकारी ने गौरीबाजार विकास खण्ड का निरीक्षण करते हुए साफ-सफाई, कार्यालयीन अनुशासन, अभिलेखों की शुद्धता, जनसुनवाई, मनरेगा, एनआरएलएम और पंचायत स्तर की कार्यप्रणाली की बारीकी से जांच की। अधिकारियों को शासन के निर्देशों के अनुरूप पारदर्शी, समयबद्ध और जन-केन्द्रित कार्यशैली अपनाने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने गौरीबाजार विकास खण्ड का निरीक्षण करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था, कार्यालयीन अनुशासन और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन किया। देवरिया जनपद में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में यह निरीक्षण एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शनिवार अपराह्न 02:45 बजे जिलाधिकारी दिव्या मित्तल विकास खण्ड गौरीबाजार पहुंचीं, जहां उन्होंने न केवल कार्यालय परिसर का निरीक्षण किया बल्कि विभिन्न पटलों पर संधारित अभिलेखों और योजनागत दस्तावेजों की भी गहन जांच की।
निरीक्षण में रहे ये अधिकारी उपस्थित
निरीक्षण के दौरान जिला विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, खण्ड विकास अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी, लेखाकार सहित विकास खण्ड के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों की उपस्थिति में जिलाधिकारी ने कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया कि प्रशासनिक कार्यों में लापरवाही या औपचारिकता अब स्वीकार्य नहीं होगी।
साफ-सफाई और कार्यालयीन व्यवस्था पर विशेष जोर
जिलाधिकारी ने सर्वप्रथम विकास खण्ड परिसर का सघन निरीक्षण किया। उन्होंने साफ-सफाई, बैठने की व्यवस्था, फाइलों के रख-रखाव और आमजन के लिए उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान यह निर्देश दिए गए कि कार्यालय परिसर न केवल स्वच्छ दिखना चाहिए, बल्कि उसकी कार्यप्रणाली भी उतनी ही सुव्यवस्थित और नागरिक-अनुकूल होनी चाहिए।
अभिलेखों की जांच : जवाबदेही का असली पैमाना
निरीक्षण के अगले चरण में जिलाधिकारी ने विभिन्न कार्यालयीन पटलों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की। लेखाकार पटल पर टेंडर से संबंधित पत्रावलियों का परीक्षण किया गया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि सभी वित्तीय दस्तावेज पूर्ण, अद्यतन और नियमानुसार संधारित हों। स्थापना पटल पर रखी गई फाइलों और आलमारियों की विधिवत जांच करते हुए अभिलेखों की स्थिति का अवलोकन किया गया।
सेवापुस्तिकाएं और व्यक्तिगत पत्रावलियां भी जांच के दायरे में
जिलाधिकारी ने सेवारत कर्मचारियों की व्यक्तिगत पत्रावलियों और सेवापुस्तिकाओं का निरीक्षण करते हुए नामिनी प्रपत्रों की स्थिति भी देखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मचारी अभिलेखों में किसी भी प्रकार की त्रुटि न केवल प्रशासनिक परेशानी का कारण बनती है, बल्कि कर्मचारियों के हितों को भी प्रभावित करती है। इसलिए सभी अभिलेखों का समय-समय पर अद्यतन रहना अनिवार्य है।
जनसुनवाई और जनसूचना परखी गई कसौटी पर
कनिष्ठ सहायक से जनसुनवाई और जनसूचना से संबंधित शिकायतों के निस्तारण की स्थिति की जानकारी ली गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जनशिकायतों का निस्तारण केवल कागजी औपचारिकता न बनकर वास्तविक समाधान की दिशा में होना चाहिए। आमजन की शिकायतें शासन और प्रशासन के प्रति विश्वास की कसौटी होती हैं, इसलिए इनके प्रति संवेदनशीलता और तत्परता अनिवार्य है।
मनरेगा और एनआरएलएम की कार्यप्रणाली की समीक्षा
निरीक्षण के दौरान मनरेगा, एनआरएलएम तथा सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) से संबंधित अभिलेखों और कार्यों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने रोजगार सृजन, महिला समूहों की सक्रियता और पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाएं तभी सार्थक होंगी जब उनका लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचे।
पारदर्शिता और समयबद्धता पर सख्त निर्देश
जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को शासन के नवीनतम निर्देशों के अनुरूप योजनाओं का संचालन करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समयबद्धता, गुणवत्ता और पारदर्शिता प्रशासन की मूल जिम्मेदारी है। विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता सीधे जनता के विश्वास को कमजोर करती है।
आमजन की सहभागिता को बताया विकास की कुंजी
निरीक्षण के समापन पर जिलाधिकारी ने कहा कि विकास प्रक्रिया में आमजन की सहभागिता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। जब लोग योजनाओं से जुड़ते हैं और उनकी निगरानी में भागीदारी करते हैं, तभी विकास स्थायी और प्रभावी बनता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसंवाद को मजबूत किया जाए और योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचे।
कुल मिलाकर, जिलाधिकारी ने गौरीबाजार विकास खण्ड का निरीक्षण कर यह स्पष्ट कर दिया कि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता, अनुशासन और जवाबदेही से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यह निरीक्षण न केवल अधिकारियों के लिए मार्गदर्शक साबित होगा, बल्कि आमजन के लिए यह संदेश भी देगा कि शासन उनकी समस्याओं और अधिकारों के प्रति सजग है।





