Gonda News: गोंडा जिले से सामने आया यह मामला न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और स्कूलों में अनुशासन के नाम पर की जाने वाली कथित हिंसा को भी उजागर करता है। होमवर्क पूरा न होने की मामूली सी बात पर कक्षा दो के एक मासूम छात्र के साथ जिस तरह की कथित बर्बरता की गई, उसने अभिभावकों से लेकर प्रशासन तक को झकझोर कर रख दिया है। आरोप है कि शिक्षक ने बच्चे को गिनकर 105 डंडे मारे, जिससे उसके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, वहीं स्कूल प्रबंधन ने आरोपी शिक्षक को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है।
गोंडा के करनैलगंज क्षेत्र स्थित एक निजी स्कूल में होमवर्क न करने पर कक्षा दो के छात्र से कथित पिटाई का मामला सामने आया है। बच्चे को 105 डंडे मारे जाने का आरोप है। विरोध करने पहुंचे पिता को स्कूल से भगाने का भी आरोप लगा है। पुलिस जांच में जुटी है।
कक्षा में होमवर्क न दिखा पाने पर भड़के शिक्षक
Gonda News के अनुसार, यह घटना करनैलगंज थाना क्षेत्र के गुमदहा गांव स्थित एमआरजी पब्लिक स्कूल की बताई जा रही है। कक्षा दो में पढ़ने वाला लगभग दस वर्षीय छात्र रोज़ की तरह बुधवार सुबह स्कूल पहुंचा था। दिनचर्या के अनुसार लंच के बाद दोपहर करीब एक बजे सोशल साइंस की कक्षा शुरू हुई। इसी दौरान शिक्षक प्रखर सिंह कक्षा में आए और सभी बच्चों से होमवर्क दिखाने को कहा। जब वह पीड़ित बच्चे के पास पहुंचे तो उसका होमवर्क पूरा नहीं था। इसी बात पर शिक्षक कथित तौर पर आपा खो बैठे।
आरोप: गिनकर 105 डंडे, सहम गए कक्षा के बच्चे
आरोप है कि शिक्षक ने कक्षा के अंदर ही बच्चे की बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी। बच्चे के पैरों पर लगातार डंडे मारे गए और यह संख्या 105 तक बताई जा रही है। कक्षा में मौजूद अन्य बच्चे इस दृश्य को देखकर डर के मारे सहम गए। कोई भी बच्चा विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। मासूम दर्द से रोने लगा, लेकिन शिक्षक का गुस्सा शांत नहीं हुआ।
रोते बच्चे को बिस्किट देकर कराया शांत
सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि जब बच्चा असहनीय दर्द से रोने लगा, तब शिक्षक ने उसे बिस्किट देकर चुप कराने की कोशिश की। छुट्टी के बाद बच्चा किसी तरह खुद को संभालते हुए घर पहुंचा। उसके चेहरे और शरीर पर दर्द साफ झलक रहा था। जब पिता राज प्रसाद ने बच्चे की हालत देखी और उससे पूरी बात सुनी, तो परिवार के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
शरीर पर गहरे निशान, पिता पहुंचे स्कूल
परिजनों के अनुसार, बच्चे के पैरों और शरीर पर डंडों के गहरे निशान थे। पिता उसे तुरंत इलाज के लिए ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद शाम करीब साढ़े चार बजे वह शिकायत लेकर स्कूल पहुंचे। लेकिन आरोप है कि स्कूल प्रबंधन या स्टाफ ने उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें डांटकर वहां से भगा दिया। एक पिता के लिए यह अपमान और पीड़ा असहनीय थी।
थाने में दर्ज हुई एफआईआर, शुरू हुई जांच
निराश होकर पिता रात में बच्चे को लेकर थाने पहुंचे और आरोपी शिक्षक के खिलाफ लिखित शिकायत दी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एफआईआर दर्ज कर ली है। बच्चे का मेडिकल परीक्षण भी कराया गया है, ताकि चोटों की पुष्टि की जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्कूल प्रबंधन की कार्रवाई, शिक्षक निकाला गया
मामला सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन ने भी तत्काल कदम उठाया है। स्कूल के प्रिंसिपल ने बताया कि आरोपी शिक्षक को नौकरी से निकाल दिया गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि बच्चे के साथ जो हुआ, वह गलत है और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए सभी शिक्षकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
शिक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या आज भी कुछ स्कूलों में अनुशासन के नाम पर शारीरिक दंड को सही माना जा रहा है। कक्षा दो जैसे नन्हे बच्चों पर इस तरह की कथित हिंसा न सिर्फ कानूनन अपराध है, बल्कि मानसिक रूप से भी बच्चों पर गहरा असर डाल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि डर के माहौल में शिक्षा का उद्देश्य कभी पूरा नहीं हो सकता।
कानून क्या कहता है
भारतीय कानून और शिक्षा से जुड़े नियम स्पष्ट रूप से बच्चों के साथ शारीरिक दंड पर रोक लगाते हैं। स्कूलों में बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त दिशा-निर्देश मौजूद हैं। इसके बावजूद इस तरह के मामले सामने आना चिंता का विषय है। पुलिस का कहना है कि मामले में सभी कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पूरा मामला पुलिस जांच के अधीन है। बच्चे का इलाज जारी है और परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। यह घटना न सिर्फ एक परिवार की पीड़ा की कहानी है, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी भी है कि शिक्षा का रास्ता डर और डंडे से नहीं, बल्कि समझ और संवेदना से होकर गुजरता है।






