
बिजली चोरी की 6526 FIR—यह महज़ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासनिक इच्छाशक्ति, तकनीकी सुधार और सख़्त निगरानी का ठोस प्रमाण है। इसी अभियान के चलते बिजली विभाग को 181 करोड़ रुपए का सीधा फायदा हुआ है और वर्षों से जकड़े लाइन लॉस पर प्रभावी लगाम लगी है। संभल में बिजली चोरी के खिलाफ चला यह अभियान अब प्रदेश के लिए एक व्यावहारिक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
जिला कलेक्ट्रेट में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिलाधिकारी राजेंद्र पैंसिया और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बिजली चोरी की 6526 FIR से जुड़े विस्तृत आंकड़े साझा करते हुए स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल दंडात्मक नहीं, बल्कि व्यवस्था सुधार की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। प्रशासन, पीएसी और बिजली विभाग के संयुक्त प्रयासों से न केवल अवैध कनेक्शन पकड़े गए, बल्कि राजस्व संग्रह, नेटवर्क स्थिरता और उपभोक्ता विश्वास—तीनों को मजबूती मिली।
बिजली चोरी की 6526 FIR: दिन-रात चला सघन अभियान
संभल जिले में बिजली चोरी के खिलाफ अभियान लगातार एक्टिव मोड में रहा। दिन-रात चली छापेमारी, लक्षित जांच और फील्ड-लेवल निगरानी के परिणामस्वरूप बिजली चोरी की 6526 FIR दर्ज की गईं। यह संख्या बताती है कि चोरी का नेटवर्क कितना व्यापक था और उसे तोड़ने के लिए कितनी सघन कार्रवाई की जरूरत पड़ी।
अधिकारियों के अनुसार, अभियान का उद्देश्य भय पैदा करना नहीं, बल्कि नियमों के पालन की संस्कृति विकसित करना है। इसलिए हर कार्रवाई के साथ वैध कनेक्शन, बकाया निपटान और तकनीकी समाधान की जानकारी भी दी गई, ताकि उपभोक्ता वैधानिक व्यवस्था से जुड़ें।
181 करोड़ रुपए का फायदा: राजस्व में ऐतिहासिक उछाल
इस व्यापक कार्रवाई का सबसे ठोस परिणाम विभाग को 181 करोड़ रुपए का फायदा के रूप में सामने आया। यह राशि न केवल बकाया वसूली और जुर्माने से आई, बल्कि वैध कनेक्शनों के विस्तार और चोरी रुकने से नियमित बिलिंग में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ।
प्रशासन का मानना है कि यह राजस्व बिजली ढांचे के सुदृढ़ीकरण, ट्रांसफॉर्मर अपग्रेडेशन और स्मार्ट ग्रिड विस्तार में लगाया जाएगा, जिससे आगे चलकर आपूर्ति और गुणवत्ता—दोनों बेहतर होंगी।
स्मार्ट मीटर और आर्मर्ड केबल: तकनीक से कसा शिकंजा
बिजली चोरी की 6526 FIR तक पहुंचने में तकनीक की भूमिका निर्णायक रही। जिले में बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर लगाए गए, जिससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव हुई। इसके साथ ही संवेदनशील इलाकों में आर्मर्ड केबल का इस्तेमाल किया गया, जिससे अवैध टैपिंग लगभग समाप्त हो गई।
तकनीकी उपायों का सीधा असर लाइन लॉस पर पड़ा और वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी बनी। उपभोक्ताओं को भी अपनी खपत पर नियंत्रण और बिलिंग में स्पष्टता का लाभ मिला।
प्रभावशाली ठिकानों पर कार्रवाई: बिना भेदभाव सख़्ती
अभियान की विश्वसनीयता तब और बढ़ी जब यह सामने आया कि कार्रवाई में किसी तरह का भेदभाव नहीं किया गया। जांच में पाया गया कि प्रभावशाली व्यक्तियों, मस्जिदों और मदरसों में भी अवैध बिजली उपयोग हो रहा था। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कानून सबके लिए समान है और नियम तोड़ने पर कार्रवाई अवश्य होगी।
इस कदम ने सामाजिक संदेश भी दिया कि सार्वजनिक संसाधनों की चोरी किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है।
प्रशासनिक सुधार: तबादले और सेवा समाप्ति
व्यवस्था सुधार के तहत संभल टाउन से सभी सहायक अभियंताओं और जेई का तबादला किया गया। इसके अलावा बिजली चोरी में लिप्त पाए गए 11 संविदा कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। यह कदम इसलिए जरूरी था ताकि अंदरूनी मिलीभगत की संभावनाओं पर रोक लगे।
अधिकारियों का मानना है कि जब तक सिस्टम के भीतर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक बाहरी कार्रवाई स्थायी परिणाम नहीं दे सकती।
लाइन लॉस में बड़ी गिरावट: आंकड़ों में सुधार
बिजली चोरी की 6526 FIR का सीधा असर लाइन लॉस पर दिखाई दिया। जिले में कुल लाइन लॉस 40 प्रतिशत से घटकर 27 प्रतिशत रह गया है। शहरी क्षेत्रों में यह गिरावट और भी अहम है, जहां लाइन लॉस 60 प्रतिशत से घटकर 30 प्रतिशत पर आ गया।
गुन्नौर और कैथल गेट जैसे 50 प्रतिशत से अधिक लाइन लॉस वाले इलाकों में प्रशासन, पीएसी और स्थानीय पुलिस के साथ सघन अभियान लगातार जारी है।
12 महीनों की उपलब्धि: ट्रांसफॉर्मर नहीं फूंका
अभियान की एक बड़ी उपलब्धि यह भी रही कि पिछले 12 महीनों में 100 केवीए या उससे अधिक का एक भी ट्रांसफॉर्मर नहीं फूंका। यह नेटवर्क स्थिरता, बेहतर लोड प्रबंधन और चोरी पर नियंत्रण का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
सितंबर 2024 से जारी मुहिम: संभल बना मॉडल
बिजली चोरी के खिलाफ यह मुहिम सितंबर 2024 में शुरू की गई थी। निरंतर कार्रवाई, तकनीकी सुधार और प्रशासनिक निगरानी के चलते आज संभल प्रदेश के लिए मॉडल जिला बनकर उभरा है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में अभियान और तेज किया जाएगा।
निष्कर्ष: राजस्व, व्यवस्था और भरोसे की जीत
बिजली चोरी की 6526 FIR और विभाग को 181 करोड़ रुपए का फायदा—ये दोनों तथ्य बताते हैं कि सख़्ती, तकनीक और पारदर्शिता साथ आएं तो परिणाम टिकाऊ होते हैं। संभल का यह अनुभव अन्य जिलों के लिए भी स्पष्ट संदेश है कि बिजली चोरी पर नियंत्रण केवल राजस्व का सवाल नहीं, बल्कि न्यायसंगत और भरोसेमंद व्यवस्था की बुनियाद है।
पाठकों के सवाल | FAQ
बिजली चोरी की 6526 FIR किस अवधि में दर्ज हुईं?
ये एफआईआर सितंबर 2024 से शुरू हुए सघन अभियान के दौरान दर्ज की गईं।
181 करोड़ रुपए का फायदा कैसे हुआ?
बकाया वसूली, जुर्माने, वैध कनेक्शन और चोरी रुकने से नियमित बिलिंग बढ़ने के कारण।
लाइन लॉस में कितनी कमी आई?
कुल लाइन लॉस 40% से घटकर 27% और शहरी क्षेत्रों में 60% से घटकर 30% रह गया।
क्या यह मॉडल अन्य जिलों में लागू किया जा सकता है?
हां, प्रशासनिक सख़्ती, तकनीक और निगरानी के संयोजन से यह मॉडल अन्य जिलों में भी प्रभावी हो सकता है।

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