दिव्यांग बाबा धर्मशरण बृजवासी के नेतृत्व में तीर्थराज विमल कुंड पर महा पंचायत, कामां को ‘कामवन’ बनाने की उठी जोरदार मांग

✍️ हिमांशु मोदी की रिपोर्ट
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तीर्थराज विमल कुंड स्थित अखाड़ा परिसर में दिव्यांग संत धर्मशरण बृजवासी बाबा की अध्यक्षता में विशाल महापंचायत का आयोजन, जिसमें गौ संरक्षण, गो तस्करी रोकथाम, कामां का नाम परिवर्तित कर कामवन करने, चारागाह भूमि अतिक्रमण मुक्त अभियान और शराब-मांस की दुकानों पर प्रतिबंध जैसे प्रस्ताव पारित किए गए।

डीग। कामां कस्बे के पवित्र तीर्थराज विमल कुंड पर शुक्रवार दोपहर एक ऐतिहासिक और भव्य महापंचायत का आयोजन किया गया, जिसने पूरे ब्रज क्षेत्र में नई चेतना जागृत कर दी। सूरज घाट स्थित राधा मुरली मनोहर मंदिर के महंत एवं ब्रजवासी शक्ति अखाड़ा के गौ रक्षा प्रमुख दिव्यांग संत धर्मशरण बृजवासी बाबा के नेतृत्व में आयोजित इस महापंचायत में हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए हजारों गौ रक्षकों, गौ सेवकों तथा हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। परिसर में जय गौ माता – जय श्री राधे के जयघोष घंटों तक गूंजते रहे, जिससे पूरे क्षेत्र में धर्म और संस्कृति की अलौकिक आभा फैल गई।

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महापंचायत के दौरान सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव कामां कस्बे का नाम बदलकर एक बार फिर “कामवन” करने का रहा, जिसे उपस्थित सभी संतों और गौ भक्तों ने सर्वसम्मति से समर्थन दिया। वक्ताओं का कहना था कि कामां कोई साधारण भूमि नहीं है, बल्कि यह ब्रजधाम के प्राचीन बारह वनों में से प्रमुख वन “कामवन” का धाम है, इसलिए इसके प्राचीन और धार्मिक नाम की पुनर्स्थापना अनिवार्य है।

महापंचायत में गौ-वध, गो तस्करी और भू-माफियाओं के बढ़ते प्रभाव पर गंभीर चिंता जताई गई। फरीदाबाद के भगवा गौ रक्षा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकास चौहान और अन्य वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि —
“राजनीतिक दल चुनाव आते ही गौ माता को याद करते हैं, लेकिन सत्ता मिलने के बाद संरक्षण और संवर्धन के सभी वादे भूल जाते हैं। अब गौ माता के मुद्दों पर सरकार के भरोसे नहीं बैठा जा सकता।”

वक्ताओं ने चारागाह और गोचारण भूमि पर बढ़ते कब्जे को ब्रज क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए इसे अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए सामूहिक अभियान चलाने का प्रस्ताव रखा। साथ ही गोकशी पर प्रभावी कार्रवाई, शराब और मांस की दुकानों पर पूर्ण प्रतिबंध, ब्रज यात्रियों के लिए सुलभ शौचालय निर्माण तथा बेसहारा गौवंश के लिए स्थायी आश्रय स्थल स्थापित करने की भी जोरदार मांग उठी।

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महापंचायत में हरि बोल दास बाबा, माधव दास महाराज, पवन दास महाराज, भूरा बाबा, जमुना गिरी महाराज, विजय मिश्रा, गजराज हवलदार, संजय भारती, घनश्याम पांचाल, सुरेंद्र जंगम, कैलाश सोनी, रामेश्वर गुर्जर समेत अनेक संतों और प्रमुख कार्यकर्ताओं ने समर्थन व्यक्त किया।
हरियाणा के होडल–पलवल, जुरहरा, डीग जिले के ग्रामों और उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए गोरक्षकों तथा बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने आयोजन को विराट स्वरूप दिया।

अखाड़ा के पहलवानों, सामाजिक संगठनों, जीव सेवा समितियों, डॉक्टरों, युवा स्वयंसेवकों और क्षेत्रीय जनता ने सेवा और प्रबंधन में उल्लेखनीय योगदान दिया। श्रद्धालुओं का उत्साह इतना अधिक था कि शाम होने के बाद भी विमल कुंड परिसर देर रात तक धार्मिक नारे और भक्ति धुनों से गूंजता रहा।

महापंचायत के अंत में दिव्यांग संत धर्मशरण बृजवासी बाबा ने कहा कि ब्रज और गौ माता दोनों एक-दूसरे की आत्मा हैं। जब तक गौ रक्षा और ब्रज संस्कृति सुरक्षित नहीं होगी, तब तक सनातन की नींव मजबूत नहीं हो सकती। उन्होंने सभी गौ भक्तों से एकजुट होकर धर्म और संरक्षण के संकल्प को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

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महा पंचायत का मुख्य उद्देश्य क्या था?

कामां का नाम बदलकर ‘कामवन’ करना, गौ माता के संरक्षण और संवर्धन की ठोस व्यवस्था करना और ब्रज संस्कृति की रक्षा के लिए संगठित रणनीति बनाना।

कौन–कौन से प्रमुख प्रस्ताव पारित हुए?

गो तस्करी पर कठोर कार्रवाई, चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना, शराब और मांस की दुकानों पर प्रतिबंध, बेसहारा गौवंश के लिए आश्रय स्थल और ब्रज यात्रियों के लिए शौचालय निर्माण।

महा पंचायत में किन राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए?

राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के सभी जिलों से हजारों गौ रक्षक, संत और हिंदू संगठन के कार्यकर्ता शामिल हुए।


🚩 जय गौ माता – जय श्री राधे 🚩

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