फर्जी ‘एडिशनल सीएमओ’ बनकर क्लिनिक में धन उगाही का आरोप — पाली क्लिनिक पर शिकायत


📰 कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

· रिपोर्ट: स्थानीय संवाददाता

उन्नाव जिले के मौरामा क्षेत्र स्थित पाँच-बेड के पाली क्लिनिक (मौरामा) के संचालक डॉक्टर अशोक कुमार वर्मा और कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि 03/11/2025 को एक व्यक्ति ने खुद को “एडिशनल सीएमओ / असिस्टेंट डायरेक्टर” बताकर क्लिनिक का निरीक्षण किया और पैसा लेने की कोशिश की। पीड़ितों के मुताबिक आरोपी का नाम एल एन त्रिपाठी (उर्फ लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी) बताया जा रहा है और उसके साथ कुछ सहयोगी भी थे।

पीड़ित कर्मचारियों का कहना है कि आरोपियों ने क्लिनिक के CCTV बंद कराए, कर्मचारियों से अभद्र व्यवहार किया और अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए रुपए 1,00,000 (एक लाख) की मांग की। जब क्लिनिक पर मुख्य डॉक्टर उपस्थित नहीं थे तब कर्मचारियों ने डर-धमकी में आकर तत्काल रुपए 7,000 दे दिए और आरोपियों को भेजा। बाद में, डॉक्टर अशोक कुमार वर्मा को फोन द्वारा बताया गया कि यदि अतिरिक्त रकम नहीं दी गई तो क्लिनिक को बंद करवा दिया जाएगा और रुपए 1,50,000 की मांग भी की जा रही है — यह भी आरोपों में शामिल है।

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पीड़ितों ने यह भी बताया कि आरोपी ने खुद को मीडिया प्रभारी बता कर डिप्टी सीएम का नाम लेकर धमकी दी और कहा कि यदि रिश्वत न मिली तो अस्पताल सील करवा देंगे। डॉक्टर अशोक कुमार वर्मा ने मामले की शिकायत उन्नाव के सीएमओ से की थी; सीएमओ कार्यालय ने उस नाम के व्यक्ति को फर्जी बताया, ऐसा पीड़ितों का दावा है।

इसके बाद पीड़ितों ने 06/11/2025 को मौरामा थाना पहुँकर लिखित शिकायत देने का प्रयास किया, लेकिन थाना प्रभारी से मिलने की अनुमति न मिलने की बात पीड़ितों ने कही। थाने में एक घंटे तक प्रतीक्षा के बाद पीड़ित वापस लौट आए — उनका कहना है कि पुलिस प्रबंधन उनकी सुनवाई नहीं कर रहा है।

पीड़ितों की ओर से स्थानीय प्रशासन और योगी आदित्यनाथ सरकार से मांग की गई है कि ऐसे फर्जी अधिकारियों द्वारा की जा रही धन उगाही व धमकियों पर तत्त्काल कार्यवाही की जाए ताकि चिकित्सकीय पेशे का अपमान और ईमानदार डॉक्टरों पर सवाल न उठे।

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घटना के प्रमुख बिंदु (संक्षेप)

  • तारीख: 03/11/2025 — कथित निरीक्षण व धन उगाही का प्रयास।
  • प्रारंभिक रकम: ₹7,000 — कर्मचारियों ने तत्काल दे दिया।
  • मांग: ₹1,00,000 से लेकर ₹1,50,000 तक की रकम देने की धमकी।
  • शिकायत: 06/11/2025 को लिखित शिकायत के लिए थाना पहुँचे — पुलिस से मिलने में असमर्थता।
  • आरोपियों का नाम: स्थानीय कथन के अनुसार एल एन त्रिपाठी (लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी)

क्या कहा पीड़ितों ने

डॉक्टर अशोक कुमार वर्मा और क्लिनिक कर्मचारी कहते हैं कि उन्होंने तुरंत प्रशासन और पुलिस को सूचित करने की कोशिश की, पर थाने में सुनवाई न होने के कारण उन्हें असंतोष हुआ। उनका कहना है कि अगर प्रशासन त्वरित कार्रवाई नहीं करेगा तो छोटे प्राइवेट क्लिनिकों का कामकाज प्रभावित होगा और स्थानीय जनता को स्वास्थ्य सेवाओं का नुकसान उठाना पड़ेगा।

स्थानीय प्रशासन से क्या अपेक्षा

पीड़ितों की मांग है कि:

  • तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की जाए।
  • क्लिनिक पर दबाव डालने वाले किसी भी फर्जी अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
  • हॉस्पिटलों के कर्मचारियों की सुरक्षा और क्लिनिक संचालन की गारंटी दी जाए।

संपर्क

रिपोर्ट के समय पीड़ितों ने स्थानीय मीडिया और पुलिस को सूचित करने का आग्रह किया है। घटना से जुड़े और दस्तावेज (लिखित शिकायत, सीसीटीवी रिकॉर्ड इत्यादि) जांच हेतु आवश्यक बताये जा रहे हैं — यदि प्रशासन इन सबका सत्यापन करेगा तो मामले की वास्तविकता साफ हो सकेगी।

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सवाल-जवाब (क्लिक करें — उत्तर खुलेगा)

क्या यह आरोप सत्यापित हो चुके हैं?
वर्तमान रिपोर्ट पीड़ितों के दावे पर आधारित है। प्रशासनिक या पुलिस स्तर पर आधिकारिक पुष्टि/प्रवक्ता बयान उपलब्ध होने पर ही आरोपों को सत्यापित माना जा सकता है। लेख में प्रयुक्त भाषा ‘आरोप/दावा’ के रूप में रखी गई है।
पीड़ितों ने क्या लिखित शिकायत दी है?
पीड़ितों ने 06/11/2025 को मौरामा थाना में लिखित शिकायत देने का प्रयास किया, परन्तु थाने में मिलने की अनुमति न मिलने की बात कही गई — इसलिए वैध कागजी कार्रवाई और थाने में प्राथमिकी दर्ज होने के बारे में आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
यदि मैं इस मामले की आगे की जानकारी चाहता/चाहती हूँ तो क्या करूँ?
स्थानीय प्रशासन (थाना/सीएमओ कार्यालय) से संपर्क करें और पूछताछ के दौरान लिखित रिकॉर्ड की मांग करें। साथ ही क्लिनिक प्रबंधक/डॉक्टर से संपर्क कर किसी भी उपलब्ध दस्तावेज़ (शिकायत की copy, CCTV फुटेज, फोन रिकार्डिंग) की मांग करें। आप स्थानीय समाचार मीडिया से भी आधिकारिक बयान की प्रतिलिपि माँग सकते हैं।



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