📰 संजय कुमार वर्मा की रिपोर्ट
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण का प्रचार थमने से पहले राज्य की राजनीति एक बार फिर सर्वे के आंकड़ों से गरम हो गई है। तीन प्रमुख एजेंसियां— आईएएनएस-मैटराइज, पोलस्ट्रैट और चाणक्य —ने अपने ओपिनियन पोल जारी किए हैं, जिनमें एनडीए को स्पष्ट बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। इन सर्वे रिपोर्टों ने बिहार के चुनावी माहौल को और भी दिलचस्प बना दिया है।
बिहार का मतदाता बदलाव नहीं, स्थिरता के पक्ष में
तीनों ओपिनियन पोल यह संकेत दे रहे हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मतदाता किसी प्रयोग के मूड में नहीं हैं। जनता अभी भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की स्थिरता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को एक भरोसेमंद विकल्प मान रही है। वहीं, विपक्ष के पास बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और पलायन जैसे बड़े मुद्दे तो हैं, लेकिन संगठनात्मक एकजुटता की कमी उसे कमजोर बना रही है।
तीनों सर्वे में एनडीए की बढ़त — आंकड़ों पर नजर
| सर्वे एजेंसी | एनडीए सीटें | महागठबंधन सीटें | अन्य |
| आईएएनएस-मैटराइज | 153-164 | 76-87 | 2-9 |
| पोलस्ट्रैट | 133-143 | 93-102 | 2-6 |
| चाणक्य | 128-134 | 102-108 | 5-9 |
तीनों सर्वे एजेंसियों का औसत देखें तो एनडीए को लगभग 138 से 147 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि महागठबंधन को 90 से 100 सीटों तक सीमित बताया गया है। यानी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की स्थिति अभी भी मजबूत है।
मोदी फैक्टर और नीतीश कुमार की साख का असर
आईएएनएस सर्वे के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता अब भी निर्णायक भूमिका निभा रही है। 63% मतदाताओं ने माना कि मोदी फैक्टर इस चुनाव में असर डाल सकता है। वहीं, नीतीश कुमार अब भी मुख्यमंत्री पद की पहली पसंद बने हुए हैं—46% लोगों ने उन्हें अपनी पसंद बताया।
दिलचस्प यह है कि नीतीश कुमार के शासन को 73% जनता ने “लालू काल” से बेहतर बताया है। यह बताता है कि दो दशकों के शासन के बाद भी नीतीश की व्यक्तिगत साख और प्रशासनिक स्थिरता पर जनता का भरोसा कायम है।
महागठबंधन की चुनौती — बेरोजगारी और युवा वोट
हालांकि एनडीए को बढ़त मिल रही है, पर महागठबंधन के पास भी ठोस वोट बैंक है। पोलस्ट्रैट सर्वे के अनुसार, 18 से 25 वर्ष के युवा मतदाता बेरोजगारी के मुद्दे पर महागठबंधन की ओर झुक रहे हैं। लगभग 38% युवाओं ने बेरोजगारी को सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बताया।
तेजस्वी यादव का “हर घर नौकरी” वादा इस वर्ग में असर दिखा रहा है। शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में महागठबंधन की पकड़ बनी हुई है, हालांकि ग्रामीण वोटरों में एनडीए की बढ़त अब भी साफ दिखाई देती है।
जनसुराज और AIMIM की सीमित लेकिन खास उपस्थिति
प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी और एआईएमआईएम भी इस चुनाव में चर्चा में हैं। पोलस्ट्रैट के अनुसार, जनसुराज 1-3 सीटें और AIMIM 2-3 सीटें जीत सकती हैं। सीमांचल क्षेत्र में एआईएमआईएम का प्रभाव अब भी मजबूत है। यह बताता है कि तीसरे मोर्चे की तलाश खत्म नहीं हुई है।
सामाजिक समीकरण और वोट प्रतिशत का गणित
पोलस्ट्रैट सर्वे के मुताबिक, एनडीए को लगभग 44.8% वोट और महागठबंधन को 38.6% वोट मिलने का अनुमान है। लगभग 6 प्रतिशत का यह अंतर सत्ता की कुर्सी तय कर सकता है।
41 से 59 वर्ष के मतदाता वर्ग में एनडीए को मजबूत समर्थन मिल रहा है, जबकि महागठबंधन की पकड़ युवाओं और अल्पसंख्यकों में बनी हुई है। यह बताता है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जातीय, सामाजिक और भावनात्मक समीकरणों से गहराई से जुड़ा हुआ है।
जनता की सोच — ठहराव है, लेकिन बदलाव की चाह सीमित
सर्वे यह दर्शाते हैं कि जनता नीतीश कुमार से नाराज नहीं है, लेकिन कुछ हद तक ठहराव महसूस कर रही है। 46% लोगों ने नीतीश को पसंद किया, जो किसी भी लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री के लिए बड़ी उपलब्धि है।
हालांकि विपक्ष के लिए संदेश साफ है—अगर वे एक भरोसेमंद विकल्प पेश करें तो लगभग 50% वोट अभी भी “परिवर्तन” के मूड में आ सकते हैं।
क्या यह बढ़त निर्णायक है?
तीनों ओपिनियन पोल यह स्पष्ट करते हैं कि इस समय बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कोई सत्ता-विरोधी लहर नहीं है। इसके बजाय एनडीए के पक्ष में एक “साइलेंट सपोर्ट वेव” दिखाई दे रही है। मोदी फैक्टर, नीतीश कुमार की साख और संगठन की मजबूती ने एनडीए को बढ़त दिलाई है।
हालांकि, बिहार की राजनीति सिर्फ आंकड़ों पर नहीं, बल्कि भावनाओं, जातीय समीकरणों और स्थानीय नाराजगियों पर भी निर्भर करती है। इसलिए पहले चरण के मतदान से पहले सर्वे का ट्रेंड भले एनडीए के पक्ष में हो, लेकिन अंतिम फैसला जनता के हाथ में ही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में किस पार्टी को बढ़त दिख रही है?
तीनों प्रमुख सर्वे—आईएएनएस-मैटराइज, पोलस्ट्रैट और चाणक्य—में एनडीए को बढ़त दिखाई गई है। औसतन एनडीए 140 सीटों के आसपास मजबूत स्थिति में है।
मोदी फैक्टर इस चुनाव में कितना असरदार रहेगा?
आईएएनएस सर्वे के अनुसार, 63% मतदाताओं ने माना कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
महागठबंधन की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
महागठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती युवा बेरोजगारी और संगठनात्मक एकजुटता की कमी है। हालांकि शहरी इलाकों में उनकी पकड़ अब भी मजबूत है।
क्या बिहार में सत्ता परिवर्तन संभव है?
तीनों सर्वे के अनुसार, फिलहाल सत्ता परिवर्तन की संभावना कम है। मतदाता नीतीश कुमार और एनडीए को ही स्थिर विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
