सीतापुर मल्लापुर गांव विकास से वंचित—यह वाक्य आज मल्लापुर ग्राम पंचायत के लोगों की सामूहिक पीड़ा और हकीकत को बयां करता है। सीतापुर जिले के हरगांव विकासखंड अंतर्गत आने वाला यह गांव बुनियादी सुविधाओं के अभाव में धीरे-धीरे उपेक्षा का प्रतीक बनता जा रहा है। गांव की सड़कों की हालत, टूटी नालियां और ठप पड़ी सफाई व्यवस्था न केवल प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण जीवन को असहनीय भी बना रही हैं।
बीस साल पुराने खड़ंजे, आज भी वही बदहाली
मल्लापुर गांव में मौजूद खड़ंजे लगभग बीस वर्ष पुराने बताए जा रहे हैं। समय के साथ इन खड़ंजों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि कई स्थानों पर ईंटें उखड़ गई हैं और रास्ते गड्ढों में तब्दील हो गए हैं। बरसात के मौसम में यही रास्ते कीचड़ से भर जाते हैं, जबकि गर्मियों में उड़ती धूल ग्रामीणों के लिए नई परेशानी खड़ी कर देती है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को इन रास्तों से गुजरना किसी जोखिम से कम नहीं है।
टूटी नालियां और बहता गंदा पानी
गांव की नालियों की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। कई नालियां टूट चुकी हैं और कुछ पूरी तरह जाम हैं। परिणामस्वरूप, गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है, जिससे पूरे मोहल्ले में बदबू और गंदगी फैल जाती है। यह स्थिति केवल असुविधा तक सीमित नहीं, बल्कि संक्रामक बीमारियों को भी न्योता दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद नालियों की मरम्मत नहीं कराई गई।
सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई
मल्लापुर ग्राम पंचायत में सफाईकर्मियों की अनियमितता अब आम बात हो चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार, सफाईकर्मी हफ्तों तक गांव का रुख नहीं करते। नतीजतन, कूड़े-कचरे के ढेर सड़कों और गलियों में जमा रहते हैं। स्वच्छ भारत अभियान के दावे यहां खोखले नजर आते हैं। गांव के लोग खुद ही झाड़ू लगाकर या पानी बहाकर किसी तरह हालात संभालने की कोशिश करते हैं।
समाधान दिवस में उठी थी आवाज
ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए लहरपुर तहसील में आयोजित समाधान दिवस का सहारा लिया। पिछली बार जब जिलाधिकारी राजा गणपत आर समाधान दिवस में पहुंचे थे, तब मल्लापुर के कई ग्रामीणों ने खुलकर सड़क, नाली और सफाई से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराई थीं। जिलाधिकारी ने मौके पर ही हरगांव के खंड विकास अधिकारी को गांव का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
बीडीओ के निर्देश, लेकिन अमल नदारद
जिलाधिकारी के निर्देशों के बाद हरगांव के बीडीओ द्वारा आदेश जारी किए गए कि सफाईकर्मी हर सप्ताह मल्लापुर में नियमित रूप से सफाई करेंगे और कुछ क्षतिग्रस्त नालियों का निर्माण कराया जाएगा। हालांकि, जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ दिनों तक हलचल जरूर दिखी, लेकिन जल्द ही हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौट आए।
ग्राम प्रधान पर सौतेले व्यवहार का आरोप
मल्लापुर के ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान लल्लू राम पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में भेदभाव किया जा रहा है और मल्लापुर को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। कई लोगों का आरोप है कि शिकायत करने पर उन्हें टालमटोल भरे जवाब मिलते हैं, जबकि वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता।
स्वास्थ्य और शिक्षा पर भी असर
गांव की बदहाल बुनियादी सुविधाओं का असर केवल रोजमर्रा की जिंदगी तक सीमित नहीं है। गंदगी और जलजमाव के कारण बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियां बढ़ रही हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों को खराब रास्तों से गुजरना पड़ता है, जिससे उनकी सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं। कई अभिभावकों का कहना है कि बारिश के दिनों में बच्चे स्कूल जाने से कतराते हैं।
फिर समाधान दिवस की तैयारी
अब एक बार फिर मल्लापुर ग्राम पंचायत के लोग 7 फरवरी को लहरपुर तहसील में आयोजित होने वाले समाधान दिवस में अपनी शिकायतें रखने की तैयारी कर रहे हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार प्रशासन उनकी बातों को गंभीरता से सुनेगा और केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई भी देखने को मिलेगी।
ग्रामीणों की मांग—कागज नहीं, काम दिखे
ग्रामीणों का साफ कहना है कि उन्हें अब नए वादे नहीं चाहिए। वे चाहते हैं कि गांव में सड़कों की मरम्मत हो, नालियों का निर्माण कराया जाए और सफाई व्यवस्था नियमित रूप से संचालित की जाए। मल्लापुर के लोग मानते हैं कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो गांव की स्थिति और भी बदतर हो सकती है।






