मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत एक मंडप में 122 जोड़ों का ऐतिहासिक विवाह सम्पन्न

देवरिया के सलेमपुर में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत एक ही मंडप में 122 जोड़ों का विवाह, मंच पर अतिथि और विवाह सामग्री के साथ नवविवाहित जोड़े

✍️इरफान अली लारी की रिपोर्ट
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समाचार सार:उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत देवरिया जिले के सलेमपुर में 122 जोड़ों का विवाह एक ही मंडप में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम सामाजिक सौहार्द, आर्थिक सहयोग और सरकारी योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में एक भव्य और
सामाजिक समरसता से परिपूर्ण आयोजन देखने को मिला, जहाँ सलेमपुर के महदहा स्थित मैरेज लॉन में
समाज कल्याण विभाग द्वारा एक ही मंडप में 122 जोड़ों का विवाह विधि-विधान के साथ सम्पन्न कराया गया।
यह आयोजन केवल वैवाहिक रस्मों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और
राज्य सरकार की जनकल्याणकारी सोच का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।

एक मंडप, अनेक परंपराएँ—सामाजिक सौहार्द की जीवंत तस्वीर

इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यहाँ
हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के जोड़ों ने अपने-अपने धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं के साथ
विवाह संपन्न किया। कहीं वैदिक मंत्रोच्चार गूंज रहे थे तो कहीं निकाह की रस्में अदा की जा रही थीं।
शहनाइयों की मधुर ध्वनि और पारंपरिक पूजन ने पूरे वातावरण को उल्लास और आस्था से भर दिया।
यह दृश्य अपने आप में सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे का सशक्त संदेश दे रहा था।

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राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने दिया आशीर्वाद

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश सरकार की राज्यमंत्री
विजय लक्ष्मी गौतम
उपस्थित रहीं। उन्होंने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखद और सफल वैवाहिक जीवन की कामना की।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना
राज्य सरकार की उन योजनाओं में से एक है, जो बिना किसी भेदभाव के समाज के हर वर्ग को
सीधा लाभ पहुँचाने का कार्य कर रही है।

राज्यमंत्री ने आगे कहा कि आज प्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएँ बनाना नहीं,
बल्कि उन्हें पारदर्शी ढंग से ज़मीनी स्तर पर लागू करना है।
इस योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को न केवल सम्मानजनक विवाह का अवसर मिलता है,
बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी एक मजबूत आधार प्राप्त होता है।

प्रति जोड़ा एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता

समाज कल्याण विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार,
इस सामूहिक विवाह में प्रति जोड़ा कुल एक लाख रुपये की धनराशि व्यय की गई।
इसमें से 60 हजार रुपये सीधे नवविवाहित दंपत्ति के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए,
25 हजार रुपये का गृहस्थी का आवश्यक सामान प्रदान किया गया
और 15 हजार रुपये विवाह आयोजन की व्यवस्थाओं पर खर्च किए गए।

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यह व्यवस्था इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना
केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सुनियोजित आर्थिक सहयोग का मॉडल है,
जिससे नवदंपत्तियों को विवाह के बाद जीवन की शुरुआत में किसी प्रकार की तात्कालिक आर्थिक कठिनाई का सामना न करना पड़े।

लोकगीतों से सजा समारोह, लोक गायिका अंजना ने बांधा समा

कार्यक्रम के सांस्कृतिक पक्ष को और अधिक जीवंत बनाते हुए
लोक गायिका अंजना ने अपने मधुर लोकगीतों की प्रस्तुति दी।
उनके गीतों ने न केवल नवविवाहित जोड़ों, बल्कि उपस्थित अतिथियों और दर्शकों को भी भावविभोर कर दिया।
संगीत, विवाह और सामाजिक उत्सव का यह संगम पूरे आयोजन को यादगार बना गया।

प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति

नवयुगल जोड़ों को आशीर्वाद देने और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए
कई प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और समाजसेवी मौजूद रहे।
इनमें उपजिलाधिकारी दिशा श्रीवास्तव, समाज कल्याण अधिकारी सुधीर पांडेय,
परियोजना अधिकारी अनिल कुमार, तहसीलदार अलका सिंह,
बाल संरक्षण अधिकारी जयप्रकाश तिवारी सहित अनेक अधिकारी शामिल रहे।

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इसके अतिरिक्त नगर पंचायत अध्यक्ष सलेमपुर श्रीराम यादव,
नगर पंचायत अध्यक्ष लार मूसा रजा लॉरी,
नगर पंचायत अध्यक्ष भाटपार रानी प्रेमलता गुप्ता,
ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि अमरेश सिंह, अमित सिंह,
सांसद प्रतिनिधि रामप्रकाश यादव, जिला मंत्री अभिषेक जायसवाल,
मंडल अध्यक्ष पुनीत यादव, मीडिया प्रभारी राजीव मिश्रा सहित
कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।

योजना का व्यापक सामाजिक प्रभाव

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का प्रभाव केवल विवाह आयोजन तक सीमित नहीं है।
यह योजना समाज के उन वर्गों के लिए सम्मान और आत्मविश्वास का स्रोत बन रही है,
जो आर्थिक कारणों से विवाह जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक संस्कार को लेकर चिंतित रहते हैं।
सामूहिक विवाह न केवल फिजूलखर्ची को रोकता है, बल्कि समाज में समानता और सहयोग की भावना को भी मजबूत करता है।

देवरिया के इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब सरकारी योजनाएँ
ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ लागू होती हैं,
तो वे सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन सकती हैं।
यह कार्यक्रम आने वाले समय में अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरक मॉडल के रूप में देखा जाएगा।

देवरिया के कौलाछापर गांव में आयोजित जलसा ए दस्तारबंदी कार्यक्रम में मंच पर बैठे 45 हाफिज़-ए-कुरान, पगड़ी और सम्मान समारोह का दृश्य
मदरसा अरबिया इस्लामिया क़सीमुल उलूम, कौलाछापर (देवरिया) में आयोजित जलसा ए दस्तारबंदी के दौरान हाफिज़-ए-कुरान बने 45 छात्रों को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया।

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