हिल गई धरती, सहम गए लोग ; गोंडा से लेकर लखनऊ तक अफरातफरी वाली सुबह

गोंडा में आए भूकंप के बाद सुबह लखनऊ और आसपास के इलाकों में घरों से बाहर खड़े सहमे लोग

✍️चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
IMG-20260131-WA0029
previous arrow
next arrow

हूक प्वाइंट: गोंडा भूकंप का केंद्र 10 किमी गहराई पर रहा। सुबह-सुबह आए झटकों से राजधानी तक हलचल मच गई। किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं, लेकिन दहशत साफ दिखी।

गोंडा भूकंप ने शुक्रवार की सुबह उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से को चौंका दिया। राजधानी लखनऊ समेत आसपास के जिलों में लोगों ने जमीन के हल्के-तेज़ झटके महसूस किए, जिससे कई इलाकों में अफरातफरी का माहौल बन गया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार भूकंप की तीव्रता 3.7 मापी गई और इसका केंद्र गोंडा के पास रहा, जिसकी गहराई लगभग 10 किलोमीटर बताई गई है। सुबह के समय आए इन झटकों ने लोगों को घरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया, हालांकि अब तक किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।


0

राजधानी तक महसूस हुए झटके

चूंकि गोंडा भूकंप का एपिसेंटर गोंडा क्षेत्र में था, इसलिए इसके प्रभाव की लहरें राजधानी तक महसूस की गईं। लखनऊ के कई रिहायशी इलाकों में सुबह-सुबह लोग अचानक जागे और सुरक्षा की दृष्टि से घरों के बाहर निकल आए। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने झटकों के अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों के अनुसार कम गहराई पर आने वाले भूकंप अपेक्षाकृत अधिक महसूस होते हैं, भले ही उनकी तीव्रता मध्यम हो।

इसे भी पढें  कौन है बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह❓आखिर क्यों चर्चा में है इन दिनों

आधिकारिक पुष्टि और भूकंप का केंद्र

देश की प्रमुख भूकंप निगरानी एजेंसी National Center for Seismology (NCS) ने भूकंप की पुष्टि करते हुए बताया कि इसकी तीव्रता 3.7 रही और केंद्र गोंडा के आसपास स्थित था। एजेंसी के अनुसार, भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर दर्ज की गई, जो इसे सतही प्रभाव वाला बनाती है। NCS ने यह भी जानकारी दी कि इसी अवधि में अन्य क्षेत्रों में भी हल्की-मध्यम तीव्रता के भूकंप रिकॉर्ड किए गए।

अन्य क्षेत्रों में भी दर्ज हुए झटके

NCS के अनुसार, उत्तराखंड के बागेश्वर में 3.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जबकि चीन के शिनजियांग क्षेत्र में 4.4 तीव्रता के झटके महसूस किए गए। इन अलग-अलग घटनाओं ने एक बार फिर यह संकेत दिया कि भारतीय उपमहाद्वीप और उसके आसपास के क्षेत्र भूगर्भीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील बने हुए हैं।

वैश्विक संदर्भ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

जर्मनी स्थित German Research Centre for Geosciences (GFZ) ने भी अपने विश्लेषण में बताया कि हालिया घटनाओं की तरह पहले आए भूकंप भी लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर केंद्रित थे। वैज्ञानिकों का मानना है कि कम गहराई वाले भूकंपों के झटके व्यापक क्षेत्र में महसूस किए जा सकते हैं, हालांकि इससे बड़े पैमाने पर नुकसान की आशंका तभी बढ़ती है जब तीव्रता अधिक हो।

इसे भी पढें  प्रेम प्रसंग लम्बे समय से चल रहा था, प्रेमी-प्रेमिका की मंदिर में ग्रामीणों ने कराई शादी

हाल के दिनों की पृष्ठभूमि

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले म्यांमार में 5.9 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया था, जिसके झटके कोलकाता और ढाका तक महसूस किए गए थे। विशेषज्ञ इसे क्षेत्रीय प्लेट गतिविधियों से जोड़कर देखते हैं और कहते हैं कि छोटी-मध्यम तीव्रता की घटनाएं अक्सर बड़े भूकंप की पूर्वसूचना नहीं होतीं, लेकिन सतर्कता ज़रूरी रहती है।

जन-जीवन पर असर और प्रशासन की तैयारी

भले ही गोंडा भूकंप से किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन सुबह-सुबह आए झटकों ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित किया। स्कूल-कॉलेज और दफ्तर जाने से पहले लोग सुरक्षा को लेकर सतर्क दिखे। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि स्थिति पर नज़र रखी जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए संबंधित विभाग तैयार हैं।

विशेषज्ञों की सलाह

भूकंप विशेषज्ञों का कहना है कि हल्के झटकों के दौरान घबराने के बजाय सुरक्षित स्थानों पर शरण लेना चाहिए। इमारतों के भीतर हों तो मजबूत फर्नीचर के नीचे या दरवाज़ों के चौखट में खड़े रहें, और खुले स्थान में हों तो बिजली के खंभों व पेड़ों से दूरी बनाए रखें। प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।

इसे भी पढें  गणतंत्र दिवस पर मंच बना ‘मज़ाक’ का मैदान!बुर्का पहनकर डांस करती छात्राएं, गोंडा का इंटर कॉलेज जांच के घेरे में

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, गोंडा भूकंप ने एक बार फिर यह याद दिलाया कि उत्तर भारत के कई हिस्से भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील हैं। राहत की बात यह रही कि इस बार कोई बड़ा नुकसान सामने नहीं आया, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए जागरूकता, तैयारी और वैज्ञानिक सलाह का पालन बेहद आवश्यक है।

गोंडा के करनैलगंज में पूर्व विधायक कुंवर अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैया के वारिसाना हक को लेकर आयोजित प्रशासनिक बैठक में परिजन और ग्रामीण मौजूद
पूर्व विधायक लल्ला भैया के निधन के बाद वारिसाना हक को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने, प्रशासनिक बैठक में गरमाया मामला

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top