जहाँ भजन, बाहुबली और बथुआ एक मंच पर मिले : गोंडा के राष्ट्रकथा महोत्सव की पूरी कहानी

गोंडा के नंदिनी नगर में राष्ट्रकथा महोत्सव के दौरान ऋतेश्वर महाराज श्यामा गाय को स्नेहपूर्वक दुलारते हुए, आसपास मौजूद श्रद्धालु और आयोजक।

अब्दुल मोबीन सिद्दीकी की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के नंदिनी नगर में आयोजित ‘राष्ट्रकथा महोत्सव’ इन दिनों केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन गया है। इस मंच पर भक्ति की गंभीरता, बाहुबल का आत्मविश्वास और लोकजीवन की सहजता—तीनों एक साथ दिखाई दिए। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति, प्रभावशाली चेहरों की मौजूदगी और प्रतीकात्मक घटनाओं ने इस आयोजन को प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना दिया।

नंदिनी नगर: कथा से आगे का मंच

नंदिनी नगर में सजा यह महोत्सव साधारण धार्मिक कथा से कहीं आगे निकलता नज़र आया। मंच पर राष्ट्र, धर्म और संस्कृति की कथाएं थीं, तो मंच के नीचे जनसमुदाय की उत्सुक निगाहें। आयोजन का केंद्र सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु ऋतेश्वर महाराज का जन्मदिवस था, जिसे विशेष रूप से ‘राष्ट्रकथा’ के माध्यम से मनाया गया।

कथा के दौरान दिए गए संदेश केवल आध्यात्मिक नहीं थे, बल्कि सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक स्मृति और राष्ट्रबोध से जुड़े हुए थे। यही कारण रहा कि यह आयोजन श्रद्धा तक सीमित न रहकर व्यापक विमर्श में तब्दील हो गया।

बाहुबली की मौजूदगी और सियासी संकेत

इस महोत्सव में भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की उपस्थिति ने आयोजन को एक अलग ही आयाम दे दिया। लंबे समय बाद सार्वजनिक मंच पर अपने पुराने अंदाज़ में दिखे बृजभूषण ने न सिर्फ कार्यक्रम में भाग लिया, बल्कि मंच और पंडाल—दोनों जगह चर्चा का केंद्र बने रहे।

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धार्मिक मंच पर उनकी सक्रियता, सहज संवाद और आत्मविश्वास भरे हावभाव को लोग केवल एक व्यक्तिगत उपस्थिति के रूप में नहीं, बल्कि शक्ति और प्रभाव के प्रतीक के तौर पर देख रहे थे। यही वजह रही कि आयोजन के बाद यह सवाल भी उठता रहा—क्या यह केवल कथा थी या उससे आगे का संकेत?

20 लाख की श्यामा गाय: आस्था का प्रतीक या संदेश?

महोत्सव का सबसे चर्चित क्षण तब आया, जब बृजभूषण शरण सिंह ने ऋतेश्वर महाराज को उनके जन्मदिन पर एक अत्यंत दुर्लभ और बेशकीमती उपहार भेंट किया। यह उपहार थी काले रंग की विशेष नस्ल की ‘श्यामा गाय’, जिसकी कीमत लगभग 20 लाख रुपये बताई जा रही है।

इस गाय को विशेष रूप से हरियाणा से मंगाया गया था। मंच पर जैसे ही श्यामा गाय लाई गई, श्रद्धालुओं में उत्सुकता और आकर्षण साफ दिखाई दिया। ऋतेश्वर महाराज भावुक हो उठे और उन्होंने स्नेहपूर्वक गाय को दुलारते हुए आशीर्वाद दिया। बृजभूषण ने बताया कि यह उपहार उनके एक करीबी मित्र द्वारा श्रद्धा स्वरूप भेजा गया है।

अपने संबोधन में ऋतेश्वर महाराज ने कहा कि आज के समय में राष्ट्र, धर्म और आत्मा की पुकार को समझना जरूरी है। उन्होंने महापुरुषों द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने और सांस्कृतिक मूल्यों को आत्मसात करने की अपील की।

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भजन, भीड़ और भोजपुरी रंग

भक्ति के वातावरण को और अधिक प्रभावशाली बना दिया भोजपुरी सिनेमा के पावर स्टार पवन सिंह ने। मंच पर पहुंचते ही पवन सिंह ने भजन प्रस्तुत किए, जिन पर पूरा पंडाल भावविभोर हो उठा। श्रद्धालुओं की तालियों और जयकारों ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।

भोजपुरी लोकसंस्कृति और भक्ति संगीत का यह संगम दर्शाता है कि ऐसे आयोजनों में अब मनोरंजन और जनसंस्कृति भी उतनी ही अहम भूमिका निभा रहे हैं, जितनी कथा और प्रवचन।

जब बृजभूषण ने गाया और बथुआ बना मुद्दा

महोत्सव का सबसे अप्रत्याशित और चर्चित पल तब आया, जब खुद बृजभूषण शरण सिंह ने माइक संभाला और ‘आज नंदिनी नगरिया निहार सखियां…’ गीत गाना शुरू कर दिया। उनके इस अंदाज़ ने माहौल को हल्का और जीवंत बना दिया।

भंडारे में परोसे जा रहे ‘बथुए के सगपहिते’ का स्वाद लेने के बाद उन्होंने मजाकिया लेकिन जोरदार अंदाज़ में कहा कि बथुआ अब एक राष्ट्रीय पहचान बन चुका है और इसे भारत का ‘नेशनल फूड’ घोषित कर देना चाहिए। यह बयान मंच से उतरते ही लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

कुश्ती स्टेडियम में पुराने दिन

कथा के समापन के बाद बृजभूषण शरण सिंह, ऋतेश्वर महाराज को लेकर नंदिनी नगर के कुश्ती स्टेडियम पहुंचे। यहां पहलवानों के अभ्यास के बीच तलवारबाजी का प्रदर्शन हुआ। बृजभूषण ने अपने पुराने खिलाड़ियों और स्टाफ से महाराज को मिलवाया।

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मजाकिया लहजे में उन्होंने अपने मालिश करने वाले एक राष्ट्रीय पदक विजेता और अपने निजी नाई की बॉडी दिखाते हुए कहा—“जब मेरा नाई इतना तगड़ा है, तो दबदबा तो रहेगा ही।” यह सुनकर ऋतेश्वर महाराज हंस पड़े और सभी को आशीर्वाद दिया।

एक मंच, कई अर्थ

नंदिनी नगर का राष्ट्रकथा महोत्सव यह साफ संकेत देता है कि आज के समय में धार्मिक आयोजन केवल आस्था तक सीमित नहीं रह गए हैं। वे सामाजिक संवाद, सांस्कृतिक पहचान और प्रभाव के मंच भी बन चुके हैं। भजन, बाहुबली और बथुआ—तीनों का एक मंच पर होना इसी बदलते स्वरूप की तस्वीर पेश करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

राष्ट्रकथा महोत्सव कहां आयोजित हुआ?

यह आयोजन उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के नंदिनी नगर में आयोजित किया गया।

20 लाख की श्यामा गाय किसने भेंट की?

यह दुर्लभ श्यामा गाय बृजभूषण शरण सिंह ने ऋतेश्वर महाराज को भेंट की।

पवन सिंह की मौजूदगी क्यों खास रही?

पवन सिंह ने भजन प्रस्तुत कर आयोजन को सांस्कृतिक और भावनात्मक ऊंचाई दी।

बथुआ को लेकर क्या बयान दिया गया?

बृजभूषण शरण सिंह ने मजाकिया अंदाज़ में बथुआ को भारत का ‘नेशनल फूड’ घोषित करने की बात कही।

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