‘सोनम के बाद अब अंजू निकली बेवफा…’ हनीमून पर पति को दी दर्दनाक मौत, पूरी कहानी जान काँप जायेगी रूह

हनीमून मर्डर केस में आरोपी पत्नी अंजू की शादी और पति के साथ की तस्वीर, हत्या से पहले और बाद का दृश्य

✍️हिमानी मेहरा की रिपोर्ट
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राजस्थान के श्रीगंगानगर ज़िले से सामने आया यह मामला न केवल अपराध की भयावहता को उजागर करता है, बल्कि रिश्तों के भीतर पल रही साज़िशों की उस परत को भी बेनकाब करता है, जिसे अक्सर समाज देखना नहीं चाहता। ‘हनीमून मर्डर’ के इस सनसनीखेज प्रकरण ने इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड की याद ताज़ा कर दी है। शादी के महज़ तीन महीने बाद एक पत्नी ने अपने ही पति को रास्ते से हटाने के लिए ऐसा षड्यंत्र रचा, जिसकी कल्पना भी रूह कंपा देने वाली है।

समाचार सार:
शादी के तीन महीने बाद पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर पति की हत्या कर दी। वारदात को सड़क हादसा दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट, FSL जांच और कॉल डिटेल्स ने साज़िश की पूरी परत खोल दी। पुलिस ने पत्नी समेत चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

हादसा या हत्या? यहीं से शुरू हुआ शक

घटना 30 जनवरी की रात करीब नौ बजे की बताई गई। अनूपगढ़ रोड पर सड़क किनारे एक युवक और उसकी पत्नी बेहोशी की हालत में पड़े मिले। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने युवक आशीष को मृत घोषित कर दिया, जबकि पत्नी अंजू सुरक्षित थी। शुरुआती बयान में अंजू ने इसे हिट-एंड-रन बताया और दावा किया कि किसी अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी तथा उसके गहने लूट लिए गए।

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लेकिन घटनास्थल की स्थिति, शरीर पर चोटों का पैटर्न और कथित लूट की कहानी पुलिस को शुरू से ही खटक रही थी। श्रीगंगानगर के पुलिस अधीक्षक अमृतु दुहान के अनुसार, क्राइम सीन और FSL रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया कि यह कोई सामान्य सड़क दुर्घटना नहीं थी।

मेडिकल रिपोर्ट ने खोला मौत का राज

पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस पूरे मामले का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। रिपोर्ट में सामने आया कि आशीष के शरीर पर गंभीर मारपीट के निशान थे और सबसे अहम तथ्य यह था कि उसकी मौत गला घोंटने से हुई थी। यदि यह सड़क दुर्घटना होती, तो चोटों का स्वरूप बिल्कुल अलग होता। वहीं, साथ मौजूद पत्नी अंजू के शरीर पर एक भी गंभीर खरोंच तक नहीं थी।

यही वह बिंदु था, जहां पुलिस का शक यक़ीन में बदलने लगा। जांच अधिकारियों ने अंजू के बयान को तकनीकी सबूतों से परखना शुरू किया।

फोन रिकॉर्ड और रिश्तों का काला सच

जब पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाले, तो एक नाम बार-बार सामने आया—संजू। जांच में पता चला कि अंजू सादुलशहर निवासी अपने पुराने प्रेमी संजू के लगातार संपर्क में थी। शादी के बाद भी दोनों की बातचीत बंद नहीं हुई थी, बल्कि वारदात से पहले कॉल्स की संख्या और बढ़ गई थी।

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यहीं से पुलिस को यह अंदेशा हुआ कि मामला सिर्फ वैवाहिक कलह का नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साज़िश का है।

शादी से पहले का रिश्ता, शादी के बाद की नफरत

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि 23 वर्षीय अंजू अपनी शादी से खुश नहीं थी। सामाजिक दबाव में हुई इस शादी को वह मन से स्वीकार नहीं कर पाई थी। दूसरी ओर, उसका प्रेमी संजू उसके जीवन में लगातार मौजूद था। अंजू ने पति को अपने रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा मान लिया और उसे हटाने का खौफनाक फैसला कर लिया।

साज़िश की पूरी पटकथा ऐसे लिखी गई

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ समय पहले अंजू अपने मायके सादुलशहर गई थी। वहीं उसने संजू और उसके दो साथियों—रॉकी और बादल—के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई। अंजू को पता था कि उसका पति रात के खाने के बाद टहलने जाता है। इसी जानकारी का इस्तेमाल करते हुए उसने आशीष को एक सुनसान सड़क पर ले जाने की योजना बनाई।

घात लगाए बैठे आरोपियों ने आशीष पर हमला किया। पहले उसे बेरहमी से पीटा गया, फिर गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी गई। वारदात को लूट और सड़क हादसा दिखाने के लिए अंजू ने खुद अपने झुमके और मोबाइल फोन आरोपियों को दे दिए।

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जांच में टूटती रही कहानी, बदलते रहे बयान

पूछताछ के दौरान अंजू बार-बार अपने बयान बदलती रही। कभी वह खुद को मासूम पीड़िता बताती, तो कभी घटनाक्रम में छोटे-छोटे बदलाव करती। लेकिन तकनीकी साक्ष्यों—मेडिकल रिपोर्ट, कॉल रिकॉर्ड और सह-आरोपियों के बयानों—के सामने उसकी एक भी दलील टिक नहीं पाई।

चारों आरोपी सलाखों के पीछे

तेज़ी से कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी पत्नी अंजू, उसके प्रेमी संजू और उसके दोनों साथियों रॉकी उर्फ रोहित तथा बादल उर्फ सिद्धार्थ को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि मामले में पर्याप्त सबूत जुटा लिए गए हैं और जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

समाज के लिए चेतावनी बनता ‘हनीमून मर्डर’

यह मामला सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक विडंबना को भी दर्शाता है, जहां रिश्ते विश्वास के बजाय स्वार्थ और छल की बुनियाद पर टिकने लगते हैं। हनीमून जैसे पवित्र समझे जाने वाले रिश्ते का इस तरह खून से सना होना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

श्रीगंगानगर का यह ‘हनीमून मर्डर’ आने वाले समय में अपराधशास्त्र और सामाजिक अध्ययन—दोनों के लिए एक अहम केस स्टडी बन सकता है।

उत्तर प्रदेश में अपराध की पड़ताल दर्शाती सांकेतिक फीचर इमेज, जिसमें घरेलू हिंसा, सड़क हादसा, धार्मिक स्थल विवाद और थाना-वार क्राइम मैपिंग दिखाई गई है।
अपराध यूँ ही नहीं होते—जब रिश्ते, रास्ते और व्यवस्था टूटती है, तब घटनाएँ नहीं बल्कि अपराध का पैटर्न सामने आता है।

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