डेढ़ करोड़ का गांजा पकड़े जाने से पूर्वांचल में नशा तस्करी के उस संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जो राज्यों की सीमाओं और जांच एजेंसियों की नजरों से बचते हुए बड़ी खेप खपाने की रणनीति पर काम कर रहा था। पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टीम की संयुक्त कार्रवाई में मक्के की बोरियों में छिपाकर लाई जा रही गांजे की खेप पकड़ी गई, जिसने यह साफ कर दिया कि तस्कर अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर बेहद योजनाबद्ध तरीके अपना रहे हैं।
मुखबिर की सूचना से खुला तस्करी का राज
कार्रवाई की नींव उस गुप्त सूचना पर टिकी थी, जो गोरखपुर नारकोटिक्स टीम को प्राप्त हुई थी। सूचना में स्पष्ट संकेत था कि बिहार की ओर से एक कंटेनर के जरिए भारी मात्रा में गांजा उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने वाला है। इस इनपुट को गंभीरता से लेते हुए लार थाना पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टीम ने संयुक्त रणनीति बनाई और संभावित मार्गों पर सतर्कता बढ़ा दी।
घेराबंदी और कंटेनर की तलाशी
संयुक्त टीम ने चोरडीहा गैस गोदाम के पास संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर कंटेनर नंबर HR 38 Z 5407 को रोका। प्रारंभिक पूछताछ के दौरान चालक के जवाब असंतोषजनक पाए गए, जिसके बाद नियमानुसार कंटेनर की सघन तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान मक्के से भरी बोरियों के भीतर छिपाकर रखी गई गांजे की बड़ी खेप सामने आई।
तीन कुंतल से अधिक गांजा बरामद
पुलिस के अनुसार कंटेनर से कुल तीन कुंतल 19 किलो गांजा बरामद किया गया। प्रारंभिक आकलन में इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब डेढ़ करोड़ रुपये आंकी गई है। इतनी बड़ी मात्रा यह संकेत देती है कि खेप केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय और संभवतः अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ी हो सकती है।
मक्के की बोरियां बनीं तस्करी की ढाल
जांच अधिकारियों का कहना है कि तस्करों ने गांजा छिपाने के लिए मक्के की बोरियों का चयन जानबूझकर किया, ताकि सामान्य जांच में किसी को शक न हो। कृषि उपज की आड़ में नशीले पदार्थों की ढुलाई का यह तरीका पहले भी सामने आ चुका है, लेकिन इस मामले में पैमाना और पैकिंग दोनों असाधारण पाए गए।
दो तस्कर गिरफ्तार, नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद
मौके से कंटेनर चालक समेत दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। दोनों से गहन पूछताछ जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान गांजा तस्करी के पूरे नेटवर्क, सप्लाई चेन, फंडिंग और वितरण के ठिकानों को लेकर अहम सुराग मिल सकते हैं।
असम से यूपी तक फैला तस्करी का रास्ता
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गांजा असम से लोड किया गया था और बिहार के रास्ते उत्तर प्रदेश लाया जा रहा था। यह मार्ग पहले भी नशा तस्करों के लिए सुरक्षित माना जाता रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि खेप कहां खपाई जानी थी और इसके पीछे कौन-कौन से लोग सक्रिय थे।
नारकोटिक्स टीम की रणनीतिक सफलता
इस कार्रवाई को नारकोटिक्स नियंत्रण के लिहाज से बड़ी सफलता माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि यह खेप बाजार तक पहुंच जाती, तो न केवल सामाजिक स्तर पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ते, बल्कि अपराध और असुरक्षा की घटनाओं में भी इजाफा होता।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
बरामद गांजे को जब्त कर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस टीम अब इस बात की भी जांच कर रही है कि कंटेनर किस कंपनी के नाम पर बुक था, दस्तावेज असली थे या फर्जी, और इससे पहले कितनी बार इसी तरीके से खेप लाई जा चुकी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
बरामद गांजे की मात्रा कितनी है?
पुलिस के अनुसार कुल तीन कुंतल 19 किलो गांजा बरामद किया गया है।
गांजा किस रास्ते से लाया जा रहा था?
गांजा असम से लोड होकर बिहार के रास्ते उत्तर प्रदेश लाया जा रहा था।
अब तक कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
मौके से कंटेनर चालक समेत दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।
आगे की कार्रवाई क्या होगी?
पुलिस पूरे नेटवर्क की पहचान, सप्लायर और रिसीवर तक पहुंचने के लिए पूछताछ और तकनीकी जांच कर रही है।






