मुख्य मार्ग पर जलभराव — ग्रामीणों में आक्रोश और बढ़ती स्वास्थ्य चिंता

मुख्य मार्ग पर जलभराव के कारण सड़क पर जमा गंदा पानी, गांव में नाली और खड़ंजा न होने से बिगड़े हालात

✍️सुनील शुक्ला की रिपोर्ट
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🔎 क्यों अहम है यह खबर?
मुख्य मार्ग पर जलभराव ने ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी को संकट में डाल दिया है। सड़क पर जमा गंदा पानी, बीमारी का खतरा और पंचायत की निष्क्रियता—यह रिपोर्ट गांव की उस सच्चाई को सामने लाती है जिसे अब नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया है।

मुख्य मार्ग पर जलभराव की समस्या ने ग्रामीण जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कसमंडा ब्लॉक के अंतर्गत तुलसीपुर गांव में सड़क पर लगातार भरा रहने वाला पानी अब लोगों की दैनिक दिनचर्या, आवागमन और स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। घरों से निकलने वाले पानी की समुचित निकासी न होने के कारण सड़क किसी मार्ग की बजाय स्थायी जलभराव क्षेत्र में तब्दील होती जा रही है।

सड़क नहीं, जलनिकासी का अस्थायी ठिकाना बना रास्ता

ग्रामीणों के अनुसार रामसिंह के घर से लेकर खुशराम के घर तक आज तक न तो खड़ंजा का निर्माण कराया गया है और न ही नाली की व्यवस्था की गई है। परिणामस्वरूप घरों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे सड़क पर फैल जाता है और कुछ ही समय में पूरा मुख्य मार्ग पानी से भर जाता है। यह स्थिति वर्षों से बनी हुई है, लेकिन अब समस्या असहनीय हो चुकी है।

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बरसात में हालात और भी भयावह

स्थानीय लोगों का कहना है कि सामान्य दिनों में भी सड़क पर पानी जमा रहता है, लेकिन बारिश के मौसम में हालात और बदतर हो जाते हैं। पानी इतना भर जाता है कि पैदल चलना मुश्किल हो जाता है। बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है और बुजुर्गों व महिलाओं को फिसलन के कारण चोट लगने का खतरा बना रहता है।

स्वास्थ्य पर मंडराता गंभीर खतरा

मुख्य मार्ग पर जलभराव केवल असुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। जमा पानी में मच्छरों का पनपना, दुर्गंध और गंदगी से संक्रमण फैलने की आशंका लगातार बनी रहती है। ग्रामीणों को डर है कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो मलेरिया, डेंगू, डायरिया और त्वचा रोग जैसी बीमारियां गांव में फैल सकती हैं।

शिकायतें हुईं, समाधान अब तक नहीं

ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर वे कई बार ग्राम प्रधान को अवगत करा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हर बार आश्वासन जरूर दिया गया, लेकिन न तो नाली निर्माण शुरू हुआ और न ही खड़ंजा डालने की पहल की गई। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

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ग्रामीणों की पीड़ा, पंचायत पर निष्क्रियता का आरोप

ग्रामीण रामसिंह ने बताया कि उनके गांव में आज तक खड़ंजा निर्माण का कार्य नहीं हुआ है। नाली न होने के कारण घरों का पानी सड़क पर ही जमा रहता है। अन्य ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद पंचायत स्तर पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही, जिससे समस्या दिन-प्रतिदिन विकराल होती जा रही है।

विकास के दावों पर उठते सवाल

गांव में मुख्य मार्ग पर जलभराव की स्थिति स्थानीय विकास दावों की पोल खोलती है। सरकारी योजनाओं में सड़क और नाली निर्माण की बातें होती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई देती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते बुनियादी ढांचे का विकास किया गया होता तो आज यह स्थिति नहीं बनती।

ग्रामीणों की चेतावनी, आंदोलन की आशंका

लगातार अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है कि मुख्य मार्ग पर तत्काल खड़ंजा और नाली का निर्माण कराया जाए, ताकि जलभराव से स्थायी राहत मिल सके।

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मुख्य मार्ग पर जलभराव की यह समस्या केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण विकास व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी और पंचायत इस जनआक्रोश को कितनी गंभीरता से लेते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मुख्य मार्ग पर जलभराव की समस्या क्यों बनी हुई है?

गांव में खड़ंजा और नाली का निर्माण न होने के कारण घरों से निकलने वाला पानी सड़क पर जमा हो जाता है, जिससे जलभराव की स्थिति बनी रहती है।

जलभराव से ग्रामीणों को क्या नुकसान हो रहा है?

आवागमन बाधित हो रहा है, फिसलन बढ़ रही है और मच्छरों व गंदगी के कारण बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

क्या ग्राम प्रधान को इस समस्या की जानकारी दी गई है?

ग्रामीणों के अनुसार कई बार ग्राम प्रधान को अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ है।

ग्रामीणों की मुख्य मांग क्या है?

ग्रामीण चाहते हैं कि मुख्य मार्ग पर जल्द से जल्द खड़ंजा और नाली का निर्माण कराया जाए, ताकि जलभराव से स्थायी राहत मिल सके।


बंद पड़ा ग्रामीण स्वास्थ्य उपकेंद्र, ताले लगे दरवाज़े और उपेक्षित चिकित्सा उपकरण, ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति दर्शाते हुए
इलाज के लिए बना उपकेंद्र बंद पड़ा है, मजबूरी में ग्रामीणों को दूर इलाज के लिए जाना पड़ रहा है।

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