फर्जी सीओ गिरफ्तारी मामला गुरुवार शाम उस समय सामने आया, जब उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में एक शख्स पुलिस अधिकारी बनने का नाटक करता हुआ लोगों के बीच रौब झाड़ता नजर आया। कंधे पर स्टार, वर्दी में आत्मविश्वास और बातचीत में अधिकार जताने वाला यह व्यक्ति खुद को क्षेत्राधिकारी बताकर एक युवती का पता पूछ रहा था। हालांकि स्थानीय लोगों की सतर्कता ने इस फर्जीवाड़े को समय रहते उजागर कर दिया।
रिटायर्ड इंस्पेक्टर पिता की वर्दी पहनकर युवक बना सीओ, प्रेमिका का पता पूछते समय रौब दिखाया, शक होने पर लोगों ने पुलिस बुलाई और कोतवाली पहुंचते ही फर्जीवाड़ा उजागर हो गया।
शाम होते ही शहर में मच गया हड़कंप
गुरुवार की शाम मऊ शहर के एक इलाके में अचानक हलचल तेज हो गई। एक युवक पुलिस अधिकारी होने का दावा करते हुए इधर-उधर घूम रहा था और लोगों से सख्त लहजे में सवाल पूछ रहा था। वर्दी और स्टार देखकर लोग असमंजस में पड़ गए, लेकिन उसकी गतिविधियों में कुछ ऐसा था जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
लड़की का पता पूछते समय हुआ शक
स्थानीय लोगों के अनुसार वह व्यक्ति बार-बार एक युवती के घर का पता पूछ रहा था और खुद को सीओ बताते हुए रौब दिखा रहा था। बातचीत में वह अधिकार जताने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसके सवाल और अंदाज़ किसी वरिष्ठ अधिकारी जैसे नहीं लग रहे थे। यहीं से लोगों का शक और गहरा हो गया।
स्थानीय सतर्कता से बुला ली गई पुलिस
इलाके के कुछ लोगों ने आपस में चर्चा की और बिना देर किए शहर कोतवाली पुलिस को सूचना दे दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। जब कथित सीओ से पहचान, तैनाती और अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल किए गए, तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। इसके बाद पुलिस ने उसे अपने वाहन में बैठाकर कोतवाली ले गई।
कोतवाली पहुंचते ही खुल गया फर्जीवाड़ा
कोतवाली में पूछताछ के दौरान सामने आया कि युवक का नाम प्रभात पांडे है और वह सिद्धार्थ नगर जिले का रहने वाला है। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि वह असल में कोई पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि एक फर्जी सीओ बनकर घूम रहा था। उसके पास मौजूद वर्दी उसके पिता की थी।
रिटायर्ड इंस्पेक्टर पिता की वर्दी का दुरुपयोग
पुलिस जांच में पता चला कि प्रभात पांडे के पिता वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश पुलिस में इंस्पेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उसी वर्दी को पहनकर प्रभात ने खुद को सीओ साबित करने की कोशिश की। यह मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग में भी चर्चा तेज हो गई।
प्रेम प्रसंग बना पूरी कहानी की जड़
पूछताछ में प्रभात पांडे ने स्वीकार किया कि वह मऊ जनपद अपनी प्रेमिका से मिलने आया था। उसे युवती के घर का सटीक पता नहीं मालूम था, इसलिए उसने पुलिस अधिकारी बनकर लोगों से पूछताछ करने का रास्ता चुना। उसका मानना था कि वर्दी देखकर कोई सवाल नहीं करेगा।
पहले भी कर चुका है ऐसी हरकतें
पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपी पहले भी अलग-अलग स्थानों पर खुद को पुलिसकर्मी बताकर लोगों पर प्रभाव जमाने की कोशिश कर चुका है। वर्तमान में वह अपने पिता के साथ वाराणसी में रह रहा था और वहीं से मऊ पहुंचा था। पुलिस अब उसके पुराने रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।
कोतवाल अनिल सिंह का बयान
शहर कोतवाल अनिल सिंह ने बताया कि प्रभात पांडे को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। प्रथम दृष्टया यह मामला पुलिस की वर्दी और पद के दुरुपयोग से जुड़ा है। आरोपी के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि उसने और किन-किन स्थानों पर खुद को अधिकारी बताकर भ्रम फैलाया।
समाज के लिए चेतावनी
यह फर्जी सीओ गिरफ्तारी मामला समाज के लिए एक स्पष्ट संदेश देता है कि केवल वर्दी या रौब देखकर किसी पर भरोसा न किया जाए। स्थानीय लोगों की सजगता ने एक बड़े फर्जीवाड़े को समय रहते रोक दिया और पुलिस को सच्चाई तक पहुंचाया।
जांच जारी, आगे और खुलासों की संभावना
फिलहाल पुलिस आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है। यह भी जांच की जा रही है कि कहीं यह मामला केवल प्रेम प्रसंग तक सीमित है या इसके पीछे किसी और तरह की मंशा छिपी हुई है। आने वाले दिनों में जांच के बाद और तथ्य सामने आने की संभावना है।






