योगी के ‘पप्पू-टप्पू-अप्पू’ पर अखिलेश का ‘गप्पू-चप्पू’ आ गया सामने; योगी पर आग बबूला हुए सपा सुप्रीमो

अंजनी कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट

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बिहार चुनाव 2025 का प्रचार अब पूरी तरह गरम हो चुका है। राजनीतिक दलों के बीच अब नीतियों से ज्यादा जुबानी जंग चल रही है। सोमवार को दरभंगा में योगी आदित्यनाथ ने महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) पर तीखा हमला बोला और गांधीजी के तीन बंदरों का उदाहरण देते हुए विपक्षी नेताओं को ‘पप्पू, टप्पू और अप्पू’ करार दिया।

योगी के इस बयान ने बिहार चुनाव के माहौल को और गर्म कर दिया। वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ और सिवान की रैली से पलटवार करते हुए योगी पर तीखा निशाना साधा। अखिलेश ने कहा, “जो लोग आईना देखकर आते हैं उन्हें हर तरफ़ बंदर नजर आते हैं।” इसके बाद उन्होंने योगी आदित्यनाथ को ‘गप्पू और चप्पू’ कहकर करारा जवाब दिया।

योगी आदित्यनाथ का तंज: ‘पप्पू, टप्पू और अप्पू’

दरभंगा के केवटी विधानसभा में एक बड़ी चुनावी सभा को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा, “महात्मा गांधी ने हमें तीन बंदरों की शिक्षा दी थी — बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, और बुरा मत बोलो। लेकिन अब INDIA गठबंधन के तीन नए बंदर आ गए हैं — पप्पू, टप्पू और अप्पू।”

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योगी ने आगे व्याख्या करते हुए कहा:

  • पप्पू: सच नहीं बोल सकता।
  • टप्पू: सही को देख नहीं सकता।
  • अप्पू: सच नहीं सुन सकता।

उन्होंने RJD और महागठबंधन पर हमला बोलते हुए कहा कि “इन लोगों ने बिहार में जातियों को आपस में लड़ाया और पूरे राज्य को हिंसा और माफियागिरी की तरफ धकेल दिया।” योगी ने कहा कि बिहार की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को जनता इस बार सबक सिखाएगी।

अखिलेश यादव का पलटवार: ‘गप्पू और चप्पू’ से बचाओ बिहार

अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ के बयान का जवाब न केवल सोशल मीडिया पर बल्कि अपने सिवान के जनसभा में भी दिया। उन्होंने कहा कि “हमें बिहार को ‘गप्पू’ और ‘चप्पू’ से बचाना है।” अखिलेश का सीधा निशाना भाजपा और एनडीए पर था। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल जुमलेबाज़ी करती है और अब जनता को बहकाने की कोशिश में जुटी है।

सपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा ने कभी 15 लाख रुपये देने का वादा किया, कभी हर घर नौकरी का। उन्होंने तंज कसा, “अब वही लोग गप्पू और चप्पू बनकर बिहार की राजनीति को भ्रमित कर रहे हैं।”

अखिलेश ने कहा कि तेजस्वी यादव द्वारा की गई नौकरियों और महिलाओं को ₹2500 सम्मान राशि देने की घोषणा से भाजपा में घबराहट है। उन्होंने कहा, “भाजपा नेताओं को डर है कि अगर बिहार के युवाओं को नौकरी और सम्मान मिला तो उनके गप्पों की राजनीति खत्म हो जाएगी।”

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नीतियों से हटकर व्यक्तिगत हमले

बिहार की चुनावी जंग अब पूरी तरह व्यक्तिगत कटाक्षों में बदल चुकी है। पहले योगी आदित्यनाथ ने ‘पप्पू-टप्पू-अप्पू’ का हमला बोला और अब अखिलेश यादव ने ‘गप्पू-चप्पू’ का पलटवार किया। यह शब्दों की जंग सोशल मीडिया पर भी ट्रेंड कर रही है और बिहार चुनाव का प्रमुख मुद्दा बन चुकी है।

विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के बयान वोटरों का ध्यान असल मुद्दों — बेरोजगारी, महंगाई और विकास — से भटका सकते हैं। लेकिन नेताओं के तीखे तेवरों से साफ है कि अब बिहार चुनाव 2025 नीतियों की नहीं बल्कि शब्दों की लड़ाई में बदल गया है।

सोशल मीडिया पर ‘पप्पू बनाम गप्पू’ ट्रेंड

सोशल मीडिया पर योगी और अखिलेश की यह जुबानी जंग तेजी से वायरल हो गई है। ट्विटर (अब एक्स), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #पप्पू_टप्पू_अप्पू और #गप्पू_चप्पू ट्रेंड कर रहे हैं। युवा वर्ग इसे राजनीतिक मनोरंजन की तरह देख रहा है, जबकि कुछ लोग इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन मान रहे हैं।

बिहार में इस समय हर पार्टी अपनी रणनीति बदल रही है। एनडीए और INDIA ब्लॉक दोनों ही अपने-अपने नेताओं की लोकप्रियता को भुनाने में लगे हैं। लेकिन ये बयानबाज़ी यह भी दिखा रही है कि बिहार चुनाव प्रचार अब शालीनता की सीमाएं पार कर चुका है।

बिहार चुनाव 2025 अब पॉलिसी बनाम पॉलिसी नहीं बल्कि व्यंग्य बनाम व्यंग्य की जंग बन गया है। योगी आदित्यनाथ के ‘पप्पू-टप्पू-अप्पू’ और अखिलेश यादव के ‘गप्पू-चप्पू’ जैसे संवाद आने वाले दिनों में बिहार की सियासी बहस का हिस्सा बने रहेंगे। जनता अब देख रही है कि कौन नेता मुद्दों पर बोलेगा और कौन केवल कटाक्षों तक सीमित रहेगा।

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🟢 सवाल-जवाब (FAQ)

योगी आदित्यनाथ ने ‘पप्पू-टप्पू-अप्पू’ किसे कहा?

योगी आदित्यनाथ ने दरभंगा में आयोजित जनसभा में महागठबंधन के नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि ये तीन ‘बंदर’ हैं — पप्पू, टप्पू और अप्पू — जो सच बोल, देख या सुन नहीं सकते।

अखिलेश यादव ने ‘गप्पू-चप्पू’ से क्या मतलब बताया?

अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा के नेता केवल जुमलेबाज़ी करते हैं और जनता को गुमराह करते हैं, इसलिए उन्हें ‘गप्पू और चप्पू’ कहा जा रहा है।

क्या बिहार चुनाव प्रचार में अब मुद्दों की जगह कटाक्ष ले चुके हैं?

हाँ, हाल के भाषणों से यह साफ है कि बिहार चुनाव अब विकास या रोजगार के मुद्दों से हटकर व्यंग्य और व्यक्तिगत आरोपों पर केंद्रित हो गया है।

क्या सोशल मीडिया पर ‘पप्पू बनाम गप्पू’ ट्रेंड कर रहा है?

जी हाँ, ट्विटर (एक्स), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #पप्पू_टप्पू_अप्पू और #गप्पू_चप्पू ट्रेंड कर रहे हैं।

©समाचार दर्पण 2025 | अंजनी कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट

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