सरयू तट महाआरती : हजारों दीपों से जगमगाया कटरा घाट, माघ पूर्णिमा पर उमड़ा आस्था का सैलाब

माघ पूर्णिमा पर गोंडा के कर्नलगंज स्थित कटरा घाट पर आयोजित सरयू तट महाआरती में दीप प्रज्वलित करते श्रद्धालु

✍️संदीप शुक्ला की रिपोर्ट
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समाचार सार : गोंडा जिले के कर्नलगंज स्थित सरयू तट पर माघ पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित भव्य सरयू तट महाआरती में हजारों दीप प्रज्वलित किए गए। नमामि गंगे योजना के अंतर्गत हुए इस आयोजन में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और स्वच्छता संदेश एक साथ प्रवाहित होता दिखा।

सरयू तट महाआरती के दिव्य आयोजन ने माघ पूर्णिमा की संध्या को कर्नलगंज के कटरा घाट पर आध्यात्मिक उत्सव में बदल दिया। गोंडा जनपद की तहसील कर्नलगंज स्थित इस ऐतिहासिक सरयू तट पर रविवार की शाम जैसे ही सूर्य अस्त हुआ, वैसे ही हजारों दीपों की लौ ने अंधकार को चीरते हुए आस्था का प्रकाश फैला दिया। वैदिक मंत्रोच्चारण, घंटियों की ध्वनि और श्रद्धालुओं की एकाग्र उपस्थिति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

माघ पूर्णिमा पर सरयू तट महाआरती का भव्य आयोजन

माघ पूर्णिमा हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी पर्व माना जाता है। इसी पावन अवसर पर वन विभाग एवं जिला गंगा समिति गोंडा द्वारा नमामि गंगे योजना के अंतर्गत सरयू तट महाआरती का आयोजन किया गया। कटरा घाट को विशेष रूप से सजाया गया था। दीपों की कतारें, पुष्प सज्जा और स्वच्छ घाट की छवि श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही थी। आयोजन में ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ नगर के श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में पहुंचे।

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वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुई दिव्य महाआरती

सरयू तट महाआरती के दौरान वैदिक ब्राह्मणों द्वारा शंखनाद और मंत्रोच्चारण के साथ मां सरयू की पूजा-अर्चना की गई। सामूहिक आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दीप हाथ में लेकर नदी माता से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और पर्यावरण संतुलन की कामना की। आरती के समय घाट पर उपस्थित जनसमूह की एकाग्रता और श्रद्धा देखते ही बन रही थी।

हजारों दीपों से रोशन हुआ सरयू तट

कटरा घाट पर जलाए गए हजारों दीपों ने सरयू तट को दिव्य प्रकाश से भर दिया। दीपों की लौ जल की लहरों पर प्रतिबिंबित होकर एक अलौकिक दृश्य रच रही थी। यह दृश्य न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक था, बल्कि नदी संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सामूहिक चेतना का भी संदेश दे रहा था। कई श्रद्धालु इस पल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

सरयू तट महाआरती के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आयोजन को और भी यादगार बना दिया। स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भजन संध्या में ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम की मधुर धुनों पर भक्ति गीतों की प्रस्तुति हुई। ‘जय सरयू मैया’, ‘नदी नहीं मां है’ जैसे भजनों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया और पूरा घाट भक्ति रस में डूब गया।

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स्वच्छता और नदी संरक्षण का दिया गया संदेश

महाआरती के दौरान केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया। नमामि गंगे योजना के अंतर्गत घाट पर स्वच्छता जागरूकता अभियान चलाया गया। श्रद्धालुओं से अपील की गई कि वे सरयू नदी में किसी भी प्रकार का कचरा न डालें और नदी को स्वच्छ एवं निर्मल बनाए रखने में सहयोग करें। हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से सैकड़ों लोगों ने स्वच्छ नदी का संकल्प लिया।

वन विभाग का सतत प्रयास – प्रिया अग्रवाल

गोंडा वन विभाग की अधिकारी प्रिया अग्रवाल ने कहा कि सरयू तट महाआरती जैसे आयोजन विभाग का सतत प्रयास हैं। उन्होंने बताया कि धार्मिक अवसरों पर लोगों को नदी संरक्षण से जोड़ना अत्यंत प्रभावी माध्यम है। राज्य स्वच्छ गंगा मिशन उत्तर प्रदेश द्वारा लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनकी सफलता आमजन की सहभागिता पर निर्भर करती है।

गणमान्य लोगों की रही उल्लेखनीय उपस्थिति

इस आयोजन में पूर्व जिला पंचायत सदस्य एवं बरखंडीनाथ मठ के महंथ सुनील पुरी, जिला पंचायत सदस्य विवेक सिंह, अरुण सिंह, डॉ. अभिषेक गोस्वामी, वन दरोगा अशोक कुमार पांडेय, बाल्मीकि गोस्वामी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इनके साथ-साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, युवा और बच्चे भी आयोजन का हिस्सा बने।

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आस्था, संस्कृति और पर्यावरण का संगम

सरयू तट महाआरती केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का संगम बनकर उभरी। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि यदि धार्मिक भावनाओं को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ा जाए, तो जनभागीदारी स्वतः सुनिश्चित होती है। माघ पूर्णिमा की इस संध्या ने कटरा घाट को आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बना दिया।

स्थानीय लोगों में दिखा विशेष उत्साह

कर्नलगंज और आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं में आयोजन को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। कई लोगों ने इसे सरयू तट पर अब तक का सबसे भव्य आयोजन बताया। स्थानीय नागरिकों का कहना था कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, बल्कि युवाओं में नदी संरक्षण को लेकर सकारात्मक सोच भी विकसित होती है।

भविष्य में और व्यापक आयोजनों की संभावना

आयोजकों ने संकेत दिया कि भविष्य में सरयू तट पर इस तरह के और भी बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उद्देश्य यही रहेगा कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का संदेश जन-जन तक पहुंचे।

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