
डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष संजय सिंह के बयान, पहलवान विवाद और ओलंपिक लक्ष्य पर खुलकर चर्चा
गोंडा जनपद के नवाबगंज क्षेत्र में उस समय सियासी और खेल जगत की हलचल एक साथ देखने को मिली, जब भारतीय कुश्ती संघ (डब्ल्यूएफआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय सिंह ‘बबलू’ एक दिवसीय दौरे पर पहुँचे। इस दौरान उन्होंने धार्मिक, राजनीतिक और खेल से जुड़े कई संदेश दिए, जिनका असर सिर्फ कुश्ती तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय खेल विमर्श तक जाता है।
नवाबगंज पहुँचने पर संजय सिंह ने सर्वप्रथम नंदिनी गौ माता का आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के सांसद करण भूषण सिंह से मुलाकात की। इस मुलाकात को खेल और राजनीति के रिश्तों के रूप में भी देखा जा रहा है, हालाँकि संजय सिंह ने इसे पूरी तरह औपचारिक बताया।
कुलदीप सेंगर मामले पर संजय सिंह की दो-टूक
मीडिया से बातचीत में संजय सिंह ने कुलदीप सेंगर प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और जब तक अदालत का फैसला नहीं आता, किसी को दोषी ठहराना अनुचित है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे कुलदीप सेंगर को निर्दोष मानते हैं और न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा रखते हैं।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब कुश्ती जगत पहले से ही आरोप-प्रत्यारोप और आंदोलनों के दौर से गुजर चुका है। संजय सिंह का मानना है कि भावनाओं के बजाय तथ्यों और न्यायिक निर्णयों पर भरोसा किया जाना चाहिए।
विनेश फोगाट पर बयान: विवाद और व्याख्या
पहलवान विनेश फोगाट द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय सिंह ने कहा कि विनेश अब सक्रिय कुश्ती में नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि “अब उनकी कुश्ती समाप्त हो चुकी है, वह इस समय खेल का हिस्सा नहीं हैं।”
हालाँकि, इसी बयान के साथ संजय सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि विनेश भविष्य में कुश्ती में लौटना चाहें, तो उनका स्वागत है। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएफआई हर खिलाड़ी को समान अवसर देता है, लेकिन चयन पूरी तरह नियमों और रेगुलेशंस के तहत ही होगा।
राष्ट्रीय चयन नियमों की स्पष्ट व्याख्या
संजय सिंह ने बताया कि डब्ल्यूएफआई के नियमों के अनुसार किसी भी खिलाड़ी को चयन ट्रायल में हिस्सा लेने के लिए उसी वर्ष किसी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतना अनिवार्य होता है। उन्होंने यह भी कहा कि विनेश फोगाट ने वर्ष 2024 और 2025 में किसी भी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया है, इसलिए नियमों के अनुसार उनकी स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाती है।
उनका कहना था कि नियम किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं बदले जा सकते, क्योंकि ऐसा करना अन्य खिलाड़ियों के साथ अन्याय होगा।
बजरंग पुनिया को लेकर कड़ा रुख
पहलवान बजरंग पुनिया पर टिप्पणी करते हुए संजय सिंह ने कहा कि वह वर्तमान में प्रतिबंधित पहलवान हैं और कुश्ती से उनका कोई औपचारिक संबंध नहीं रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ खिलाड़ी खेल से ज्यादा राजनीति में रुचि ले रहे हैं।
संजय सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “अगर राजनीति करनी है तो खुलकर कीजिए, लेकिन कुश्ती के अखाड़े में राजनीति मत लाइए।” यह बयान कुश्ती के भविष्य और उसकी स्वायत्तता को लेकर एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
बृजभूषण शरण सिंह प्रकरण पर ‘इंतज़ार’ की सलाह
बृजभूषण शरण सिंह से जुड़े आरोपों पर संजय सिंह ने संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में धैर्य रखना आवश्यक है और आने वाले महीनों में सच्चाई स्वतः सामने आ जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में केवल चार पहलवानों ने आरोप लगाए थे और समय के साथ उनकी स्थिति भी स्पष्ट होगी। संजय सिंह के अनुसार, कुश्ती को व्यक्तिगत आरोपों के बजाय संस्थागत मजबूती की दिशा में आगे बढ़ाना जरूरी है।
अध्यक्ष पद को लेकर विवाद पर जवाब
विनेश फोगाट द्वारा उन्हें अध्यक्ष न मानने के बयान पर संजय सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कुश्ती महासंघ, भारतीय ओलंपिक संघ और भारत सरकार उन्हें वैध अध्यक्ष मानती है।
उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति की असहमति से संस्था की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ता।
ओलंपिक लक्ष्य: पाँच पदकों का सपना
कुश्ती के भविष्य की बात करते हुए संजय सिंह ने कहा कि लंबे समय तक ठप रहने के बाद अब भारतीय कुश्ती दोबारा पटरी पर लौट आई है। उन्होंने जानकारी दी कि भारत में जल्द ही विश्व चैंपियनशिप का आयोजन होने जा रहा है, जो भारतीय कुश्ती के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले ओलंपिक खेलों के लिए भारत का लक्ष्य कम से कम पाँच पदक जीतना है और इसी दिशा में तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं।
285 दिन का विशेष प्रशिक्षण और मानसिक मजबूती
संजय सिंह ने बताया कि खिलाड़ियों के लिए 285 दिनों का विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाया जा रहा है। इसके तहत विदेशी कोचों की नियुक्ति हो चुकी है, जो जल्द ही भारत पहुँचेंगे।
इसके अलावा न्यूट्रिशनिस्ट, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच और खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए साइकोलॉजिस्ट भी नियुक्त किए गए हैं। उनका कहना था कि आधुनिक खेल में मानसिक मजबूती उतनी ही जरूरी है जितनी शारीरिक क्षमता।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि इन सभी व्यवस्थाओं के जरिए भारतीय पहलवानों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जाएगा।
सवाल-जवाब | पाठकों के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
संजय सिंह का गोंडा दौरा क्यों अहम माना जा रहा है?
यह दौरा कुश्ती, राजनीति और संगठनात्मक दिशा—तीनों के संकेत देता है, जिससे भविष्य की रणनीति स्पष्ट होती है।
क्या विनेश फोगाट कुश्ती में वापसी कर सकती हैं?
हाँ, लेकिन डब्ल्यूएफआई के नियमों के अनुसार उन्हें राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रदर्शन करना होगा।
ओलंपिक के लिए भारत का लक्ष्य क्या है?
भारतीय कुश्ती संघ ने अगले ओलंपिक में कम से कम पाँच पदक जीतने का लक्ष्य रखा है।










