होलिका दहन के अवसर पर यूजीसी एक्ट के विरोध में पुतला दहन
ज्ञान चंद मिश्र ने पिंडदान के साथ जताया कड़ा प्रतिरोध

ग्राम बनकटा मिश्र में यूजीसी एक्ट के विरोध के दौरान पुतला दहन और सिर मुंडन कर पिंडदान करते लोगों का लैंडस्केप कोलाज


✍️इरफान अली लारी की रिपोर्ट
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ग्राम बनकटा मिश्र में सैकड़ों लोगों ने किया प्रदर्शन

सलेमपुर (देवरिया)। होलिका दहन के पावन अवसर पर ग्राम बनकटा मिश्र में यूजीसी एक्ट के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया गया। समाजसेवी ज्ञान चंद मिश्र के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों समर्थक शामिल हुए। होलिका दहन के साथ ही यूजीसी एक्ट का प्रतीकात्मक पुतला दहन किया गया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई।

प्रदर्शन के दौरान पूरे क्षेत्र में विरोध की गूंज सुनाई दी। उपस्थित लोगों ने एकजुट होकर अपने आक्रोश को सार्वजनिक रूप से व्यक्त किया और एक्ट को वापस लेने की मांग की। आयोजन को लेकर पहले से ही गांव और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा थी, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे।

ज्ञान चंद मिश्र का संबोधन

सभा को संबोधित करते हुए ज्ञान चंद मिश्र ने कहा कि सरकार द्वारा लाया गया यूजीसी एक्ट सवर्ण समाज के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार के कानून युवाओं के बीच असुरक्षा और भय का वातावरण पैदा कर रहे हैं। उन्होंने इसे “काला कानून” बताते हुए कहा कि जब तक यह वापस नहीं लिया जाएगा, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

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उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि किसी कानून से समाज के किसी वर्ग को अन्याय का अनुभव होता है, तो उस पर व्यापक विचार-विमर्श आवश्यक है। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने की अपील की।

पिंडदान के साथ जताया प्रतीकात्मक विरोध

पुतला दहन के बाद एक समर्थक ने सिर मुंडवाकर पिंडदान किया और एक्ट के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त किया। यह कदम प्रतीकात्मक रूप से कानून के “अंत” की कामना के रूप में बताया गया। इस दृश्य ने उपस्थित लोगों के बीच भावनात्मक माहौल पैदा कर दिया।

कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों ने इसे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध का तरीका बताया। उनका कहना था कि संविधान प्रदत्त अधिकारों के तहत अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है।

पूर्व कानूनों का भी किया उल्लेख

अपने संबोधन में ज्ञान चंद मिश्र ने पूर्व में लागू आरक्षण व्यवस्था और एससी-एसटी एक्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि इन कानूनों से समाज का एक वर्ग प्रभावित हुआ है। उन्होंने बाराबंकी के विष्णु तिवारी प्रकरण का जिक्र करते हुए कानून के दुरुपयोग पर चिंता जताई।

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उन्होंने कहा कि किसी भी कानून का उद्देश्य न्याय होना चाहिए, न कि किसी वर्ग विशेष को नुकसान पहुंचाना। यदि कानून के क्रियान्वयन में दुरुपयोग की संभावना है, तो उसे सुधारने की आवश्यकता है।

समर्थकों की भागीदारी

कार्यक्रम में अमित मिश्र, भोलू मिश्र, डफाली मिश्र, अप्पू मिश्र, डॉ. अजय मिश्र, आनन्द मिश्र सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक्ट के विरोध में अपना समर्थन दर्ज कराया और एकजुटता का प्रदर्शन किया।

स्थानीय लोगों का कहना था कि यह प्रदर्शन केवल एक कानून के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता को भी दर्शाता है।

लोकतांत्रिक तरीके से विरोध की बात

आयोजकों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है। उन्होंने प्रशासन से भी अपेक्षा की कि उनकी भावनाओं को गंभीरता से लिया जाए और किसी भी प्रकार की असुविधा से बचते हुए संवाद का मार्ग अपनाया जाए।

कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा की दृष्टि से स्थानीय प्रशासन की निगरानी भी रही। किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

क्षेत्र में चर्चा का विषय बना प्रदर्शन

होलिका दहन जैसे पारंपरिक पर्व के अवसर पर आयोजित इस विरोध कार्यक्रम ने क्षेत्र में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। कई लोगों का मानना है कि त्योहारों के अवसर पर सामाजिक मुद्दों को उठाना लोगों का ध्यान आकर्षित करने का एक तरीका बनता जा रहा है।

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हालांकि प्रशासन की ओर से यूजीसी एक्ट पर कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है, लेकिन प्रदर्शन ने इस विषय को स्थानीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बना दिया है।

निष्कर्ष

ग्राम बनकटा मिश्र में होलिका दहन के साथ यूजीसी एक्ट के विरोध में किया गया पुतला दहन स्थानीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में सामने आया है। ज्ञान चंद मिश्र और उनके समर्थकों ने इसे छात्रों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार से पुनर्विचार की मांग की है। आने वाले दिनों में इस विषय पर प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

FAQ

प्रदर्शन कहाँ आयोजित किया गया?

प्रदर्शन देवरिया जिले के सलेमपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बनकटा मिश्र में आयोजित किया गया।

प्रदर्शन का नेतृत्व किसने किया?

कार्यक्रम का नेतृत्व समाजसेवी ज्ञान चंद मिश्र ने किया।

विरोध का तरीका क्या था?

होलिका दहन के साथ यूजीसी एक्ट का पुतला दहन किया गया और एक समर्थक ने प्रतीकात्मक रूप से पिंडदान कर विरोध जताया।

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