
मंदिर परिसर में जयकारों की गूंज, महंत ने जताया आभार
कामां। कामां का नाम ‘कामवन’ कराने की घोषणा के बाद क्षेत्र में उत्साह और उल्लास का वातावरण देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में स्थानीय विधायक नौक्षम चौधरी रविवार को कस्बा स्थित प्रख्यात राधा वल्लभ जी मंदिर में दर्शनार्थ पहुंचीं। मंदिर परिसर में उनके आगमन पर श्रद्धालुओं, समर्थकों और क्षेत्रवासियों ने जोरदार स्वागत किया। पूरे परिसर में जयकारों की गूंज सुनाई दी और प्रसाद वितरण के साथ खुशी का इज़हार किया गया।
मंदिर के महंत आशुतोष कौशिक उर्फ नूनू पंडित ने विधायक का स्वागत मोतियों की माला पहनाकर और शॉल ओढ़ाकर किया। उन्होंने कहा कि कामां का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व प्राचीन काल से ‘कामवन’ के रूप में रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा की गई घोषणा और विधायक नौक्षम चौधरी के प्रयासों से इस धाम को उसकी वास्तविक पहचान मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
‘कामवन’ नाम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
महंत कौशिक ने अपने संबोधन में कहा कि ब्रज मंडल के पौराणिक ग्रंथों और लोकपरंपराओं में कामां का उल्लेख ‘कामवन’ के रूप में मिलता है। यह स्थान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ा माना जाता है और ब्रज क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लंबे समय से स्थानीय संत समाज, सामाजिक संगठनों और श्रद्धालुओं द्वारा कामां को ‘कामवन’ घोषित करने की मांग की जाती रही है।
उन्होंने बताया कि यह मांग कोई नई नहीं है, बल्कि वर्षों से जनभावनाओं का हिस्सा रही है। संत समाज और क्षेत्रीय संगठनों ने समय-समय पर ज्ञापन, सभाएं और धार्मिक यात्राओं के माध्यम से इस मुद्दे को उठाया। महंत ने कहा कि कामां को कामवन धाम घोषित करने की मांग सर्वप्रथम उनके द्वारा ही सार्वजनिक रूप से उठाई गई थी, जिसके बाद इस विषय ने व्यापक रूप लिया।
सप्तकोशी परिक्रमा से जुड़ी पहल
महंत आशुतोष कौशिक ने बताया कि कामवन की ऐतिहासिक पहचान को पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से उन्होंने सप्तकोशी परिक्रमा की शुरुआत की थी। यह परिक्रमा अब एक नियमित धार्मिक आयोजन का स्वरूप ले चुकी है और मंगलवार को इसकी 33वीं परिक्रमा आयोजित की जाएगी। उनका कहना था कि यह पहल केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जागरण का माध्यम भी है।
उन्होंने विश्वास जताया कि कामां को कामवन धाम के रूप में स्थापित करने से ब्रज क्षेत्र की पहचान को नई मजबूती मिलेगी और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय व्यापार, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलने की संभावना है।
विधायक ने जताया आभार
इस अवसर पर विधायक नौक्षम चौधरी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि यह सम्मान किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि समस्त क्षेत्रवासियों की आस्था और विश्वास का है। उन्होंने कहा कि कामां को कामवन के रूप में मान्यता दिलाना जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग थी, जिसे पूरा करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल था।
विधायक ने कहा कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को सहेजना और उसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना उनका संकल्प है। उन्होंने आश्वासन दिया कि कामवन धाम के विकास के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाएंगे।
जनसमर्थन और सामाजिक सहभागिता
मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, संत समाज के सदस्य और स्थानीय युवा मौजूद रहे। विधायक के आगमन पर ढोल-नगाड़ों और पुष्प वर्षा के साथ स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं ने जयकारों के बीच प्रसाद वितरण कर अपनी खुशी जाहिर की।
कार्यक्रम के दौरान कई स्थानीय नागरिकों ने कहा कि कामां की ऐतिहासिक पहचान को पुनर्जीवित करने का यह निर्णय क्षेत्र के गौरव से जुड़ा है। उनका मानना है कि ‘कामवन’ नाम से इस क्षेत्र को धार्मिक मानचित्र पर एक अलग पहचान मिलेगी।
धार्मिक पर्यटन और विकास की संभावनाएँ
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रज क्षेत्र से जुड़े स्थानों का धार्मिक महत्व राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है। ऐसे में कामां को कामवन धाम के रूप में विकसित करने से यहां तीर्थयात्रियों की संख्या में वृद्धि हो सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और अन्य व्यवसायों को लाभ मिलेगा।
विधायक ने संकेत दिया कि भविष्य में कामवन धाम के लिए बुनियादी ढांचे के विकास, सड़क सुधार, स्वच्छता व्यवस्था और धार्मिक आयोजनों के लिए विशेष योजनाएं तैयार की जाएंगी।
सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा
कामां को कामवन घोषित करने की मांग वर्षों से सामाजिक और धार्मिक मंचों पर उठती रही है। अब जब यह घोषणा सार्वजनिक रूप से सामने आई है, तो इसे क्षेत्रीय अस्मिता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के रूप में देखा जा रहा है। महंत और विधायक दोनों ने इसे जनभावनाओं की जीत बताया।
कार्यक्रम का समापन सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने कामवन धाम के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
FAQ
कामां को कामवन घोषित करने की मांग कब से चल रही थी?
यह मांग वर्षों से संत समाज, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों द्वारा उठाई जाती रही है। समय-समय पर ज्ञापन और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से इसे सार्वजनिक रूप से सामने रखा गया।
सप्तकोशी परिक्रमा का उद्देश्य क्या है?
सप्तकोशी परिक्रमा का उद्देश्य कामवन की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को पुनर्स्थापित करना तथा सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देना है।










