भव्य हिंदू सम्मेलन सिरोंचा में आयोजित होने जा रहा है, जो न केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन है, बल्कि हिंदू समाज की संगठनात्मक शक्ति, सामाजिक चेतना और सनातन मूल्यों को एक नई दिशा देने का व्यापक प्रयास भी है। महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले के सिरोंचा क्षेत्र में सकल हिंदू समाज के तत्वावधान में होने वाला यह सम्मेलन 6 फरवरी को सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक क्रीडा संकुल परिसर में संपन्न होगा। आयोजन का उद्देश्य स्पष्ट है—हिंदू समाज को वैचारिक रूप से सशक्त करना, सामाजिक एकता को मजबूत करना और सनातन संस्कृति की निरंतरता को सुरक्षित रखना।
सिरोंचा में होने वाला भव्य हिंदू सम्मेलन हिंदू समाज की संगठनात्मक मजबूती, सनातन संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक एकता के संदेश के साथ आयोजित किया जा रहा है। देश के विभिन्न वैचारिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े मार्गदर्शकों की उपस्थिति इस आयोजन को विशेष बना रही है।
सिरोंचा में क्यों महत्वपूर्ण है यह भव्य हिंदू सम्मेलन
सिरोंचा जैसे सीमावर्ती और सामाजिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन अपने आप में कई संदेश देता है। यह क्षेत्र सांस्कृतिक विविधता के साथ-साथ सामाजिक चुनौतियों से भी जूझता रहा है। ऐसे में हिंदू समाज की एकजुटता, वैचारिक स्पष्टता और संगठनात्मक मजबूती यहां विशेष महत्व रखती है। सम्मेलन के आयोजकों का मानना है कि जब समाज संवाद, विचार और संस्कार के साझा मंच पर आता है, तभी दीर्घकालिक सामाजिक संतुलन संभव हो पाता है।
सनातन संस्कृति के संरक्षण का संकल्प
भव्य हिंदू सम्मेलन सिरोंचा में केवल भाषणों और औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रहेगा। यह सनातन संस्कृति के संरक्षण और पुनर्स्मरण का मंच बनेगा। आज के दौर में जब सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक मूल्यों और परंपराओं पर कई स्तरों से प्रश्न खड़े हो रहे हैं, तब इस प्रकार के सम्मेलन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। आयोजकों का कहना है कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की समग्र दृष्टि है, जिसे नई पीढ़ी तक सही संदर्भों में पहुंचाना आवश्यक है।
धार्मिक आशीर्वाद और वैचारिक मार्गदर्शन
इस भव्य हिंदू सम्मेलन को अयोध्या से पधार रहे विश्वब्रह्म श्री श्री श्री पूज्यवीर धर्मजा स्वामीजी का पावन आशीर्वाद प्राप्त होगा। उनकी उपस्थिति कार्यक्रम को आध्यात्मिक गहराई प्रदान करेगी। इसके साथ ही तेलंगाना ग्रामीण विकास से जुड़े प्रांतीय समन्वयक और पूर्व प्रिंसिपल जिन्ना सत्यनारायण रेड्डी विशेष मार्गदर्शन देंगे। उनका अनुभव सामाजिक संगठन, शिक्षा और ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में व्यापक रहा है, जिससे सम्मेलन में भाग लेने वाले लोगों को व्यावहारिक दृष्टिकोण भी मिलेगा।
संगठन, समाज और राष्ट्र निर्माण की बात
सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, नागपुर के सह-प्रचारक परीक्षित जावले मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगे। वे हिंदू समाज की संगठनात्मक भूमिका, सामाजिक अनुशासन और राष्ट्र निर्माण में नागरिक जिम्मेदारियों जैसे विषयों पर अपने विचार रखेंगे। उनका संबोधन विशेष रूप से युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरक माना जा रहा है, क्योंकि संगठनात्मक चेतना ही किसी भी समाज को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करती है।
सामूहिक सहभागिता और समन्वय
इस भव्य हिंदू सम्मेलन की समन्वय जिम्मेदारी वेंकटस्वामी पोलमपल्ली गुरुस्वामी संभाल रहे हैं। आयोजन में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। सकल हिंदू समाज के बैनर तले होने वाला यह सम्मेलन किसी एक वर्ग या संगठन तक सीमित न रहकर व्यापक सामाजिक संवाद का प्रयास है, जिसमें हर आयु वर्ग और सामाजिक पृष्ठभूमि के लोगों को जोड़ने की कोशिश की गई है।
महाप्रसाद और सामाजिक समरसता
कार्यक्रम के समापन के बाद सभी उपस्थित लोगों के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था की गई है। आयोजकों के अनुसार, यह केवल भोजन नहीं बल्कि सामाजिक समरसता और समानता का प्रतीक है। एक ही पंक्ति में बैठकर प्रसाद ग्रहण करना समाज में आपसी भेदभाव को कम करने और सामूहिकता की भावना को मजबूत करता है।
हिंदू समाज से व्यापक भागीदारी की अपील
सकल हिंदू समाज की ओर से अपील की गई है कि अधिक से अधिक लोग इस भव्य हिंदू सम्मेलन सिरोंचा में शामिल होकर इसे सफल बनाएं। आयोजकों का मानना है कि जब समाज स्वयं आगे बढ़कर ऐसे आयोजनों में भाग लेता है, तभी उनका उद्देश्य पूर्ण होता है। यह सम्मेलन किसी राजनीतिक या संकीर्ण एजेंडे के बजाय सामाजिक जागरूकता, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और वैचारिक संवाद को केंद्र में रखता है।
कुल मिलाकर, सिरोंचा में आयोजित होने वाला भव्य हिंदू सम्मेलन वर्तमान सामाजिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। यह आयोजन यह संदेश देता है कि सनातन संस्कृति केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की दिशा भी है—बशर्ते समाज उसे समझदारी, संवाद और संगठन के साथ आगे बढ़ाए।







