राजस्थान सरकार के बेमिसाल 2 साल के दावों के बीच यदि ज़मीनी हकीकत देखनी हो, तो कामां क्षेत्र की ग्राम पंचायत कनवाड़ा की मुख्य सड़क पर्याप्त उदाहरण पेश करती है। कामां–कनवाड़ा रोड पर बारिश के बाद जलभराव, कीचड़ और गहरे गड्ढों ने हालात ऐसे बना दिए हैं कि पैदल चलना तक दूभर हो गया है। स्कूली बच्चे, बुज़ुर्ग, महिलाएं और दुपहिया वाहन चालक रोज़ाना जोखिम उठाकर इसी रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं। विडंबना यह है कि यह इलाका विधायक नौक्षम चौधरी और स्वयं मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के गृह जिले से जुड़ा हुआ है।
समाचार सार (हूक पॉइंट): मुख्यमंत्री के गृह जिले में स्थित ग्राम पंचायत कनवाड़ा की मुख्य सड़क बारिश में तालाब बन जाती है। नालियों के अभाव और जर्जर सड़क के कारण स्कूली बच्चों से लेकर ब्रज यात्रियों तक को परेशानी, कई बार शिकायतों के बावजूद पीडब्ल्यूडी समाधान में विफल।
बारिश आते ही सड़क बनी जलकुंड, आवागमन ठप
कामां–कनवाड़ा रोड पर जैसे ही बारिश होती है, सड़क पर पानी भर जाता है। गहरे गड्ढों में जमा पानी कीचड़ में बदलकर पूरे मार्ग को फिसलनभरा बना देता है। हालात इतने खराब हो जाते हैं कि राहगीरों को समझ ही नहीं आता कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां। दुपहिया वाहन चालक कई बार संतुलन खोकर गिर चुके हैं, जबकि पैदल चलने वालों के कपड़े और जूते कीचड़ से सन जाते हैं।
स्कूली बच्चों की मजबूरी, रोज़ खतरे के बीच पढ़ाई का सफर
सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। सुबह-शाम इसी सड़क से होकर स्कूल जाने वाले बच्चों को जलभराव से भरे गड्ढों के बीच निकलना पड़ता है। कई अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के गिरने-फिसलने का डर हमेशा बना रहता है, लेकिन वैकल्पिक रास्ता न होने से मजबूरी में इसी सड़क का इस्तेमाल करना पड़ता है।
नालियों का अभाव, घरों का पानी भी सड़क पर
स्थानीय लोगों के अनुसार समस्या की जड़ सड़क किनारे उचित नालियों का न होना है। घरों से निकलने वाला पानी और बारिश का पानी निकासी के अभाव में सीधे सड़क पर जमा हो जाता है। नतीजतन सड़क हर समय गीली और कीचड़ से भरी रहती है। यदि पक्की नालियों का निर्माण कर दिया जाए, तो जलभराव की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है।
ब्रज यात्रियों और दर्जनों गांवों की मुश्किलें
यह सड़क केवल एक ग्राम पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े दर्जनों गांवों के लोग इसी मार्ग से आवागमन करते हैं। साथ ही ब्रज क्षेत्र से जुड़े यात्री भी इसी रास्ते का उपयोग करते हैं। जलभराव के कारण उन्हें भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार यात्री रास्ता बदलने को मजबूर होते हैं, जिससे दूरी और समय दोनों बढ़ जाते हैं।
शिकायतें हुईं, समाधान नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर पीडब्ल्यूडी विभाग और उच्च अधिकारियों से कई बार शिकायत की जा चुकी है। मौखिक और लिखित दोनों स्तरों पर अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। बारिश के हर मौसम में वही स्थिति दोहराई जाती है—सड़क पानी में डूबी, लोग परेशान और प्रशासन मौन।
विकास के दावों बनाम ज़मीनी सच्चाई
राज्य सरकार की ओर से विकास और बुनियादी ढांचे के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन ग्राम पंचायत कनवाड़ा की यह सड़क उन दावों पर सवाल खड़े करती है। जब मुख्यमंत्री के गृह जिले में ही ग्रामीण ऐसी नारकीय स्थिति में जीवन जीने को मजबूर हों, तो दूर-दराज़ इलाकों की स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
ग्रामीणों की मांग: नाली और सड़क का स्थायी समाधान
स्थानीय निवासियों की मांग है कि सड़क किनारे पक्की नालियों का निर्माण कराया जाए और सड़क की मरम्मत कर उसे ऊंचा किया जाए, ताकि भविष्य में जलभराव न हो। लोगों का कहना है कि अस्थायी पैचवर्क से समस्या हल नहीं होगी, इसके लिए ठोस और स्थायी योजना की आवश्यकता है।
कुल मिलाकर, राजस्थान सरकार के बेमिसाल 2 साल के दावों के बीच ग्राम पंचायत कनवाड़ा की यह तस्वीर विकास की असलियत दिखाती है। जब तक नाली निर्माण और सड़क सुधार जैसे बुनियादी काम प्राथमिकता में नहीं आते, तब तक ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और यात्रियों की परेशानी यूं ही बनी रहेगी।







