धर्मांतरण का सनसनीखेज आरोप : प्रेम जाल, बंधक यातनाएं और जबरन खतना की कहानी

धर्मांतरण के सनसनीखेज आरोप मामले में कोतवाली नगर पुलिस स्टेशन और जांच करती पुलिस

✍️चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
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धर्मांतरण का सनसनीखेज आरोप एक बार फिर सामाजिक, कानूनी और मानवीय स्तर पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। उत्तर प्रदेश से सामने आए इस मामले में एक युवक ने आरोप लगाया है कि उसे प्रेम जाल में फंसाकर पहले बंधक बनाया गया, फिर शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी गईं और अंततः जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया। पीड़ित का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में उसका जबरन खतना भी कराया गया। मामले के सामने आने के बाद न सिर्फ़ स्थानीय स्तर पर, बल्कि व्यापक सामाजिक विमर्श शुरू हो गया है।

समाचार सार: युवक का आरोप है कि चार वर्षों तक उसे एक संगठित गिरोह के चंगुल में बंधक बनाकर रखा गया। किसी तरह जान बचाकर भागने के बाद भी उसे लगातार धमकियां मिल रही हैं। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कैसे शुरू हुआ प्रेम जाल

पीड़ित युवक भूपेंद्र प्रताप चौहान के अनुसार, वह वर्ष 2019 में रोज़गार के सिलसिले में दुबई गया था। वहीं रहते हुए वर्ष 2021 में उसकी पहचान सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप कॉल के ज़रिए एक युवती रुखसार से हुई। शुरुआत में बातचीत सामान्य थी, लेकिन धीरे-धीरे संवाद भावनात्मक रिश्ते में बदल गया। युवक का आरोप है कि इसी दौरान उसे प्रेम जाल में फंसाया गया और मानसिक रूप से इस तरह प्रभावित किया गया कि वह सब कुछ छोड़कर भारत लौट आया।

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भारत लौटने के बाद बदली ज़िंदगी

दुबई से लौटने के बाद भूपेंद्र, रुखसार से मिलने उसके घर पहुंचा। यहीं से उसकी ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई। आरोप है कि उसे बाहर जाने से रोका गया, फोन और संपर्क साधनों पर नियंत्रण रखा गया और धीरे-धीरे वह बंधक की तरह रहने को मजबूर हो गया। युवक का कहना है कि विरोध करने पर उसे डराया-धमकाया जाता था और जान से मारने की धमकी दी जाती थी।

जबरन खतना और धर्मांतरण का आरोप

पीड़ित का सबसे गंभीर आरोप यह है कि वर्ष 2022 में उसका जबरन खतना कराया गया। इसके बाद मौलाना को बुलाकर उसका धर्मांतरण कराया गया और नाम भी बदल दिया गया। युवक का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में उसकी सहमति नहीं थी और वह मानसिक तथा शारीरिक दबाव में था। बाद में उसका निकाह भी उसी युवती से करा दिया गया।

भागने की कोशिशें और लगातार धमकियां

भूपेंद्र का कहना है कि वह कई बार वहां से भागने की कोशिश करता रहा, लेकिन हर बार असफल रहा। पहरा, डर और धमकियों के बीच वह लगभग चार साल तक उसी वातावरण में फंसा रहा। अंततः 30 जनवरी 2026 को वह किसी तरह मौका पाकर वहां से भाग निकला और अपने घर पहुंचा। घर लौटकर जब उसने परिजनों को पूरी घटना बताई तो हर कोई सिहर उठा।

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संगठित गिरोह होने का दावा

पीड़ित युवक ने आरोप लगाया है कि यह पूरा मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा है। उसका दावा है कि संस्था के माध्यम से पहले भी कई लोगों को इसी तरह प्रेम जाल में फंसाकर धर्मांतरण कराया गया है। पिछले वर्षों में सामने आए मामलों से इस दावे को लेकर चर्चाएं और तेज़ हो गई हैं।

पुलिस का पक्ष और जांच

मामले में पुलिस का कहना है कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। कोतवाली नगर के प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह के अनुसार, पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कानूनी और सामाजिक सवाल

धर्मांतरण का यह सनसनीखेज आरोप केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि यह समाज, क़ानून और प्रशासन—तीनों के लिए चुनौती बनकर सामने आया है। सवाल यह भी है कि क्या ऐसे मामलों में समय रहते हस्तक्षेप हो पाता है या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी, लेकिन फिलहाल यह मामला कई परतों में उलझा हुआ है।

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फिलहाल, पीड़ित युवक अपने परिवार के साथ सुरक्षित है, लेकिन आरोपियों की ओर से लगातार मिल रही धमकियों ने चिंता बढ़ा दी है। जांच एजेंसियों के सामने अब यह चुनौती है कि तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल कर सच को सामने लाया जाए, ताकि दोषी पाए जाने वालों पर सख़्त कार्रवाई हो सके और पीड़ित को न्याय मिल सके।

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