लालाराम की हत्या में वांछित डकैत सीमा परिहार का भाई 27 साल बाद गिरफ्तार—यह सिर्फ़ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के उस दौर की याद दिलाने वाली घटना है, जब बीहड़ों में सक्रिय गिरोह कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बने हुए थे। औरैया जिले की अजीतमल कोतवाली पुलिस ने 1999 के बहुचर्चित लालाराम हत्याकांड में वांछित रहे रामवीर को गिरफ्तार कर लिया है, जो कुख्यात निर्भय सिंह गैंग से जुड़ा बताया जाता है। हैरानी की बात यह है कि रामवीर बीते 27 वर्षों से लगातार अपनी पहचान छिपाकर अलग-अलग इलाकों में रह रहा था।
27 साल पुराना लालाराम हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में है। पुलिस ने डकैत सीमा परिहार के भाई रामवीर को गिरफ्तार कर लिया, जो निर्भय सिंह गैंग से जुड़ा था। गिरफ्तारी के बाद मामला सिर्फ़ अपराध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक, राजनीतिक और भावनात्मक बहस का विषय बन गया है।
कैसे 27 साल तक पुलिस को चकमा देता रहा आरोपी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अयाना थाना क्षेत्र के गांव बवाइन निवासी रामवीर ने 1999 में लालाराम की हत्या के बाद खुद को पूरी तरह भूमिगत कर लिया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने न केवल ठिकाने बदले, बल्कि अपनी पहचान भी छिपाई। कभी वह दिहाड़ी मजदूर बना, तो कभी रिश्तेदार के घर शरण ली। हाल के वर्षों में वह दिबियापुर थाना क्षेत्र के गांव ककरई में रह रहा था, जहां स्थानीय लोगों को भी उसके असली अतीत की भनक नहीं थी।
1999 का लालाराम हत्याकांड: क्या था पूरा मामला
लालाराम जाटव, निवासी ग्राम शाला सिमार चौकी अनंतराम, थाना अजीतमल, की हत्या 1999 में हुई थी। यह हत्या उस दौर में हुई जब निर्भय सिंह गैंग का इलाके में खौफ था। हत्या के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की, जिसमें डकैत निर्भय, सलीम और रामवीर समेत कुल नौ नाम सामने आए थे। यह मामला सिर्फ़ एक व्यक्तिगत दुश्मनी का नहीं, बल्कि उस समय सक्रिय संगठित अपराध नेटवर्क का हिस्सा माना गया।
निर्भय और सलीम समेत तीन मुठभेड़ में ढेर
जांच के दौरान पुलिस ने कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की। निर्भय और सलीम समेत तीन कुख्यात अपराधी पुलिस मुठभेड़ में मारे गए। कुछ आरोपियों को जेल भेजा गया, लेकिन रामवीर लगातार फरार रहा। समय बीतने के साथ यह मामला ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा था, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में रामवीर का नाम अब भी वांछित अपराधियों की सूची में दर्ज था।
गैर जमानती वारंट और लंबी फरारी
सीओ मनोज गंगवार के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ 1999 में हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। अदालत में पेश न होने के कारण उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। बावजूद इसके, वह वर्षों तक कानून की पकड़ से बाहर रहा। हाल ही में मिली एक गोपनीय सूचना के आधार पर अजीतमल पुलिस ने योजना बनाकर ककरई गांव में घेराबंदी की और उसे गिरफ्तार कर लिया।
भाई की गिरफ्तारी पर सीमा परिहार का वीडियो बयान
रामवीर की गिरफ्तारी के बाद मामला उस समय और संवेदनशील हो गया, जब डकैत और बिग बॉस फेम सीमा परिहार ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो जारी किया। सीमा परिहार ने आरोप लगाया कि उनके भाई को बिना किसी पूर्व सूचना और बिना वारंट के उठाया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस 1999 के एक पुराने मामले का हवाला देकर कार्रवाई कर रही है।
“परिवार को बेवजह बनाया जा रहा है निशाना”
सीमा परिहार ने वीडियो में दावा किया कि वर्ष 2000 में आत्मसमर्पण करने के बाद से वह शांतिपूर्ण जीवन जी रही हैं। उनके अनुसार, उन्होंने समाज की मुख्यधारा में लौटने की कोशिश की, लेकिन आज भी उनका नाम और परिवार अतीत के कारण निशाने पर है। उन्होंने कहा कि यदि कानून के अनुसार कार्रवाई हो रही है, तो प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री और डीजीपी से न्याय की गुहार
सीमा परिहार ने योगी आदित्यनाथ और पुलिस महानिदेशक से अपील करते हुए अपने भाई की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना है कि कानून से उन्हें कोई परहेज नहीं, लेकिन परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित न किया जाए।
पुलिस का पक्ष: कानून के तहत हुई कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गिरफ्तारी पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। आरोपी लंबे समय से फरार था और उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी था। पुलिस के अनुसार, किसी भी तरह की मनमानी या दबाव में कार्रवाई नहीं की गई है।
क्या फिर खुलेगा 27 साल पुराना केस?
रामवीर की गिरफ्तारी के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या लालाराम हत्याकांड की पूरी परतें अब सामने आएंगी। क्या पुराने गवाह फिर से बयान देंगे, और क्या अदालत में यह मामला निर्णायक मोड़ तक पहुंचेगा—यह आने वाला समय बताएगा। फिलहाल, आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
अतीत, कानून और वर्तमान की टकराहट
लालाराम हत्याकांड में 27 साल बाद हुई यह गिरफ्तारी सिर्फ़ एक अपराधी की पकड़ नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि कानून की प्रक्रिया भले धीमी हो, लेकिन रुकती नहीं। साथ ही, यह मामला उन लोगों की पीड़ा भी उजागर करता है, जो अतीत से बाहर निकलकर नया जीवन शुरू करना चाहते हैं। अब निगाहें अदालत की अगली कार्यवाही पर टिकी हैं।







