हैदरगढ़ कोतवाली क्षेत्र में गुरुवार देर रात हुए एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को गहरे शोक में डुबो दिया। तेज रफ्तार और लापरवाही ने दो जिंदगियों को छीन लिया, लेकिन उनके पीछे जो दर्द, आंसू और उजड़े सपने रह गए, वे किसी एक परिवार तक सीमित नहीं हैं। पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार को जब दोनों मृतकों के शव गांव पहुंचे, तो परिजनों की चीख-पुकार से माहौल दहल उठा। गांव की गलियों में मातम पसरा रहा और दोनों घरों में चूल्हा तक नहीं जला।
विपरीत दिशा से आई पिकअप ने छीनी दो जिंदगियां
जानकारी के अनुसार, गोसूपुर गांव निवासी रामू (40) अपने दोस्त अरुण (27) के साथ गुरुवार रात बाइक से हैदरगढ़ से घर लौट रहे थे। खरसतिया डिवाइडर कट और धर्मकांटा के बीच अचानक विपरीत दिशा से आ रही एक तेज रफ्तार पिकअप ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार सड़क पर दूर जा गिरे और पिकअप चालक मौके से फरार हो गया।
हादसे में अरुण की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि रामू को गंभीर हालत में लखनऊ ट्रामा सेंटर ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। एक ही पल में दो घरों की खुशियां उजड़ गईं और पूरा गांव सदमे में आ गया।
सात मासूमों के सिर से उठा पिता का साया
मृतक रामू अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके सात बच्चे हैं, जिनमें छह बेटियां और एक छोटा बेटा शामिल है। सीमित कृषि भूमि होने के कारण रामू दूसरों की डीसीएम चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनकी मेहनत ही उनके बच्चों की दुनिया थी।
शव गांव पहुंचते ही पत्नी बदहवास हो गईं और देखते ही देखते बेहोश होकर गिर पड़ीं। बच्चों की आंखों में डर और अनजाना भविष्य साफ झलक रहा था। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि रामू बेहद जिम्मेदार और मेहनती व्यक्ति थे, जिनका जीवन सिर्फ अपने बच्चों के इर्द-गिर्द घूमता था।
अरुण की मौत से टूट गया बुजुर्ग पिता का सहारा
चार भाइयों में दूसरे नंबर के अरुण अविवाहित थे और खेती में अपने पिता का हाथ बंटाते थे। परिवार की आर्थिक और भावनात्मक जिम्मेदारी धीरे-धीरे उन्हीं पर आ रही थी। उनकी मौत ने बुजुर्ग पिता को भीतर तक तोड़ दिया है। अंतिम संस्कार के दौरान पिता की आंखों में बेटे को खोने का दर्द साफ नजर आ रहा था।
गांव वालों के अनुसार अरुण शांत स्वभाव का था और परिवार के लिए हमेशा आगे खड़ा रहता था। उसकी असमय मौत ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सड़क पर लापरवाही कब थमेगी।
पुलिस के हाथ अब तक खाली, पिकअप वाहन फरार
हादसे के बाद से ही पुलिस फरार पिकअप वाहन की तलाश में जुटी हुई है, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। कोतवाल अभिमन्यु मल्ल ने बताया कि आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और जल्द ही वाहन की पहचान कर ली जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर आए दिन भारी वाहन गलत दिशा में तेज रफ्तार से चलते हैं, लेकिन निगरानी की कमी के कारण हादसे थम नहीं रहे।
रामनगर में दूसरा हादसा : पिता ने खोया दूसरा बेटा
इसी बीच रामनगर कोतवाली क्षेत्र से भी एक दर्दनाक खबर सामने आई है। महादेवा-भैरमपुर मार्ग पर गर्री गांव के पास गन्ना लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आकर मधवा जलालपुर गांव निवासी आनंद (30) की मौत हो गई। यह हादसा रामलोचन मौर्य के परिवार के लिए दूसरा बड़ा झटका साबित हुआ।
रामलोचन मौर्य पहले ही साल 2008 में अपने बड़े बेटे उदयराज को बाढ़ के पानी में खो चुके हैं। अब दूसरे बेटे आनंद की मौत से पूरा परिवार टूट चुका है। आनंद अपने पीछे दो बेटियां और तीन साल का एक बेटा छोड़ गया है, जिनकी परवरिश और भविष्य अब अनिश्चित हो गया है।
सवालों के घेरे में सड़क सुरक्षा व्यवस्था
लगातार हो रहे इन हादसों ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक नियमों और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गलत दिशा में दौड़ते वाहन, ओवरस्पीडिंग और भारी वाहनों की लापरवाही आम लोगों की जान पर भारी पड़ रही है।
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि संबंधित मार्गों पर सख्त निगरानी, स्पीड ब्रेकर, चेतावनी संकेत और नियमित चेकिंग की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े।
संबंधित सवाल-जवाब
हैदरगढ़ हादसा कैसे हुआ?
हादसा तब हुआ जब विपरीत दिशा से आ रही तेज रफ्तार पिकअप ने बाइक को टक्कर मार दी।
हादसे में कितने लोगों की मौत हुई?
इस हादसे में दो दोस्तों की मौत हो गई।
पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
पुलिस सीसीटीवी फुटेज के जरिए फरार पिकअप वाहन की तलाश कर रही है।
रामनगर हादसे में कौन पीड़ित हुआ?
रामलोचन मौर्य के बेटे आनंद की ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आने से मौत हो गई।








