ऊबड़-खाबड़ रास्तों से विकास की मजबूत सड़क तक
एक सोच ने कैसे बदल दी ग्राम पंचायत की तक़दीर

चित्रकूट जिले के ग्राम पंचायत गढ़चपा में ग्रामीणों के साथ विकास कार्यों का निरीक्षण करते ग्राम प्रधान प्रतिनिधि एवं जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि अरुण सिंह बघेल उर्फ मिंटू सिंह
संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
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चित्रकूट जिले के पठारी क्षेत्र की तलहटी में स्थित ग्राम पंचायत गढ़चपा कभी बुनियादी सुविधाओं के अभाव का प्रतीक मानी जाती थी। हालात इतने बदतर थे कि गांव और उसके मजरों तक पहुंचने के लिए कोई पक्के रास्ते नहीं थे। ग्रामीणों को ऊबड़-खाबड़, पथरीले और संकरे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता था। बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती थी, जब नाले उफान पर होते थे और पूरा संपर्क टूट जाता था।

बीमारी, दुर्घटना या आपात स्थिति में एंबुलेंस जैसी आवश्यक सेवाएं गांव के भीतर तक नहीं पहुंच पाती थीं। ऐसे में ग्रामीणों को मरीजों को खाट या निजी साधनों से दूर-दराज के मुख्य मार्गों तक ले जाना पड़ता था। लेकिन बीते साढ़े चार वर्षों में यह तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।

जब सोच बदली, तो तस्वीर भी बदल गई

ग्राम पंचायत गढ़चपा में वर्तमान ग्राम प्रधान ननकी देवी हैं, जबकि ग्राम प्रधान प्रतिनिधि के रूप में अरुण सिंह बघेल उर्फ मिंटू सिंह सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मिंटू सिंह ने प्रतिनिधि मात्र की भूमिका तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि गांव की जमीनी समस्याओं को प्राथमिकता देकर विकास को दिशा दी।

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उनकी सोच स्पष्ट थी—पहले गांव को जोड़ना, फिर सुविधाओं को मजबूत करना। इसी सोच के तहत सबसे पहले उन मजरों और टोले की पहचान की गई, जहां तक पहुंचना सबसे कठिन था।

मजरों तक पहुंचने की राह हुई आसान

ग्राम पंचायत के गाढ़ा कछार, बड़े हार, जरका पुरवा जैसे कई मजरे वर्षों से उपेक्षा का शिकार थे। इन क्षेत्रों में न तो पक्के रास्ते थे और न ही बरसात में सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि की पहल पर यहां संपर्क मार्गों का निर्माण कराया गया।

जहां-जहां बरसाती नाले बाधा बनते थे, वहां पुलियों का निर्माण कराया गया। इससे न केवल पैदल बल्कि दोपहिया और चारपहिया वाहनों का आवागमन भी संभव हो सका।

ग्राम पंचायत से लेकर जिला पंचायत तक समन्वय

ग्राम पंचायत गढ़चपा के विकास में ग्राम पंचायत के साथ-साथ जिला पंचायत की भी अहम भूमिका रही है। उल्लेखनीय है कि अरुण सिंह बघेल उर्फ मिंटू सिंह की भाभी अनीता सिंह बघेल वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य हैं।

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जिला पंचायत से स्वीकृत विकास कार्यों की निगरानी और क्रियान्वयन प्रतिनिधि के रूप में मिंटू सिंह द्वारा किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त सांसद और विधायक निधि के माध्यम से भी सड़कों के निर्माण का कार्य कराया जा रहा है, जिनमें से कुछ कार्य अभी प्रगति पर हैं।

एंबुलेंस सेवा तक पहुंच, ग्रामीणों को राहत

सड़क और पुलिया निर्माण का सबसे बड़ा लाभ स्वास्थ्य सेवाओं में दिखाई दिया है। पहले जहां एंबुलेंस गांव के भीतर प्रवेश नहीं कर पाती थी, अब वही एंबुलेंस अधिकांश मजरों तक पहुंचने लगी है।

गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए यह बदलाव किसी जीवनरेखा से कम नहीं है।

सिर्फ सड़क नहीं, समग्र विकास पर जोर

गढ़चपा में विकास को केवल सड़कों तक सीमित नहीं रखा गया। गांव में मुक्तिधाम का निर्माण कर ग्रामीणों को बड़ी राहत दी गई। वहीं खेल मैदान के निर्माण से बच्चों और युवाओं को खेल-कूद का अवसर मिला है।

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पेयजल, शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं पर भी निरंतर ध्यान दिया जा रहा है ताकि गांव का कोई भी परिवार विकास से वंचित न रह जाए।

‘चलो गांव की ओर’ अभियान की शुरुआत गढ़चपा से

1 जनवरी 2026 से ‘चलो गांव की ओर’ जागरूकता अभियान की शुरुआत ग्राम पंचायत गढ़चपा से की गई। अभियान के संस्थापक अध्यक्ष संजय सिंह राणा ने गांव पहुंचकर विकास कार्यों का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से सीधा संवाद किया।

ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि यदि हर ग्राम पंचायत में ऐसी ही सोच रखने वाले प्रतिनिधि हों, तो गांवों की तस्वीर बदली जा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ग्राम पंचायत गढ़चपा में सबसे बड़ा बदलाव क्या रहा?

गांव और मजरों को जोड़ने वाले पक्के रास्तों और नालों पर पुलियों का निर्माण सबसे बड़ा बदलाव रहा।

क्या अब स्वास्थ्य सेवाएं गांव तक पहुंच पा रही हैं?

हां, सड़क निर्माण के बाद एंबुलेंस सेवा अब अधिकांश मजरों तक पहुंच रही है।

‘चलो गांव की ओर’ अभियान की शुरुआत कहां से हुई?

इस अभियान की शुरुआत 1 जनवरी 2026 से ग्राम पंचायत गढ़चपा से हुई।

चलो गांव की ओर अभियान का प्रतीकात्मक चित्र, जिसमें ग्रामीण जीवन, खेती, पशुपालन और गांव के समग्र विकास को दर्शाया गया है
“चलो गांव की ओर” — ग्रामीण भारत की जड़ों से जुड़कर विकास, जागरूकता और आत्मनिर्भर गांव की ओर बढ़ते कदम।

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