सपा के पूर्व विधायक की कथित मजार पर बुलडोजर, सरकारी जमीन कब्जाने की साजिश का खुलासा

📝 रिपोर्ट : अब्दुल मोबीन सिद्दीकी
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बलरामपुर जिले में शनिवार रात पुलिस विभाग ने एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई कर सादुल्लाहनगर थाना परिसर में बनाई गई अवैध मजार को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। प्रशासन के निर्देशन में पुलिस टीम ने बुलडोजर चलवाकर मजार को गिराया और उसका समूचा मलबा नजदीक के तालाब में डलवा दिया। इस कार्रवाई के दौरान थाना परिसर से आवागमन को पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया था ताकि किसी प्रकार की अफवाह, भीड़ या तनाव की स्थिति उत्पन्न न हो सके। क्षेत्रभर में चर्चा में बनी इस कार्रवाई को देखने के लिए आसपास के घरों की छतों और सड़कों पर बड़ी संख्या में लोग देर रात तक मौजूद रहे।

एएसपी विशाल पांडेय के अनुसार, प्राथमिक जांच और राजस्व अभिलेखों से प्रमाणित हुआ कि यह मजार वर्ष 2013 में सरकारी भूमि पर कब्जे की नियत से बनाई गई थी। आरोप है कि तत्कालीन सपा विधायक और प्रदेश के टॉप टेन भू-माफियाओं की सूची में शामिल आरिफ अनवर हाशमी की ओर से शहीदे मिल्लते अब्दुल क़ुद्दूस शाह रहमतुल्लाह अलैह के नाम पर मजार का निर्माण कराया गया था, ताकि इसे धार्मिक आस्था के आवरण में सुरक्षित कर सरकारी जमीन पर स्थायी कब्जा किया जा सके। दस्तावेज़ों में जो भूमि संख्या दर्ज की गई थी वह गाटा संख्या 696—रकबा दो एकड़ थी, जो थाना परिसर की मूल भूमि है।

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न्यायालय और प्रशासनिक जांच ने खोले मजार निर्माण के रहस्य

मामला अदालत तक पहुंचने के बाद 19 मार्च 2024 को मजार बनाम सरकार के नाम से वाद पर सुनवाई हुई। इसमें एसडीएम उतरौला ने स्पष्ट आदेश दिया कि सादुल्लाहनगर की सरकारी भूमि पर निजी हित में धार्मिक ढांचे के रूप में कब्जा किया गया है। इसके बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कराने और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने के आरोप में पूर्व विधायक आरिफ अनवर हाशमी व उनके भाई मारूफ अनवर हाशमी पर कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था।

इस मामले की उच्चस्तरीय जांच राजस्व, पुलिस और जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से कराई। रिपोर्ट में मजार को पूरी तरह अवैध और कब्जे की मंशा से किया गया निर्माण माना गया। इसके आधार पर पुलिस विभाग ने कार्रवाई करने की तैयारी शुरू की और शनिवार देर शाम बुलडोजर लगाकर मजार को जमींदोज कर दिया गया।

तालाब में फेंका गया मलबा — सबूतों को सुरक्षित कर प्रशासन ने उठाया बड़ा कदम

रिपोर्ट के अनुसार, ढहाई गई मजार का मलबा राजस्व टीम की निगरानी में तालाब में डलवाया गया ताकि आगे कोई पुनर्स्थापना, विवाद या दावे की गुंजाइश न रहे। एएसपी विशाल पांडेय का कहना है कि मजार को केवल धार्मिक ढांचा समझकर नहीं, बल्कि अकथित तौर पर सरकारी भूमि कब्जाने की योजनाबद्ध रणनीति के रूप में इस्तेमाल किया गया था। इसलिए यह कार्रवाई न केवल कानूनी थी बल्कि प्रशासनिक रूप से अनिवार्य भी।

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कार्रवाई के दौरान सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गई। किसी भी तरह की अशांति न फैले, इसके लिए अतिरिक्त पुलिस बल, पीएसी और खुफिया विभाग को भी तैनात रखा गया। आसपास के सभी रास्तों को नियंत्रित रखा गया जबकि थाने के भीतर सिर्फ अधिकृत अधिकारियों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई। लगभग ढाई घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद परिसर को पूरी तरह सुरक्षित घोषित कर दिया गया।

कब्जों पर बुलडोजर — जिले में भेजा गया कड़ा संदेश

इस कार्रवाई को प्रशासनिक हलकों में अतिक्रमण और भू-माफियाओं के खिलाफ बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। यह भी माना जा रहा है कि सरकारी जमीन पर कब्जा चाहे धर्म के नाम पर हो या व्यवसाय के नाम पर — आगे ऐसी कोई कोशिश की जाएगी तो परिणाम कठोर होंगे। जिले के नागरिकों ने भी इस कार्रवाई को सरकार के दृढ़ रुख के रूप में देखा है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार भविष्य में भी ऐसी सभी जमीनों की जांच की जाएगी, जहां यह संदेह हो कि सत्ता या प्रभाव के बल पर लंबे समय से कब्जा किया गया है।

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सादुल्लाहनगर थाने में बनी मजार को क्यों गिराया गया?

जांच में पुष्टि हुई कि यह मजार सरकारी भूमि पर कब्जा करने की योजना के तहत अवैध रूप से बनाई गई थी।

मजार किसके नाम से बनवाई गई थी?

शहीदे मिल्लते अब्दुल क़ुद्दूस शाह रहमतुल्लाह अलैह के नाम पर।

पुलिस कार्रवाई किसके आदेश पर हुई?

अदालत के आदेश और प्रशासनिक जांच रिपोर्ट के आधार पर बलरामपुर पुलिस एवं राजस्व विभाग द्वारा संयुक्त रूप से कार्रवाई की गई।

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