श्री हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर आवास विकास क्षेत्र गुरुवार को श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के रंग में पूरी तरह डूबा नजर आया। हर गली, हर मार्ग और हर चौक पर “जय श्री राम” और “जय बजरंगबली” के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा क्षेत्र अंजनी धाम का स्वरूप धारण कर चुका हो, जहां आस्था की ऊर्जा हर दिल में स्पंदित हो रही थी।

शोभायात्रा का शुभारंभ सीताराम मंदिर, नगला अजीता, सेक्टर 8 से सांय 5 बजे हुआ। शुभारंभ के दौरान आयोजन समिति ने विधिवत झंडी दिखाकर यात्रा को रवाना किया। हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस शोभायात्रा में शामिल हुए और पूरे मार्ग में भक्ति का अद्भुत वातावरण बना रहा।
🎡 झांकियों ने जीवंत किया धार्मिक इतिहास
इस भव्य शोभायात्रा में 50 से अधिक आकर्षक झांकियां शामिल की गईं, जो भगवान श्री राम, माता सीता और हनुमान जी के विभिन्न स्वरूपों को दर्शाती हुई श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनीं। इन झांकियों में धार्मिक कथाओं और पौराणिक प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति का अहसास हुआ।
हर झांकी मानो एक कहानी कह रही थी—रामभक्ति, त्याग, वीरता और सेवा की। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इन झांकियों को देखकर मंत्रमुग्ध हो उठे।

🥁 ढोल-नगाड़ों और भजनों से गूंजा वातावरण
ढोल-नगाड़ों की गूंज, भजन-कीर्तन की मधुर धुन और श्रद्धालुओं की ऊर्जा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। हाथों में भगवा ध्वज लिए श्रद्धालु नाचते-गाते शोभायात्रा में शामिल हुए और पूरे मार्ग में उत्साह की लहर दौड़ती रही।
जगह-जगह स्थानीय लोगों ने शोभायात्रा का स्वागत किया। पुष्प वर्षा, जलपान और प्रसाद वितरण के माध्यम से लोगों ने अपनी आस्था और सेवा भाव का परिचय दिया।
⚔️ अखाड़ों के प्रदर्शन ने बढ़ाया रोमांच
इस आयोजन में अन्य शहरों से आए एक दर्जन अखाड़ों ने अपने हैरतअंगेज करतबों से लोगों को रोमांचित कर दिया। तलवारबाजी, लाठी-कला और पारंपरिक युद्धकला के प्रदर्शन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
बच्चों और युवाओं में इन प्रस्तुतियों को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। अखाड़ों के कलाकारों ने जिस कुशलता और साहस का प्रदर्शन किया, उसने शोभायात्रा को और भी भव्य बना दिया।
🎭 “बाबा हनुमान” जन्म की जीवंत प्रस्तुति बनी आकर्षण
अंजनी धाम का मंच इस आयोजन का विशेष आकर्षण रहा। यहां “बाबा हनुमान” के जन्म का जीवंत और भावपूर्ण मंचन किया गया, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
इस प्रस्तुति ने न केवल धार्मिक भावनाओं को जागृत किया, बल्कि लोगों को आध्यात्मिक रूप से भी जोड़ दिया। मंच के सामने खड़े श्रद्धालु इस दृश्य को देखकर भाव-विभोर हो उठे।
📍 मार्ग और व्यवस्थाएं रहीं व्यवस्थित
शोभायात्रा विभिन्न प्रमुख मार्गों से होती हुई टेम्पू स्टैंड के सामने, शिवालिक स्कूल मोड़ के समीप सेक्टर 7 के मैदान में संपन्न हुई। पूरे मार्ग में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे और स्वयंसेवकों ने व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रशासन और आयोजन समिति के समन्वय से कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।
👥 गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर स्थानीय गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। सुनील पाराशर, गुंजन पाराशर, भूपेन्द्र सारस्वत, प्रदीप शर्मा, सुनील शुक्ला, विवेक पाराशर, विनोद माहोर, करन गर्ग, राज कुमार पथिक, पूर्व पार्षद जितेन्द्र पाराशर (पोद्दार), अजय कुशवाहा, शिवम दुर्वे, अनुज पाठक, मीडिया प्रभारी अमोल दीक्षित, डॉ लक्ष्मी रानी, मंजू सिंह, प्रोफेसर आशुतोष भंडारी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम अध्यक्ष सुनील पाराशर और मीडिया प्रभारी अमोल दीक्षित ने सभी सहयोगियों, श्रद्धालुओं और मीडिया का आभार व्यक्त किया।
🌸 भक्ति, एकता और संस्कृति का संदेश
पूरे आयोजन के दौरान आवास विकास क्षेत्र भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। यह शोभायात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि समाज में एकता, सद्भाव और सांस्कृतिक गौरव का संदेश भी दे गई।
स्थानीय निवासियों में इस आयोजन को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। जगह-जगह पोस्टर, बैनर और स्वागत द्वार लगाए गए, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना रहा।
🪞 निष्कर्ष: आस्था का जीवंत उत्सव
यह हनुमान जन्मोत्सव न केवल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का पर्व बना, बल्कि सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक बन गया। भव्य शोभायात्रा, झांकियों और मंचीय प्रस्तुतियों ने इसे यादगार बना दिया।
जब हजारों लोग एक साथ “जय बजरंगबली” का उद्घोष करते हैं, तो वह केवल आवाज नहीं होती—वह आस्था की वह शक्ति होती है, जो समाज को जोड़ती है।
❓ शोभायात्रा कब शुरू हुई?
शोभायात्रा का शुभारंभ शाम 5 बजे सीताराम मंदिर, नगला अजीता से हुआ।
❓ शोभायात्रा में कितनी झांकियां शामिल थीं?
इस शोभायात्रा में 50 से अधिक आकर्षक झांकियां शामिल थीं।
❓ कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण क्या रहा?
“बाबा हनुमान” के जन्म की जीवंत प्रस्तुति और अखाड़ों के प्रदर्शन मुख्य आकर्षण रहे।





