लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर अब निर्णायक विराम लगता दिखाई दे रहा है।
उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग
द्वारा पूरे प्रदेश के लिए नई कॉस्ट डाटा बुक जारी किए जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि बिजली वितरण कंपनियों ने बिना अनुमति स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत तय कर उपभोक्ताओं से मनमानी वसूली की थी। आयोग के ताजा आदेश के अनुसार, इस अतिरिक्त वसूली से प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को कुल मिलाकर 102 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ, जिसे अब उपभोक्ताओं के बिजली बिल में समायोजित किया जाएगा।
कॉस्ट डाटा बुक ने खोली बिजली कंपनियों की मनमानी
नियामक आयोग द्वारा जारी कॉस्ट डाटा बुक में स्मार्ट मीटर की वास्तविक लागत का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। आयोग के अनुसार,
सिंगल फेस स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अधिकतम वास्तविक लागत 2800 रुपये और
थ्री फेस स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अधिकतम लागत 4100 रुपये से अधिक नहीं है।
इसके बावजूद प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों ने 9 सितंबर 2025 को एक आंतरिक आदेश जारी कर सिंगल फेस मीटर की कीमत 6016 रुपये
और थ्री फेस मीटर की कीमत 11341 रुपये वसूलनी शुरू कर दी थी, जबकि इसके लिए नियामक आयोग से कोई पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी।
आंकड़ों ने साबित किया उपभोक्ताओं के साथ हुआ बड़ा अन्याय
10 सितंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 के बीच प्रदेश भर में कुल 3,18,740 बिजली उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर के लिए एस्टीमेट राशि जमा की।
इनमें से लगभग 90 प्रतिशत उपभोक्ता सिंगल फेस कनेक्शन वाले थे।
यदि बिजली कंपनियों द्वारा वसूली गई 6016 रुपये की दर को आधार बनाया जाए,
तो कुल वसूली लगभग 191 करोड़ रुपये तक पहुंचती है।
वहीं, नियामक आयोग द्वारा निर्धारित 2800 रुपये की वैध दर के अनुसार यह राशि केवल 89 करोड़ रुपये के आसपास बैठती है।
इस प्रकार, बिजली कंपनियों द्वारा की गई अतिरिक्त वसूली करीब 102 करोड़ रुपये से अधिक साबित हुई।
आयोग ने इसे सीधे तौर पर उपभोक्ता हितों का उल्लंघन मानते हुए आदेश दिया है कि यह पूरी राशि
उपभोक्ताओं के आगामी बिजली बिलों में समायोजित की जाए।
उपभोक्ता परिषद ने जताया आयोग का आभार
इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद यूपी राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य
अवधेश कुमार वर्मा
ने नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार
और प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा से मुलाकात कर आभार व्यक्त किया।
अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि यह फैसला केवल आर्थिक राहत नहीं है, बल्कि यह उपभोक्ताओं के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की पुनर्स्थापना भी है।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं पर दबाव बनाकर महंगे प्रीपेड मीटर थोप रही थीं,
जिस पर अब नियामक आयोग ने स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया है।
पोस्टपेड या प्रीपेड: उपभोक्ता को मिलेगा विकल्प
अवधेश कुमार वर्मा ने स्पष्ट किया कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत
हर उपभोक्ता को यह कानूनी अधिकार प्राप्त है कि वह पोस्टपेड या प्रीपेड मीटर में से किसी एक का चयन कर सके।
इसके बावजूद अब तक अधिकांश मामलों में इस प्रावधान का पालन नहीं किया जा रहा था।
नई कॉस्ट डाटा बुक में यह बात स्पष्ट रूप से दर्ज कर दी गई है कि यदि उपभोक्ता पोस्टपेड कनेक्शन चाहता है
और निर्धारित सिक्योरिटी राशि जमा करता है, तो उसे पोस्टपेड कनेक्शन देना पूरी तरह कानूनी और वैध है।
बिजली कंपनियां अब किसी भी स्थिति में उपभोक्ता को जबरन प्रीपेड मोड स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं कर सकतीं।
स्मार्ट मीटर तकनीक और सहमति का सवाल
उपभोक्ता परिषद का कहना है कि यह सर्वविदित तथ्य है कि स्मार्ट मीटर तकनीकी रूप से
पोस्टपेड और प्रीपेड दोनों मोड में कार्य करने में सक्षम होता है।
ऐसे में केवल प्रीपेड मोड लागू करना तकनीकी आवश्यकता नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक निर्णय था,
जो उपभोक्ता की सहमति के बिना लागू किया गया।
अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार, बिना सहमति किसी उपभोक्ता को प्रीपेड मोड में डालना
सीधे तौर पर विद्युत अधिनियम का उल्लंघन है।
नियामक आयोग के इस ताजा फैसले ने अब इस मुद्दे पर पूरी तरह स्थिति स्पष्ट कर दी है।
12 जनवरी से पहले लागू करना होगा नया आदेश
नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि
12 जनवरी से पहले नई कॉस्ट डाटा बुक को हर हाल में लागू किया जाए।
इसके लिए सभी वितरण कंपनियों को अपने सॉफ्टवेयर सिस्टम अपडेट करने होंगे,
ताकि नई दरें और उपभोक्ता विकल्प सही तरीके से प्रतिबिंबित हो सकें।
आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि स्मार्ट मीटर लगाए जा सकते हैं,
लेकिन उनका मोड प्रीपेड होगा या पोस्टपेड—यह पूरी तरह उपभोक्ता की सहमति पर निर्भर करेगा।
स्मार्ट मीटर विवाद पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या सभी उपभोक्ताओं को पैसा वापस मिलेगा?
हां, जिन उपभोक्ताओं से स्मार्ट मीटर के लिए अतिरिक्त राशि वसूली गई है, उन्हें यह रकम उनके आगामी बिजली बिल में समायोजित की जाएगी।
क्या प्रीपेड मीटर लेना अब अनिवार्य है?
नहीं, नियामक आयोग के अनुसार उपभोक्ता की सहमति के बिना प्रीपेड मीटर लागू नहीं किया जा सकता। पोस्टपेड विकल्प पूरी तरह वैध है।
नई दरें कब से लागू होंगी?
आयोग के आदेशानुसार 12 जनवरी से पहले सभी बिजली कंपनियों को नई कॉस्ट डाटा बुक लागू करनी होगी।
अगर बिल में समायोजन नहीं हुआ तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में उपभोक्ता संबंधित बिजली कंपनी या यूपी विद्युत नियामक आयोग में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।










